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क्या हम वाकई अनजाने में अपने अनमोल जीवन को नष्ट कर रहे हैं?

Shyam Singh Chandel 2019-01-23 16:15:07    HELTH 2625
क्या हम वाकई अनजाने में अपने अनमोल जीवन को नष्ट कर रहे हैं?
मथुरा, 23 जनवरी (आरएनआई) यदि आप निरोगी बनना चाहते हैं तो आपको आपकी दिनचर्या को बदलना पड़ेगा। क्योंकि आप जो दिनचर्या में जी रहे हैं उसने ही आपको रोगी बनाया है। हम जाने अनजाने में ही रोगों को अपने शरीर में घर देते हैं।

यदि हम दिन की शुरुआत से ध्यान दें तो पाएंगे कि सर्व प्रथम हमारे लिए "बेड टी" (चाय) आती है। यह चाय आपके जीवन को ध्वस्त करने में मुख्य भूमिका निभाती है। यदि हम ये कहें कि यही एक अकेला ऐसा कारण है जो आपको ही नहीं अपितु आपकी आने वाली पीढ़ी तक को बीमारियां देने में समर्थ है। हम चाय से होने वाले नुकसान पे यदि नजर डालें तो पाएंगे कि हम वाकई अनजाने में अपने अनमोल जीवन को नष्ट कर रहे हैं।

चाय से होने वाले नुक्सान:-

चाय में कुछ मात्रा में कैफीन होती है और साथ ही इसमें एल-थायनिन, थियोफाइलिन भी होता है जो शरीर को उत्तेजित करने का काम करते हैं। चाय का सेवन रक्त आदि की वास्तविक उष्मा को नष्ट करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा चाय में मौजूद चीनी आपको मोटा बनाती है। चाय का अधिक सेवन हृदय के रोग को उत्पन्न करने में सहायक होता है। चाय में उपलब्ध यूरिक एसिड से मूत्राशय या मूत्र नलिकायें निर्बल हो जाती हैं, जिसके परिणाम स्वरूप चाय का सेवन करने वाले व्यक्ति को बार-बार मूत्र आने की समस्या उत्पन्न हो जाती है। ज़्यादा चाय पिने से खुश्की आ जाती है, आंतों के स्नायु भी कठोर बन जाते हैं। चाय के साथ नमकीन, खारे बिस्कुट, पकौड़ी आदि लेने से त्वचा रोग उत्पन्न होते है। खाली पेट चाय पीने से बाइल जूस की प्रक्रिया अनियमित हो जाती है, लीवर ख़राब होने लगता है, पाचन क्रिया को क्षति पहुंचाती है और आप भरपूर भोजन नहीं कर पाते हैं जिसके परिणाम स्वरुप आपके शरीर में कमजोरी आती है, दिमाग सूखने लगता है,

गुदा और वीर्याशय ढीले पड़ जाते हैं। शरीर में न्यूरोलाजिकल गड़बड़ियां पैदा होती हैं, कब्ज घर कर जाती है और मल निष्कासन में कठिनाई आती है। एक कमजोर शरीर में रोग बड़े आसानी से घर बना लेते हैं।

यदि समय रहते हमने अपने आप को नहीं संभाला तो हम असमय मृत्यु को प्राप्त हो सकते हैं जो हमारे पीछे एक दुःखदाई और पीड़ादायक जीवन छोड़ जाता है। सुबह के नाश्ते में अंकुरित भोजन (मूग दाल, चना जिसमे जड़ें निकलने लगें) लें।



दाल व चने को अंकुरित करने के लिए रात को पानी में भिगोकर रख दें। सुबह पानी से निकल कर जालीदार कपडे में बांधकर लटका कर रख दें। दाल व चने अंकुरित हो जायेंगे। इनको आप अपने स्वादानुसार नमक, मिर्च, टमाटर काटकर डालें बिना तले नाश्ते के रूप में लें। यह आपको स्वस्थ व बलवान बनाएगा। हम चाय के विकल्प के रूप में आयुर्वेदिक चाय बना कर ले सकते हैं।

आयुर्वेदिक चाय:-

1. सुबह ताजगी के लिए गर्म पानी लें.चाहे तो उसमे आंवले के टुकड़े मिला दे व थोड़ा एलो वेरा मिला लें।

2. सुबह गर्म पानी में शहद निम्बू डाल के पी सकते है। गर्म पानी में तरह तरह की पत्तियाँ या फूलों की पंखुड़ियां दाल कर पी सकते है। जापान में लोग ऐसी ही चाय पीते है और स्वस्थ व दीर्घायु होते हैं।

3. कभी पानी में मधुमालती की पंखुड़ियां, कभी मोगरे की, कभी जासवंद, कभी पारिजात आदि डाल कर पियें।

4. गर्म पानी में लेमन ग्रास, तेजपत्ता, पारिजात आदि के पत्ते या अर्जुन की छाल या इलायची, दालचीनी इनमे से एक कुछ डाल कर पीये।



अगले समाचार में बाकी के अध्यायों पर नजर डालेंगे तथा अपने ऊपर किये गए प्रयोगों के बारे में विस्तार से लिखूंगा। तब तक के लिए धैर्य रखें।

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मथुरा, 23 सितम्बर (आरएनआई) कपालभाति, प्राणायाम के विभिन्न प्रकारों में अत्यंत महत्वपूर्ण प्राणायाम है । इसमें सबसे महत्वपूर्ण ये है कि श्वास को स्वत: ही आने दे उसमें कर्ता भाव न लाएं क्योंकि श्वास को बाहर फेंकते समय नाभि से श्वास स्वत: ही उठ जाती है।कपालभाति का अर्थ‘कपाल’ का अर्थ है खोपड़ी (सिर) तथा भाति का अर्थ है चमकना। चूंकि इस क्रिया से सिर चमकदार बनता है अतः इसे कपालभाति कहते हैं। कपालभाति एक ऐसी सांस की प्रक्रिया है जो सिर तथा मस्तिष्क की क्रियाओं को नई जान प्रदान करता है। घेरंडसंहिता में इसे भालभाति कहा गया है, भाल और कपाल का अर्थ है ‘खोपड़ी’ अथवा माथा। भाति का अर्थ है प्रकाश अथवा तेज, इसे ‘ज्ञान की प्राप्ति’ भी कहते हैं।
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