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अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह सजग रहने वाला व्यक्ति ही सफलता के मुकाम पर पहुंचता है

Rupesh Kumar 2020-02-13 14:48:39    EDITORSPICK 3416
अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह सजग रहने वाला व्यक्ति ही सफलता के मुकाम पर पहुंचता है
पटना, 13 फरवरी 2020, (आरएनआई )। एक तरफ इंसान अपनी असमर्थता का रोना होते हुए पूरा जीवन गुजार देता है वहीं दूसरी तरफ ऐसे लोग भी होते हैं जो अपने अदम्य साहस कर्मठता और खुद के दम पर अपना मुकाम हासिल करते हैं आज की कड़ी में हम आपको एक ऐसे ही शख्सियत मिलवाने जा रहे हैं जिसने खुद के दम पर बिहार में व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी एक अनूठी और विशिष्ट पहचान बनाई है और दी है हमें आशा.

अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह सजग रहने वाला इंसान ही सफलता के मुकाम पर पहुंच पाता है.इस कहावत को वास्तविकता के धरातल पर अक्षरश सत्य कर दिखाया है.बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के राघवा छपरा गांव निवासी युवा व्यवसायी भूषण कुमार सिंह बबलू ने .ये बिहार युथ बिल्डर एसोसिएशन के अध्यक्ष है. साथ ही साथ पटना ग्रीन हाउसिंग प्राइवेट लिमिटेड के प्रबंध निदेशक भी.सामाजिक गतिविधियों में भी इनकी सक्रियता इन्हें भीड़ से अलग करती है. संघर्षों के बल पर सफलता का मुकाम पाने वाले भूषण सिंह ने अपने कठिन परिश्रम अदम्य साहस और इमानदारी पूर्वक किए गए कार्यो बदौलत बिहार के उधोगपतियों के भीड़ में अपनी एक अनूठी पहचान बनाई है।15अप्रैल 1986 को पिता श्री राम शंकर सिंह माता श्री मती शैल देवी – के घर पुत्ररत्न के जन्मे भूषण जी की शिक्षा दिक्षा मुज़फ़्फ़रपुर से प्राप्त हुई .दस बारह साल पहले पटना में आने के बाद काफ़ी संघर्ष एवं काफ़ी समस्याओ से जूझने के बाद अच्छे बुरे लोगों से भी मूलाकात हुई .और ऐसे भी इन्हे शुरु से बिजनेश ही दिमाग़ में दौड़ता था और इन्होंने ऐसे बहुत से छोटे मोटे बिजनेश भी किया लेकिन ये सब में कही लापरवाही एवं कही असफलता हासिल होने के बावजूद हिम्मत नही हारे और एक दिन आया जिस दिन PGHPL यानी पटना ग्रीन हाऊसिंग प्रा.लि. का नीव रखा 19/06/2017 को बिहार के रियल इस्टेट व्यवसाय में ईमानदारी पूर्वक अपनी पहचान बनाई.2 वर्षों के अंतर्गत ही इनकी की कंपनी बिहार के अग्रणी कंपनियों में शुमार हो चुकी है जल्द ही यह भवन निर्माण मॉल स्कूल इंटरटेनमेंट एजुकेशन हेल्थ सेक्टर में भी अपना विस्तार करने जा रहे हैं .बातचीत के क्रम में भूषण कुमार सिंह बबलू ने बताया कि उन्होंने कभी भी असफलता दर असफलता मिलने के बावजूद हिम्मत नहीं हरी. उन्होंने खुद के दम पर अपना मुकाम बनाया.

भूषण कुमार सिंह बबलू ने बताया कि बिहार जैसे प्रांत में समाजिक कार्यों में उनकी कंपनी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती है सामाजिक दायित्वों के निर्वहन के तहत ही कंपनी ने इस वर्ष अपने द्वितीय स्थापना दिवस के उपलक्ष में समाज के लिए लड़ने वाले सिपाहियों को सम्मानित कर एक अनूठी परंपरा की शुरुआत की है उन्होने बताया कि बिहार में रोजी रोजगार का वैसे ही अभाव है रियल इस्टेट के क्षेत्र में संभावनाएं तो बहुत है किंतु सरकार के ढुलमुल रवैया के कारण रियल स्टेट का व्यवसाय भी गति नहीं पकड़ पाया है लोगों के घर के सपनों को पूरा करने के उद्देश्य से 2 वर्ष पूर्व उन्होंने इस कंपनी की स्थापना की थी उन्हें इस बात की खुशी है कि उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ अपने लक्ष्य के तरफ कदम बढ़ाया है आने वाले समय में बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन टाउनशिप के निर्माण के क्षेत्र में भी कंपनी पर्दापण करने जा रही है. मुजफ्फरपुर के पारु विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों इन की धमक बढ़ी है अब तक दर्जनों हेल्थ कैंप गरीब कन्याओं का विवाह बेरोजगार युवाओं को स्वरोजगार लोगों में जागरूकता अभियान भी इनके द्वारा फैलाया जा रहा है चुनाव लड़ने के सवाल पर यह कहते हैं कि जनतंत्र में जनता ही मालिक है अगर लोगों का विश्वास मेरे ऊपर होगा तो जरूर चुनाव लड़ूंगा.



(रिपोर्ट-अनूप नारायण सिंह)








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समाचार पत्र एवं न्यूज़ एजेंसी के विज्ञापन आधारित पत्रकारों के लिए राहत पैकेज लाये सरकार
Root News of India 2020-03-28 13:01:20
नई दिल्ली, 28 मार्च 2020, (आरएनआई )। कोरोना महामारी के चलते देशभर में लगाए गए लॉकडाउन से आम आदमी के साथ समाचार पत्र एवं न्यूज़ एजेंसी के अवैतनिक पत्रकार भी इससे अछूते नहीं है। लॉकडाउन के चलते अवैतनिक पत्रकारों के विज्ञापन आधारित आय के स्रोत भी बंद हो चुके हैं। फिर भी यह पत्रकार अपनी जान जोखिम में डालकर अपने वाहनों में तेल डलवा कर सरकार के साथ-साथ जिला प्रशासन द्वारा करवाये जा रहे जनहित के कार्यों की खबरें जनता तक पहुंचाकर समाज को जागरूक करने में लगे हैं। लेकिन ना ही सरकार और ना जिला प्रशासन द्वारा अवैतनिक पत्रकारों के लिए कोई राहत भरी घोषणा की गई है। आखिर इनके भी तो परिवार है और जिला प्रशासन को अवैतनिक पत्रकारों की समस्याओं से अवगत होकर उनका निराकरण भी करना चाहिए। कोरोना महामारी के चलते विज्ञापन आधारित आय बंद होने के कारण अवैतनिक पत्रकारों के लिए भी राहत पैकेज की घोषणा करें सरकार।
रोहित सक्सेना, नीरज गुप्ता की नयी पारी, लायेंगे नया मीडिया वेंचर, जनता के सामने रखेंगे सांसदों के कामकाज का लेखा-जोखा
Shyam Chandra Srivastav 2020-03-24 09:38:26
नई दिल्ली, 24 मार्च 2020, (आरएनआई )। दो दशक से ज्यादा समय तक प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विभिन्न संस्थानों में अपनी सेवाएं दे चुके मीडिया जगत की नामचीन हस्ती रोहित सक्सेना ने लंबे समय से संसदीय कार्यप्रणाली और संसद व सांसदों से जुड़ी खबरों से रूबरू कराने वाले ‘पार्लियामेंट्री बिजनेस’ (ParliamentaryBusiness.com) के तहत सांसदों पर रिसर्च कर रहे नीरज गुप्ता के साथ मिलकर इसे अब मीडिया वेंचर का रूप देकर जनता में आ रहे है। प्राप्त जानकारी के अनुसार रोहित सक्सेना इस ग्रुप में सीईओ और मैनेजिंग एडिटर के रूप में कार्यभार संभालेंगे तो वहीं नीरज गुप्ता बतौर एडिटर-इन-चीफ अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे।
बिहार के वरिष्ठ पत्रकार अनूप नारायण सिंह के कलम से पढ़िए रघुवंश बाबू जैसे लोगों का अपने ही दल में अज्ञातवास के क्या है मायने
Rupesh Kumar 2020-03-13 16:10:14
पटना, 13 मार्च 2020, (आरएनआई )। बिहार की राजनीति में रघुवंश प्रसाद सिंह जैसे लोग ईमानदारी कर्तव्यनिष्ठा दल के प्रति समर्पण भाव और पद की लालसा में कभी दलबदल को स्वीकार नहीं करने वाली पीढ़ी की आखिरी उम्मीद सरीखे वटवृक्ष है. इसे लालटेन वाली राजद पार्टी ने आज पूरी तरह बुझा दिया है राजद में रहते हुए एकमात्र ऐसे नेता हैं जिनके खिलाफ किसी प्रकार का आरोप प्रत्यारोप नहीं केंद्र में मंत्री रहे ग्रामीण विकास के माध्यम से बिहार चप्पे-चप्पे पर सड़कों की सौगात दे दी जहां कहीं रहे अपनी अनूठी छाप छोड़ी. लगातार दो बार वैशाली से नौसीखिए लोगों से इसलिए चुनाव हार गए क्योंकि इन्होंने लालू का दामन नहीं छोड़ा. वैसे इस सच्चाई से रघुवंश बाबू भी अवगत है की लालटेन पार्टी से ज्यादा कद्र उनकी भाजपा या जदयू में है जहां उनकी विद्वता और कर्मठता की पूछ है पर आत्म निष्ठा के साथ कभी भी उन्होंने मौका परस्ती नहीं की जिस राजद के बुझते लालटेन को कई बार उन्होंने लौ दी उसी राजद ने राज्यसभा के एक अदद सीट के लायक ही इस ईमानदार नेता को नहीं समझा.रघुवंश बाबू को किसी जाति या जमात से बांधना भी उचित नहीं राजपूत जाति के लोगों को इस बात पर गर्व हो सकता है कि रघुवंश बाबू राजपूत है पर मेरा मानना है कि रघुवंश बाबू किसी एक जाति के नहीं एक ऐसे आधारस्तंभ है जिन्हें राजनीति में ईमानदारी की अनूठी मिसाल के रूप में याद किया जाएगा. मौकापरस्त राजनीति में मोहरे बना दिए गए रघुवंश बाबू लेकर आज बिहार के चप्पे-चप्पे में चर्चा है. चर्चा में कहीं न कहीं राजनीति में ईमानदारी की उम्मीद रखने वाले लोगों की वेदना भी समाहित है जिसकी बड़ी कीमत आने वाले विधानसभा चुनाव में राजद को चुकानी पड़ सकती है. राजद के सिपहसालार ओं को समझना चाहिए कि रघुवंश सिंह जैसे अंतिम पीढ़ी के ईमानदार लोग किसी के पास राज्यसभा सीट के लिए चिरौरी करने नहीं जाते और ना ही अपनी वेदना जाहिर करते है पर दल के लाखों कार्यकर्ता इस बात को भलीभांति समझते हैं कि जो दल रघुवंश बाबू जैसे समर्पित व्यक्ति का ना हुआ तो उनके जैसे अदने कार्यकर्ताओं का क्या होगा.(रिपोर्ट-अनूप नारायण सिंह)
उत्तर प्रदेश में सत्ता की आड़ में चलता है अपहरण उद्योग
Root News of India 2020-02-29 12:35:06
जाति, धर्म, पार्टी, देशभक्ति के नाम पर नफरत फैलाने वाले फर्जी ठेकेदारों का जब-जब सच लिखता हूँ तो ऐसे गुंडे जाति-धर्म, देशभक्ति-हिन्दू रक्षा के नाम पर सत्ता, धर्म, जाति, भगवा झंडे का कवच लगाकर मेरी पोस्ट पर गाली-गलौज करते हैं, ऐसा ही ये भी वो देशभक्त है जो जाति-धर्म का झंडा अपनी फेसबुक आईडी पर लगाकर जाति-धर्म, देश भक्ति की अलख जगाता रहा है, बल्कि सत्ताधारी-विपक्ष, जातीय नेताओं के साथ अनेक मंच भी साझा करता रहा है, लेकिन इसका कड़वा सच ये है कि इस पर अब यूपी सरकार ने एक लाख का इनाम घोषित किया है, जिस पर मथुरा के प्रमुख चिकित्सक निर्विकल्प अग्रवाल का अपहरण कर 50 लाख से अधिक की फिरौती वसूलने का आरोप है, बल्कि मथुरा पुलिस द्वारा पकड़ने के बाद फिरौती मे वसूली गई फिरौती की रकम को हजम कर उक्त बदमाश और उसके अन्य साथियों को छोड़ने का आरोप भी है इस बदमाश की सत्ता एवं विपक्ष के कई नेताओं से भी नजदीकी रही है, बल्कि कुछ दिन पूर्व तक सत्ता - जाति, देशभक्ति की अलख भी जोर-शोर से जगाता रहा है, अब यूपी पुलिस एक लाख के इस फर्जी देशभक्त बदमाश महेश चौधरी निवासी गाँव कौलाहर थाना नौझिल जिला मथुरा की तलाश में तलाश में जोर-शोर से जुटी हैं, अब देखना होगा कि इसे यूपी पुलिस ऊपर पहुचाने या जेल के सींखचों के अंदर पहुचाने मे सफल साबित होती है। ऐसे ही कुछ और जाति-धर्म, पार्टी नकाब ओढ़कर हमें डराने का प्रयास करते हैं लेकिन हम उन्हें बेनकाब करते रहेंगे.... आप भी जाति-धर्म,पार्टी के नाम पर किसी से नफरत करने से पहले एक बार जरूर मंथन करें कि कहीं हमारे बीच नफरत की आग लगाकर हमें ही उजाड़ने का प्रयास तो नही किया जा रहा है....(मफतलाल अग्रवाल)
जानिए क्या हुआ प्रोफेसर मटुकनाथ की लव स्टोरी में
Rupesh Kumar 2020-02-19 17:21:56
पटना, 19 फरवरी 2020, (आरएनआई )। पटना विश्वविद्यालय के प्रफेसर मटुकनाथ साल 2006 में खुद से 30 साल छोटी छात्रा जूली के साथ प्रेम संबंध को लेकर पूरे देश में चर्चा में आए थे। जूली मटुकनाथ के साथ 2007 से 2014 तक लिव इन रिलेशनशिप में भी रही, लेकिन इसके बाद वह पटना से चली गई। उस समय कहा गया था कि जूली और मटुक की पहली मुलाकात साल 2004 में हुई थी। मटुकनाथ पटना के बीएन कॉलेज में पढ़ाते थे और जूली उनकी छात्रा थी।मटुकनाथ ने शिष्या से प्रेम होने पर अपने बसे बसाए परिवार का साथ छोड़ दिया था। उधर जूली के परिवार वालों ने भी उससे रिश्ते तोड़ लिए थे। इस प्रेम संबंध का काफी विरोध हुआ था। यहां तक कि कुछ लोगों ने मटुकनाथ के मुंह पर कालिख तक पोत दिए थे। विवाद बढ़ने पर विश्वविद्यालय ने मटुकनाथ को निलंबित कर दिया था। इस घटना के बाद मटुकनाथ ‘लवगुरु’ नाम से चर्चित हो गए थे।
भोजपुरी भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा का एक ऐसा अंग है जो हमारी बहुरंगी संस्कृति को उसके मूल स्वरूप में पेश करने की कोशिश कर रही है
Rupesh Kumar 2020-02-18 15:51:59
पटना, 18 फरवरी 2020, (आरएनआई )। भोजपुरी भारतीय क्षेत्रीय सिनेमा का एक ऐसा अंग है जो हमारी बहुरंगी संस्कृति को उसके मूल स्वरूप में पेश करने की कोशिश कर रही है। भोजपुरी फिल्मों का कारोबार यूपी, बिहार, झारखंड के अलावा पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र आदि राज्यों में है। विकास की प्रारंभिक अवस्था को पार कर यह संक्रमण के उस दौर में पहुंच चुका है । अब उसे ये फैसला करना है कि वह विकास के किस रास्ते को चुने। वरिष्ठ फिल्म पत्रकार अनूप नारायण सिंह ने भोजपुरी फिल्मों के महानायक कुणाल सिंह से जानने की कोशिश की है कि कैसा होना चाहिए भोजपुरी सिनेमा का स्वरूप? कुणाल एक मात्र कलाकार हैं जो अब तक 300 से भी ज्यादा भोजपुरी फिल्में कर चुके हैं। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...
फेम इंडिया की 25 सशक्त महिलाओं की सूची में बीबीसी की हेड रूपा झा सहित चार बिहार से
Rupesh Kumar 2020-02-18 15:48:51
पटना, 18 फरवरी 2020, (आरएनआई )। फेम इंडिया मैगजीन और एशिया पोस्ट सर्वे ने 25 सशक्त महिलाओं की आधिकारिक सूची की घोषणा इस सप्ताह में की. जिसमें इंटरनेशनल विमेन कांफ्रेंस की चेयरपर्सन और आर्ट आफ लिविंग की इंटरनेशनल स्प्रिच्युअल टीचर भानुमती नरसिम्हन , बैडमिंटन में विश्व की टॉप रैंकिंग में शामिल पी वी सिंधु , बीबीसी इंडिया के कई भाषाओं की हेड रुपा झा , तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा, महाराष्ट्र से निर्दलीय सांसद नवनीत राणा शीर्ष पांच में जगह बनाने में सफल रहीं।
आज मिलिए विदेशी छात्रों का देशी गुरु श्रवण कुमार से
Rupesh Kumar 2020-02-18 15:47:43
पटना, 18 फरवरी 2020, (आरएनआई )। भारत विश्व गुरु रहा है इतिहास साक्षी है कि नालंदा और तक्षशिला विश्वविद्यालय मैं पूरी दुनिया से छात्र शिक्षा ग्रहण करने आते थे उसी परंपरा को आज भी नई दिशा देने में लगे हैं बिहार की राजधानी पटना के युवा गुरु श्रवण कुमार।(रिपोर्ट-अनूप नारायण सिंह)
पंचायती राज व्यवस्था में अधिकार के लिए पटना से चंपारण तक की पदयात्रा
Rupesh Kumar 2020-02-18 15:46:37
पटना, 18 फरवरी 2020, (आरएनआई )। नाम संजय कुमार सिंह, पिता अवध किशोर सिंह, ग्राम.. पोस्ट.. अलावलपुर, प्रखंड फतुहा, जिला पटना।योग्यता...स्नातकोत्तर, राजनीति शास्त्र, पटना विश्वविद्यालय।छात्र विकास मंच के अध्यक्ष पटना विश्वविद्यालय1994 पटना, जन कल्याण क्षत्रिय युवा मंच, प्रदेश उपाध्यक्ष, पंचायत समिति सदस्य, ग्राम पंचायत अलावलपुर फतुहा2001,अध्यक्ष.. पंचायत समिति संघर्ष मोर्चा, चंपारण पद यात्रा2004, संयोजक बरगायाँ विकास मंच,भारत जागरण मंच, वर्तमान में प्रदेश प्रधान महासचिव जदयू सेवादल बिहार।संस्थापक सह संयोजक ब्रह्म बाबा सेवा एवं शोध संस्थान, निरोगधाम, अलावलपुर पटना बिहार.(रिपोर्ट-अनूप नारायण सिंह)
तो क्या लखनऊ मे प्रेस क्लब नही है !
Root News of India 2020-02-17 15:09:25
" किसी की नहीं सिर्फ पेंटर की गलती थी, यूनियन भवन लिखना था लेकिन उसने 'यूपी प्रेस क्लब' लिख दिया"।उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के पत्रकारों का दुर्भाग्य है कि उनका कोई प्रेस क्लब नहीं है। शायद देश-दुनिया में लखनऊ ही एक ऐसी राजधानी है जहां के राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त/जिला मान्यता प्राप्त/ ग़ैर मान्यता प्राप्त पत्रकार एक अदद प्रेस क्लब से महरूम हैं। जबकि सरकारें यहां के पत्रकारों के हर सुख-दुख में सहयोग करने का दायित्व निभाती रही हैं। राजधानी के पत्रकारों के लिए भूमि/भवन/मकान और करोड़ों की आर्थिक सहायता देती रही हैं।
चिकित्सक के साथ ही सामाजिक अग्रदूत भी है बिहार डा राणा एसपी सिंह
Rupesh Kumar 2020-02-16 16:35:50
पटना, 16 फरवरी 2020, (आरएनआई )। सच ही कहा गया है कि इंसान अगर दिल में यह ठान ले कि उसे अपनी मंजिल को प्राप्त करना है तो रास्ते के कांटे भी उसे फूल नजर आने लगते हैं आज हम बात कर रहे हैं ऐसे इंसान की जिसने अपने लगन और कठिन परिश्रम के बल पर खुद को चिकित्सा क्षेत्र में स्थापित ही नहीं किया बल्कि एक अलग मिसाल कायम की है।राणा एसपी सिंह की कामयाबी की डगर इतनी आसान नही रही और
पत्रकारों की सियासत में नरेंद्र मोदी कहे जाने वाले पत्रकार नेता हेमंत तिवारी अब अरविंद केजरीवाल की राह पर
Root News of India 2020-02-15 20:15:00
उ.प्र. राज्य मुख्यालय मान्यता प्राप्त संवाददाता समिति की चुनावी गर्मागर्मी में यूपी प्रेस क्लब शाहीबाग़ साबित हो सकता है। संवाददाता समिति के अध्यक्ष हेमंत तिवारी ने लखनऊ के सभी मान्यता प्राप्त पत्रकारों को प्रेस क्लब की सदस्यता दिलाने का एलान किया है। उन्होंने साफ कह दिया है कि यूपी प्रेस क्लब को आजाद कराने के लिए उन्हे प्रदेश के पत्रकारों के साथ प्रेस क्लब परिसर में धरने/अनशन पर बैठना पड़े या ताले तोड़कर वहां का निज़ाम अपने हाथों में लेना पड़े, अब वो संयम नहीं बरत सकते। समिति के अध्यक्ष ने कहा कि उ.प्र.संवाददाता समिति का चुनाव अप्रैल मे होना है, और इससे पहले ही प्रदेश के पत्रकारों के साथ मिलकर वो प्रेस क्लब की आजादी/सदस्यता और चुनाव का लंबित लक्ष्य प्राप्त कर लेंगे।
अपने लक्ष्य के प्रति पूरी तरह सजग रहने वाला व्यक्ति ही सफलता के मुकाम पर पहुंचता है
Rupesh Kumar 2020-02-13 14:48:39
पटना, 13 फरवरी 2020, (आरएनआई )। एक तरफ इंसान अपनी असमर्थता का रोना होते हुए पूरा जीवन गुजार देता है वहीं दूसरी तरफ ऐसे लोग भी होते हैं जो अपने अदम्य साहस कर्मठता और खुद के दम पर अपना मुकाम हासिल करते हैं आज की कड़ी में हम आपको एक ऐसे ही शख्सियत मिलवाने जा रहे हैं जिसने खुद के दम पर बिहार में व्यवसाय के क्षेत्र में अपनी एक अनूठी और विशिष्ट पहचान बनाई है और दी है हमें आशा.(रिपोर्ट-अनूप नारायण सिंह)
अपनी अलग सोच व काम के अलग अंदाज की वजह से एलिट इंस्टीच्यूट पहुंचा शिखर तक
Rupesh Kumar 2020-02-12 10:37:15
पटना, 12 फरवरी 2020, (आरएनआई )। अपनी अलग सोच व काम के अलग अंदाज की वजह से अमरदीप झा गौतम ने एलिट इंस्टीच्यूट को शिखर तक पहुंचा दिया है. बच्चों के साथ सपने देखना, उसके सपने बुनना और फिर उन सपनों को अंजाम तक पहुंचाने के लिए दिन-रात की मेहनत का ही नतीजा है कि हर साल एलिट इंस्टीच्यूट देश को बेहतर इंजीनियर और डॉक्टर देता रहा है.अगर 2019 के रिजल्ट पर नजर डालें, तो 178 जेईई मेन, 23 जेईई एडवांस्ड, 69 नीट-मेडिकल में और 2018 में 165 जी-मेन में, 30 बच्चे जी-एडवांस और नीट-2018 में 63 बच्चों को क्वालिफाइड करवा चुके अमरदीप झा गौतम का सफर काफी लंबा है।
अठाईस बरसों का दर्द अब बन गया है नासूर
Rupesh Kumar 2020-02-12 10:35:09
गया, 12 फरवरी 2020, (आरएनआई )। अठाईस बरसों का दर्द अब बन गया है नासूर, 28 वर्षों पूर्व गया के बारा में हुए नरसंहार में जो दर्द उभरी हुई थी वह अभी तक ताजा है। सुनी मांग और सुनी कोख का दर्द लिए बारा की आबोहवा में आज भी दर्द सिसकियां समाहित है।गया जिले की टिकारी प्रखंड अंतर्गत बारा गांव के लोग आज भी 28 साल पहले 12 फरवरी 1992 की उस मनहूस रात को याद कर सिहर जाते हैं। इसी रात को गांव के पश्चिमी हिस्से से आए हथियारबंद दर्जनों दरिदों ने 35 लोगों की गला रेतकर हत्या कर दी थी। बीच-बचाव में आई महिलाओं को हथियार की बट से बेरहमी से पीटा गया था। महिलाओं ने अपनी आंखों के सामने अपने सुहाग को मिटते देखा। किसी ने बेटा खोया तो कइयों के सिर से पिता का साया उठ गया।बारा नरसंहार ने तत्कालीन राज्य सरकार की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाया था। सरकार ने मृतकों परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की घोषणा की थी। साथ ही एक-एक लाख रुपये देने की भी घोषणा की गई थी, जो मिल गई।गांव के सत्येंद्र शर्मा बताते हैं, नरसंहार के बाद 22 परिवारों को नौकरी मिली, जबकि सभी 35 लोगों के आश्रित को नौकरी देने की घोषणा हुई थी। स्व. शिवजन्म सिंह, स्व. रामअकबाल सिंह, स्व. भुसाल सिंह, स्व. आसुदेव सिंह, स्व. बलिराम सिंह समेत कई अन्य के आश्रित को नौकरी नहीं मिली है।राज्य सरकार ने गांव की सुरक्षा के लिए थाना खोलने से लेकर तमाम विकास योजनाएं पहुंचाने का भरोसा दिया था। गांव में कई मृतकों के आश्रित तत्कालीन सरकार की घोषणा और आज की मौजूदा स्थिति पर असंतुष्टि जताते हैं। बारा नरसंहार में अपने पिता समेत दो चाचा और पांच चचेरे भाई को खोने वाले सत्येंद्र शर्मा कहते हैं कि घटना के बाद सरकार ने पुलिस सुरक्षा बढ़ाते हुए 20 बीएमपी का एक कैंप बनाया था। वह भी साल 1999-2000 में हटा लिया गया। गांव में थाना खोलने के लिए ग्रामीणों ने करीब छह कट्ठा जमीन भी दी है, लेकिन अब तक थाना नहीं बना। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क जैसी योजनाएं भी दुरुस्त नहीं हैं। सत्येंद्र सिंह कहते हैं, सड़क जर्जर हाल में है। दो कमरों में मध्य विद्यालय चल रहा है। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का सही लाभ भी ग्रामीणों को नहीं मिलता। सलेमपुर गांव के बाके बिहारी शर्मा कहते हैं, जिस हिसाब से आश्रितों का कल्याण होना चाहिए था, नहीं हुआ। गांव में विकास योजनाओं को अच्छी तरह से पहुंचाने की जरूरत है।वहीं, जिलाधिकारी अभिषेक सिंह ने कहा कि बारा गांव में विकास योजनाओं की जांच कराकर उसे और बेहतर किया जाएगा।अखिल भारतीय राष्ट्रवादी किसान संगठन के प्रवक्ता सत्येंद्र शर्मा कहते हैं, हत्या के सभी अभियुक्तों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए थी, जो नहीं मिली। सत्येंद्र शर्मा घटना के साल में रांची में अपने मामा जी के यहां रहते थे। जिन चार लोगों को फंासी होनी थी उसकी सजा उम्र कैद में बदल दी गई.(रिपोर्ट-अनूप नारायण सिंह)
अनूप नारायण सिंह के कलम से, चिट्ठियां हो तो हर कोई बांचे
Rupesh Kumar 2020-02-10 12:33:06
पटना, 10 फरवरी 2020, (आरएनआई )। ठीक से याद नहीं कि कब की बात है, पर एक जमाना था जब मैंने दूसरों की ढेरों चिट्ठियाँ लिखी थीं। पड़ोस की अनेक अनपढ़ चाचियां, और दूर कहीं पंजाब-गुजरात मे काम करने वाले चाचे... उनके बीच की एकमात्र कड़ी "चिट्ठी" और चिट्ठी का लेखक मैं... कसम वसन्त की, तब चिट्ठी लिखने से अधिक मोहक काम होता था लिखवाने वाली के चेहरे को पढ़ना! लाज के मारे जो बातें लिखवाई नहीं जा सकती थीं, आँखें जैसे वो सारी बातें कह देती थीं।दस मिनट तक सोचने के बाद हल्की सी मुस्कुराहट के साथ यह कहना कि, "लिख दीजिये कि रमपतिया फुआ की बड़की देआदिन की छोटी बहू की कलकत्ता वाली भउजाई को फिर बेटा हुआ है!"तब छठवीं क्लास का वह लड़का समझ नहीं पाता था कि इस खबर का अर्थ क्या है, पर आज का यह लेखक समझता है उस खबर की पीर... कसम से, यदि दर्द की संवेदना सच में कहीं उतरता था तो उन चिट्ठियों की उन उलझी हुई पंक्तियों में ही उतरता था। पता नहीं पंजाब-गुजरात वाले पतिदेव कितना समझ पाते थे...(रिपोर्ट-अनूप नारायण सिंह)
आखिर कब खत्म होगा रूडी का अज्ञातवास
Rupesh Kumar 2020-02-10 11:31:38
पटना, 10 फरवरी 2020, (आरएनआई )। पहले टेलीविजन पर एक विज्ञापन आता था कि सरसों के खेत में नहीं प्लेट में अच्छा लगता है उसी प्रकार राजीव प्रताप रूडी जैसे सुलझे हुए सांसद सरसों के खेतों में नहीं देश के लिए नीति बनाते मंत्री के रूप में उपयुक्त लगते हैं. स्वच्छ बेदाग छवि कर्मठता और लंबे संसदीय अनुभव के बावजूद जिस तरह अपने ही दल में उन्हीं को दरकिनार किया जा रहा है उससे उनके समर्थकों में रोष व्याप्त है.
मिलिए एक ऐसे डॉक्टर से जिन्होंने बाल विकलांगता पर किया शोध
Rupesh Kumar 2020-02-06 12:52:10
पटना, 6 फरवरी 2020, (आरएनआई )। आज आपको एक ऐसे चिकित्सक से मिलवाने जा रहे हैं जिन्होंने बाल विकलांगता पर शोध करने के बाद देश के अन्य प्रांत और विदेशों में नौकरी करने की अपेक्षा बिहार को अपने कार्यक्षेत्र ही नहीं बनाया है बल्कि लोगों के दिल में भी जगह बनाई है. पैसा कमाना इस चिकित्सक का ध्येय नहीं, इस चिकित्सक का ध्येय बिहार से बाल विक्लांगता को मिटाना है. चिकित्सक को धरती का भगवान कहा जाता है पर आज के आर्थिक युग में चिकित्सा पेशा भी पूरी तरह से बाजारवाद के चपेट में आ गया है. ऐसे दौर में बिहार के सिवान जिले के दरौंदा के एक किसान परिवार से आने वाले युवा चिकित्सक डॉ सुनीत रंजन ने करोड़ों का पैकेज छोड़ बिहार की राजधानी पटना को अपना कार्यक्षेत्र बनाया. श्री सुरेश सिंह और श्रीमती कृष्णा देवी के घर पुत्र रत्न के रूप में जन्मे डॉ सुनीत रंजन सिवान जिले के दरौंदा थाना अंतर्गत धनौती गांव के रहने वाले हैं.उनकी प्रारंभिक शिक्षा दरौदा तथा बाद की शिक्षा कॉलेज ऑफ कॉमर्स पटना में हुई उसके बाद इन्होंने मैसूर से एमबीबीएस, एम एस अर्थो गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज पटियाला से, फैलोशिप मैक्स सुपर हॉस्पिटल नई दिल्ली से,कंजनाइटल स्पेशलिटी अनु हॉस्पिटल विजयवाडा से किया तत्पश्चात असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर पद्मावती मेडिकल कॉलेज तिरुपति से जुड़े 1 मार्च 1980 को जन्मे डॉ सुनीत रंजन वर्ष 2012 में डॉ.अनुभूति सिंह के साथ परिणय सूत्र में बंध गए.(रिपोर्ट- अनूप नारायण सिंह)
संघर्षों के बल पर प्रशस्त किया है सफलता का मार्ग
Rupesh Kumar 2020-02-06 10:13:27
पटना, 6 फरवरी 2020, (आरएनआई )। संघर्ष जितना कठिन होगा सफलता का स्वाद उतना ही मीठा होगा चिकित्सा समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले चिकित्सक डॉ विजय राज सिंह को सारण हेल्पलाइन सारण गौरव सम्मान से सम्मानित करने का निर्णय लिया है।इस आशय की जानकारी सारण हेल्पलाइन की अध्यक्ष डॉक्टर सुजाता ने दी। उन्होंने बताया कि हॉकी कोच हरेंद्र सिंह लोक गायिका देवी फिल्म स्टार अखिलेंद्र मिश्रा पत्रकार राणा यशवंत समेत सारण प्रमंडल के 21 विभूतियों को 15 मार्च को पटना में भव्य समारोह का आयोजित कर सम्मानित किया जाएगा. कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि बिहार के राज्यपाल को निमंत्रण भेजा गया है.छपरा जिले के एकमा प्रखंड के सरयूपार गांव के एक गरीब किसान परिवार में जन्म लेने वाले डा. विजयराज सिंह आज बिहार के श्रेष्ठ चिकित्सको में शुमार है. भूख गरीबी काफी करीब से देखने वाले डा सिंह ने बड़े पैकेज वाले नौकरी करने अपेक्षा बिहार को ही अपना कार्य क्षेत्र बनाया . दो दशकों में इन्होंने हजारो गरीबों के सपने ही नहीं पूरे किए हमें दी आशा की एक किरण. डॉ विजय पाल सिंह बिहार के ख्याति प्राप्त चिकित्सक होने के साथ ही साथ बहुयामी व्यक्तित्व के स्वामी जी भी है. ये अखिल भारतीय क्षत्रिय महा सभा के बिहार के प्रदेश अध्यक्ष हैं साथ ही साथ ग्लोबल राज प्रोडक्शन हाउस के माध्यम से इन्होंने एक साथ छह भोजपुरी फिल्मों के निर्माण की प्रक्रिया भी प्रारंभ की है जिसमें से एक फिल्म सच्चाई हमार जिंदगी बनकर तैयार है जिसका प्रदर्शन इस वर्ष ही होना है. पटना के गोला रोड में इनका अस्पताल राज ट्रामा सेंटर चौबीसों घंटे गरीब असहाय मरीजों की सेवा के लिए तत्पर रहता है .अस्पताल में एक साथ 60 से ज्यादा चिकित्सक जुड़े हुए हैं .यहां गंभीर रोगों के इलाज के साथ ही साथ सामान्य रोगों का भी सुचारू पूर्ण ढंग से इलाज होता है. शिक्षा के क्षेत्र में गरीब और ग्रामीण परिवेश के छात्रों को आधुनिक शिक्षा देने के लिए डॉक्टर विजय राज सिंह ने बिहार के हाजीपुर में शांतिनिकेतन नाम से सीबीएसई से संबद्ध 12वीं तक मान्यता प्राप्त विद्यालय की स्थापना की है .फिलहाल इस विद्यालय में 5000 छात्र शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं. बिहार के औरंगाबाद में एक भव्य मंदिर का निर्माण भी डॉक्टर विजय राज जी करवा रहे है.जो अपने निर्माण काल से ही चर्चा केंद्र बिंदु में है .इसके निर्माण पर अब तक एक करोड़ से ज्यादा की राशि खर्च हो चुका है . मंदिर के निर्माण में में सहयोग कर सराहनीय कार्य किया है. प्रतिवर्ष दर्जनों गरीब कन्याओं का विवाह करवाना ,सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना भी इनकी आदतों में शुमार है.बातचीत के क्रम मे इन्होने बताया कि उन्होंने गरीबी भूखा अभाव काफी नजदीक से देखा है.उन्होंने खुद के बल पर समाज को आगे बढ़ाने का प्रण कर रखा हैं इसी जज्बे के साथ अपनी ग्लोबल राज ग्रुप ऑफ कंपनी बनाकर चिकित्सा शिक्षा फिल्म निर्माण व विविध क्षेत्र में कार्य करना प्रारंभ किया है. साथ ही साथ में हजारों नौजवानों को रोजगार प्रदान किया है. राजनीति में आने के सवाल पर वे कहते हैं कि अगर आप की नीति सही है तो आप राजनीति में है.सभी दलों में उनके चाहने वाले लोग हैं और सभी दलों के राजनेताओं से वे संबंध रखते हैं .खुद राष्ट्रवादी हैं धार्मिक अनुष्ठानों में भी भाग लेते हैं सामाजिक कार्यों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं क्षत्रिय समाज से आते हैं इस कारण समाज के उत्थान के लिए कार्य करते हैं .एक सवाल के जवाब में उन्होंने बताया की हॉस्पिटल स्कूल फिल्म प्रोडक्शन व अन्य 15 इकाइयों के द्वारा प्रतिदिन जो आय होती है उसका 10 फिसदी हिस्सा वे समाज कल्याण के लिए निकालकर अलग रख देते है समाज के उत्थान के लिए सामाजिक कार्य करने वाले लोगों के लिए उनका दरवाजा चौबीस घंटे खुला रहता है .भोजपुरी भाषा में फिल्म निर्माण के क्षेत्र में धमाके के साथ उतरने के सवाल पर उन्होंने कहा कि भोजपुरी दुनिया की सबसे मीठी भाषा है पर कुछ लोग इस भाषा को बदनाम करने और अश्लीलता का पर्याय बनाने में लगे हुए इसी कारण उन्होंने काफी सोच समझ के भोजपुरी फिल्म निर्माण के क्षेत्र में पदार्पण किया है.सच्चाई हमार जिंदगी पहली फिल्म है इसके बाद लगातार बैक टू बैक पांच फिल्मों का निर्माण होना है. भोजपुरी फिल्म और गीत संगीत में फैली अश्लीलता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सेंसर बोर्ड भी अब विवादों के साए में है सेंसर के नीति और नीयत पर सवाल उठने लगे हैं अगर सेंसर है तो फिर गंदगी कैसे बाहर निकल कर आ रही है. उन्होंने बिहार सरकार से मांग की कि राज्य सरकार अध्यादेश लाकर शराबबंदी की तरह अश्लील और गंदे गानों का प्रचार-प्रसार और प्रसारण बिहार में पूरी तरह प्रतिबंधित करें.(रिपोर्ट-अनूप नारायण सिंह)
क्षत्रिय संगठन को एकीकृत करने के लिए बिहार प्रदेश के अध्यक्ष चला रहे है अभियान
Rupesh Kumar 2020-02-05 12:10:09
पटना, 5 फरवरी 2020, (आरएनआई )। देश पर जब जब संकट के बादल छाए हैं, देश के अस्मिता पर प्रहार हुआ है, क्षत्रियों ने अपना जान हथेली पर रख अपने प्राणों की आहुति दी है.देश की बलिवेदी पर शहीद हुए है यह कहना है अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा बिहार प्रदेश के अध्यक्ष डॉ विजय राज सिंह का .विजय राज सिंह बिहार के क्षत्रीय संगठनों को एकीकृत करने के लिए अभियान चला रहे हैं. उन्होंने बिहार के 38 जिलों का दौरा कर तमाम छोटे-बड़े क्षत्रिय संगठनों को एकजुट करने की दिशा में प्रयास किया है. उनका कहना है.देश के आजादी के बाद देश के लिए अपना सर्वस्व निछावर करने वाले समाज के साथ राजनैतिक रूप से अन्याय किया गया है। जिस जाति ने अपना सब कुछ देश के लिए लुटा दिया उस जाति को दबाने का प्रयास किया जा रहा है विजय राज सिंह ने कहा कि बिहार में 100 से ज्यादा छोटे-बड़े क्षत्रिय संगठन है.उनकी मंशा है, कि सभी संगठनों को एकिकृत कर एक मजबूत संगठन बनाया जाए. जो बिहार प्रदेश में क्षत्रिय समाज की आर्थिक सामाजिक उत्थान की दिशा में कार्य करें .उन्होंने कहा कि बेरोजगारी नशाखोरी दहेज जैसे सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा बिहार पूरे प्रदेश में जन जागरण अभियान चला रहा है.छपरा सीवान गोपालगंज मुजफ्फरपुर मोतिहारी सीतामढ़ी रक्सौल मधुबनी दरभंगा औरंगाबाद सासाराम आरा बक्सर गया नवादा बिहार शरीफ मुंगेर बेगूसराय मधेपुरा जिलों में प्रखंड स्तर तक संगठन को मजबूत किया गया है, एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों में अखिल भारतीय क्षत्रिय महासभा क्षत्रिय बच्चों के लिए रोजी रोजगार की व्यवस्था में भी लगा हुआ है राष्ट्रीय स्तर पर क्षत्रिय समाज को सुदृढ़ करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है.राजनीतिक साजिश के तहत हमारे इतिहास से खिलवाड़ करने वाले लोगों को मुंहतोड़ जवाब दिया गया है .फिल्म निर्माण करने वाले लोगों का या इतिहास को परिभाषित करने की कोशिश करने वाले लोगों के दिलो दिमाग में बैठा दिया गया है कि समाज के खिलाफ कुछ भी अवांछित कार्य हुआ पूरे देश में इसका पुरजोर विरोध होगा।हाल ही में आई एक हिंदी फिल्म को लेकर क्षत्रिय समाज के सवाल पर उन्होंने कहा काल्पनिक कहानियों और वास्तविक कहानियों को एक नहीं किया जा सकता यह पूरी दुनिया जानती है दुनिया के इतिहास में लिखा हुआ है राजपूतों से ज्यादा लड़ाका वीर कोई नहीं होता.(रिपोर्ट-अनूप नारायण सिंह)

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