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भीषण गंदगी से सरावोर खुटार का बुद्धा पार्क

Anand Mohan Pandey 2019-01-10 16:25:22    EDITORSPICK 923
भीषण गंदगी से सरावोर खुटार का बुद्धा पार्क
शाहजहांपुर, 10 जनवरी (आरएनआई)। राजनीतिक शिकार के कारण खुटार के बुद्धा पार्क में राजकीय इण्टर कालेज का निर्माण नही हो सका है नेता चाहते तो अब तक जनता को लाभ मिलने लगते चुनाव के समय नेता जनता को झूठे वायदे देकर वोट लेता है। चुनाव जीतने के बादफिर पीछे मुडकर नही देखता हैखुटार पुवायां रोड पर स्थित बुद्धा पार्क में भीषण गंदगी का साम्राज्य वना हुआ है इसकी साफ सफाई पर सरकार करोडो रूपये देने के वावजूद समस्या जस की तस बनी हुई हैयह पार्क ग्राम सभा रसवां कलां के अर्न्तगत आता है किन्तु ग्राम प्रधान जानवूझ कर इसकी सफाई नही करा रहै है इस पार्क मे बाबा भीमराव अम्वेडकर की वसपा सरकार के दौरान मूर्ति स्थापित करायी गयी थी कई एकड की भूमि पर बनाया गया पार्क जिसमें अभी तक इसके सौन्दर्यकरण कराने के लिए प्रशासन द्धारा कोई भी प्रयास न किए जाने से यहां पर लम्बी लम्बी धास उगी है सरकार धार्मिक स्थलो व पार्को व तालाबो के रख रखाव के लिए करोडो रूपये खर्च कर रही है ग्राम प्रधान व सचिव ने अभी तक इसमें उगी धास को सफाई कराने के कोई प्रयास तक नही किए जाने से भीषण गंदगी का साम्राज्य है नागरिको ने इस पार्क में राजकीय इन्टर कालेज खोलने के लिए सरकार से कई बार मांग करने के वावजूद अमल नही किया है इतना ही नही क्षेत्र के विधायक व सांसद ने भी इस भूमि का न तो सौन्दर्यकरण कराने का प्रयास ही किया है और ना ही इसमें स्कूल कालेज खोलवाने का प्रयास ही किया है इस भूमि पर स्कूल कालेज खुलने से क्षेत्र की जनता को इसका लाभ मिलता खाली पडी भूमि पर अराजक तत्वो का जमाव वाडा बना रहता है तथा यहां पर मबेशी भी बने रहते है जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण भी बुद्धा पार्क अपनी वदहाली पर आंसू बहा रहा है इस पार्क में अभी तक इसके रख रखाव के लिए व्लाक से लेकर जिले तक के अधिकारियो की उदासीनता के कारण इस पर अमल नही किया गया हैै सरकार चाहे तो इस जगह पर इण्टर कालेज का निर्माण कराकर जनता को लाभ दिला सकता है जब बसपा सरकार में यह भूमि पर बाबा की प्रतिमा स्थापित की जा सकती है तो भाजपा सरकार में यहां पर कालेज खुलवाया जा सकता है किन्तु नगर के भाजपा नेता नही चाहते इस पर कालेज का निर्माण हो ऐसे नगर बिकास मंत्री को जनता क्या करे जब अपने क्षेत्र के पार्को का बिकास अधूरा है

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Editorspick

सुधार के पथ पर अग्रसर बच्चा जेल
Anand Mohan Pandey 2019-01-12 18:08:02
खुटार/शाहजहांपुर, 12 जनवरी (आरएनआई)। स्थानीय बच्चा जेल इधर कुछ दिनों से सुधार के पथ पर अग्रसर है। कभी सैकड़ों की संख्या से भरी रहने वाली इस जेल में अब निरन्तर बच्चों की संख्या में कमी आती जा रही है। इसका कारण यदि जेल के स्टाफ को दिया जाये तो कोई अतिस्योक्ति नहीं होगी क्योकि वर्तमान समय में जेल में मौजूद बच्चों के खान पान व स्वास्थ्य तथा खेल कूद के लिए जो व्यवस्थायें हैं। उन्हे पर्याप्त ही कहा जायेगा। जेल प्रबन्धन ने बताया कि बच्चों के खान पान वस्त्रों व खेल कूद की यहां समुचित व्यवस्था है और बच्चे भी व्यवस्था से पूर्ण रूप से संतुष्ट हैं। लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए शिक्षकों का अभाव होना बच्चों के हित में नहीं है। दो वर्ष के अथक प्रयासों के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा एक शिक्षक उपलब्ध कराया गया है। जो बच्चों को पढ़ा रहे हैं। जबकि यहां शिक्षकों के दो पद श्रृजित हैं। किन्तु दोनों पद पर नियुक्ति न होने से हमें बेसिक शिक्षा विभाग से मजबूरी में एक अध्यापक मांगना पड़ा। बच्चों ने भी जेल की व्यवस्था में संतुष्टि दर्शाते हुये कहा कि हमें यहां कोई परेशानी नहीं है।
भीषण गंदगी से सरावोर खुटार का बुद्धा पार्क
Anand Mohan Pandey 2019-01-10 16:25:22
शाहजहांपुर, 10 जनवरी (आरएनआई)। राजनीतिक शिकार के कारण खुटार के बुद्धा पार्क में राजकीय इण्टर कालेज का निर्माण नही हो सका है नेता चाहते तो अब तक जनता को लाभ मिलने लगते चुनाव के समय नेता जनता को झूठे वायदे देकर वोट लेता है। चुनाव जीतने के बादफिर पीछे मुडकर नही देखता हैखुटार पुवायां रोड पर स्थित बुद्धा पार्क में भीषण गंदगी का साम्राज्य वना हुआ है इसकी साफ सफाई पर सरकार करोडो रूपये देने के वावजूद समस्या जस की तस बनी हुई हैयह पार्क ग्राम सभा रसवां कलां के अर्न्तगत आता है किन्तु ग्राम प्रधान जानवूझ कर इसकी सफाई नही करा रहै है इस पार्क मे बाबा भीमराव अम्वेडकर की वसपा सरकार के दौरान मूर्ति स्थापित करायी गयी थी कई एकड की भूमि पर बनाया गया पार्क जिसमें अभी तक इसके सौन्दर्यकरण कराने के लिए प्रशासन द्धारा कोई भी प्रयास न किए जाने से यहां पर लम्बी लम्बी धास उगी है सरकार धार्मिक स्थलो व पार्को व तालाबो के रख रखाव के लिए करोडो रूपये खर्च कर रही है ग्राम प्रधान व सचिव ने अभी तक इसमें उगी धास को सफाई कराने के कोई प्रयास तक नही किए जाने से भीषण गंदगी का साम्राज्य है नागरिको ने इस पार्क में राजकीय इन्टर कालेज खोलने के लिए सरकार से कई बार मांग करने के वावजूद अमल नही किया है इतना ही नही क्षेत्र के विधायक व सांसद ने भी इस भूमि का न तो सौन्दर्यकरण कराने का प्रयास ही किया है और ना ही इसमें स्कूल कालेज खोलवाने का प्रयास ही किया है इस भूमि पर स्कूल कालेज खुलने से क्षेत्र की जनता को इसका लाभ मिलता खाली पडी भूमि पर अराजक तत्वो का जमाव वाडा बना रहता है तथा यहां पर मबेशी भी बने रहते है जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण भी बुद्धा पार्क अपनी वदहाली पर आंसू बहा रहा है इस पार्क में अभी तक इसके रख रखाव के लिए व्लाक से लेकर जिले तक के अधिकारियो की उदासीनता के कारण इस पर अमल नही किया गया हैै सरकार चाहे तो इस जगह पर इण्टर कालेज का निर्माण कराकर जनता को लाभ दिला सकता है जब बसपा सरकार में यह भूमि पर बाबा की प्रतिमा स्थापित की जा सकती है तो भाजपा सरकार में यहां पर कालेज खुलवाया जा सकता है किन्तु नगर के भाजपा नेता नही चाहते इस पर कालेज का निर्माण हो ऐसे नगर बिकास मंत्री को जनता क्या करे जब अपने क्षेत्र के पार्को का बिकास अधूरा है
विगत चार साल
Root News of India 2018-12-30 19:52:10
विगत चार साल ! राज्य खस्ता हाल !!
वन्य जीवो के प्रति संवेदनशील होना होगा हमें
Anand Mohan Pandey 2018-12-23 13:06:52
शाहजहांपुर, 23 दिसंबर (आरएनआई)। गत दिनों जनपद के खुटार क्षेत्र में बाघ ने एक व्यक्ति को अपना शिकार बना दिया इससे पूर्व भी ऐसी घटनाएं सामने आई थी नुकसान भी हुआ था जो चिंताजनक है प्रश्न है कि वन्यजीवों का आबादी की ओर रुख क्यों हो रहा है ऐसा तो नहीं कि हम उसके आवासीय क्षेत्र में दखल देने लगे हैं जब ऐसी दुखद घटनाएं होती हैं तो प्रशासन पुलिस तथा वन विभाग तथा अन्य विभाग सक्रिय हो जाते हैं इसे एक प्रकार की आपदा मानकर उसका हल और रेस्क्यू चलाया जाता है किंतु थोड़े दिनों के बाद स्थिति फिर ढाक के तीन पात हो जाती है हम अपना आत्म मूल्यांकन करना भूल जाते हैं जिसका परिणाम होता है ऐसी घटनाओं का बार-बार घटित होना तथा जन एवं जीव की हानि
प्रसून वाले 'मास्टर स्ट्रोक' के गायब सिग्नल की तरह अब अंबानी का जियो मरने लगा !
Root News of India 2018-12-19 20:51:32
नई दिल्ली, 19 दिसंबर (आरएनआई)। अभी चर्चाएं शुरू नहीं हुई हैं। बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी। मीडिया को मुट्ठी में लेने वाली सियासी ताकतों की तरह अब अंबानी ग्रुप ने देश की हलचलों को अपनी मुट्ठी में ले लिया है। हुकूमत के बचाव की सियासत में इंटरनेट की दुनिया में वन टू का फोर करने वाली ताकतें फोर टू का वन करने लगी हैं। मेरा ये शक आपके यकीन में बदल सकता है। इसके लिए पूरा माजरा समझये-
सुख सुविधा से दूर कर्तव्य के बोझ से कराहती खाकी 
Laxmi Kant Pathak 2018-11-30 17:56:06
हरदोई, 30 नवंबर (आरएनआई)। आम नागरिक से लेकर अधिकारी राजनेता  तक खाकी के सहारे अपनी सम्पत्ति ,अपना जीवन की सुरक्षा के लिये हर समय दिन रात घर से बाहर गांव नगर मे कराने की अपेक्षा रखते है और कराते भी है। वही दूसरी ओर खाकी पर ही नेता मन्त्री अपना रोब भी गाठते देखे जा सकते है। सरकारी अमले मे यदि देखा जाय तो सबसे ज्यादा पुलिस की जिम्मेदारी ही दिखाई देती है चाहे यातायात सचालन हो या दंगा नियन्त्रण ,अपराध नियन्त्रण ,सभी की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इन्ही पुलिसकर्मियों के कन्धे पर है।रात हो चाहे दिन सडक चौराहों पर पुलिसकर्मियों की गाडियां व सिपाही दिखाई देते है।लेकिन समाज मे इन खाकी धारियों को कभी भी सम्मान की द्रष्टि से नही देखा जा सका है।पुलिस जैसा विभाग जिसके कन्धे पर पूरे राष्ट्र की आन्तरिक सुरक्षा का भार रखकर भी इसी खाकी को जनता के लोगो को कोसते देखा जा सकते है। सबसे मजे की बात तो यह है इन्ही पुलिसकर्मियों व पुलिस अधिकारियों की सिक्योरिटी के बीच राजनेता भी खाकी पर रौब गालिब करना अपना अधिकार मानते है।लेकिन किसी ने यह जानने का प्रयास नही किया कि पुलिस की नौकरी मे आकर इन पुलिसकर्मियों व अधिकारियों को कितने दबाव मे काम करना पड रहा है।अपने कर्तव्य निर्वहन मे कितना दबाव होता है इनको सुख सुविधाएं कितनी मिल रही है।इनको खाना कैसे मिल रहा है।काम के घन्टे कितने है।इनको नीद की जरूरत है कि नही इन बातो पर कभी भी हमारे देश की सरकारों ने बिचार नही किया।केवल खाकी को दोषारोपण कर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने के अलावा कुछ नही है। यदि पुलिस की डयूटी तय कर जरा सा भार कम कर देखा जाय तो शायद ही देश के किसी हिस्से मे अपराध या अपराधी बचा रह जाय।
अयोध्या के अखाड़े में हिन्दुत्व की विरासत पर जंग
Root News of India 2018-11-24 11:43:32
भाजपा बनाम शिव सेना
एक बुलंद शख्सियत की मालिक थी इंदिरा गांधी
Rama Shanker Prasad 2018-11-18 16:02:57
इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में हुुआ था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी एक निडर नेता थीं जिन्होंने कई बार ऐसे साहसी फैसले लिए, पूरे देश को लाभ मिला और उनके कुछ ऐसे भी निर्णय रहे जिनका उन्हें राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ा लेकिन उनके प्रशंसक और विरोधी, सभी यह मानते हैं कि वह कभी फैसले लेने में पीछे नहीं रहती थीं। जनता की नब्ज समझने की उनमें विलक्षण क्षमता थी। स्वर्गीय गांधी आपातकाल की घोषणा, लोकनायक जयप्रकाश नारायण तथा प्रमुख विपक्षी नेताओं को जेल में डालना, ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसे कुछ निर्णयों के कारण उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
योगी के रामराज्य मे भी महिला अस्मिता सुरक्षित नही
Root News of India 2018-11-18 07:24:00
लखनऊ, 18 नवंबर (आरएनआई)। भारत जैसा विशाल राष्ट्र जहाँ यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता जैसी सस्कृति पुष्पित पल्लवित होती रही है।इसी की दम पर भारत विश्व के क्षितिज पर विश्व गुरु बना रहा है।लेकिन हम जैसे ही भाषिक द्रष्टि से बडबोलेपन का शिकार होकर पाश्चात्य सभ्यता की ओर उन्मुख हुये वैसे ही महिला अस्मिता तार तार होने लगी। भारत के उत्थान मे महिलाओं के योगदान को नकारा नही जा सकता। उत्पादन के क्षेत्र मे,युद्ध के क्षेत्र मे ,सामाजिकता के क्षेत्र मे महिलाओं की महती भूमिका रही है। इतिहास गवाह है कि महिलाओं की वजह से ही भारत का गर्वोगत भाल विश्व क्षितिज पर चन्द्रमा की भातिं चमकता रहा है। भारत मे पाश्चात्य सभ्यता अपनाने की होड ने महिलाओं को पीछे की पंक्ति मे ढकेल दिया।और अपने  को  सभ्य और सुंंसस्क्रत मानने लगे।भारत मे आज महिलाओं की बडी ही दीन दशा दिखाई पड रही है। आये दिन छेडछाड, यौन उत्पीड़न के सैकडो केस सामने आ रहे है। सरकार केवल बयान वाजी कर अपने कर्तव्य की इति श्री कर ले रही है।देश मे जब कोई बडी घटना होती है तो बडे बडे तिजारती ऊचे ऊचे मंचो से घडियाली आसूं बहाते दिखाई देते है।कैडिल मार्च का आवाहन कर भोली भाली जनता को गुमराह कर अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेकने से बाज नही आते। ऐसे मे यह प्रश्न ऊठना लाजिमी है कि आखिर इन घटनाओं पर रोक क्यो नही लगती। या तो सरकार ऐसी घटनाओं को रोकना नही चाहती या अपराधियों के दबाव मे रोक नही पा रही है। भारत मे खादीधारी महिलाओं के प्रति कितना सवेदनहीन है इसकी बानगी गत बर्ष पेश करते हुये समाजवादी पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिह यादव ने कहा था कि लडको से गलतियां हो ही जाती है। जिसकी चहुँ ओर निन्दा हुई थी। बर्तमान मे उप्र मे भाजपा सरकार मे योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री है जिन्होंने ने महिलाओं की अस्मिता के रक्षार्थ एन्टी रोमियो स्क्वायड बना डाली लेकिन यह टीम भी महिलाओं को सुरक्षा न दे सकी।प्रदेश के किसी स्कूल ,कालेज,बाजार, रेलवेस्टेशन, बस अड्डा पर देख लीजिए महिलाओं की अस्मिता पर सकट के बादल छाये नजर आयेगे।इसी सरकार मे उन्नाव, मुजफ्फरनगर ,जैसे काण्ड हो गये।देवरिया सुधार ग्रह मे यौन उत्पीड़न का सबसे लेटेस्ट उदाहरण है। सरकार केवल बयान देकर अपना पल्ला झाड लेती है। ऐसे मे देश के प्रसिद्ध कवि रहे मैथलीशरण गुप्त की पक्तियां "अबला तेरे जीवन की है यही कहानी ।आंचल मे है दूध और आंंखो मे पानी"आज भी कितना प्रासंगिक है।
मौलाना अबुल कलाम आजाद : भारतीय राजनीति एवं नव भारत निर्माण का महान व्यक्तित्व
Anand Mohan Pandey 2018-11-10 13:01:26
शाहजहांपुर, 10 नवंबर (आरएनआई)। मानवता और राष्ट्रीयता के आकाश में स्थित् दैदीप्यमान नक्षत्रों में मौलाना अबुल कलाम आजाद का नाम अमर है वह कुशल राजनीतिज्ञ शिक्षाविद पत्रकार एवं राष्ट्रीय समरसता के पक्षधर तथा राष्ट्र को समर्पित नेता थे उनका जन्म 11 नवंबर 1888 को पवित्र नगर मक्का में हुआ था इनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही तथा परंपरागत परिवेश में हुई थी इनके पिता मौलाना खैरूद्दीन अरबी भाषा के विद्वान थे यह प्रारंभ से ही प्रखर बुद्धि के थे तथा भाषा एवं मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने वाले थे आगे चलकर इनका झुकाव वैज्ञानिक शिक्षा की ओर होता गया जहां तक भाषाओं का ताल्लुक है मौलाना साहब अरबी फारसी हिंदी उर्दू अंग्रेजी तथा बंगला आदि भाषाओं के विद्वान थे वर्ष 1890 में मौलाना साहब का परिवार भारत आकर कोलकाता में रहने लगा कुछ समय बाद मौलाना अबुल कलाम आजाद भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सम्मिलित हो गए तथा 1905 में बंगाल विभाजन का विरोध किया उन्होंने मात्र 12 वर्ष की उम्र में प्रथम पत्रिका नेरंग आलम का संपादन किया इसके बाद तो संपादन और पत्रकारिता का सिलसिला आगे बढ़ता ही गया वर्ष 1912 में मौलाना साहब ने उर्दू का साप्ताहिक समाचार पत्र अल हिलाल का प्रकाशन और संपादन किया जिसका मिशन था राष्ट्रीय एकता और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को जागृत करना तथा मार्गदर्शन करना मौलाना साहब महात्मा गांधी के आंदोलन में सक्रिय भागीदार रहे इसके लिए उन्हें अंग्रेजों का कोप भाजन भी बनना पड़ा और जेल की सजा भुगतनी पड़ी जहां तक राजनीतिक दल का प्रश्न है वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े रहे तथा कांग्रेस के दो बार प्रेसिडेंट भी बने अब्दुल कलाम साहब सबसे कम उम्र के कांग्रेस प्रेसिडेंट रहे भारत की स्वतंत्रता के पश्चात उन्हें नेहरू जी के मंत्रिमंडल में भारत का प्रथम शिक्षा मंत्री बनाया गया और वह 10 वर्षों तक शिक्षा मंत्री रहे वे सदैव एकता और राष्ट्र कल्याण को प्राथमिकता देते थे कलाम साहब वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नवीन एवं सर्व शिक्षा व्यवस्था को स्थापित करने का प्रयत्न करते थे और उसे अपना लक्ष्य मानते थे यूजीसी आईआईटी तथा ललित कला एकेडमी की स्थापना उन्हीं के प्रयत्नों का परिणाम है वह शिक्षा सशक्त संपन्न और एकता के सूत्र में बंधा भारत देखना चाहते थे 22 फरवरी 1958 को काल के क्रूर हाथों ने उन्हें हमसे छीन लिया और वे विराट कायनाथ का हिस्सा बनकर आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं
पत्रकारिता का बाजारीकरण होने से समाचार पत्र विज्ञापन पत्र बन गए हैं, पत्रकारिता कब पक्षकारिता में तब्दील
Root News of India 2018-11-09 23:02:20
आज के दौर में सच उस वैश्या जैसा है जिसे पसंद तो सब करते हैं लेकिन कोई वैश्या को अपनी अर्धांगिनी बनाना नही चाहता ठीक उसी तरह सच सबको पसंद होता है लेकिन सुनना कोई नही चाहता? इस दौर में सच परमाणु बम जैसा हथियार बन गया है जिसके प्रहार से घायल होने वाला पगला जाता है और अजीब अजीब हरकतें करने लगता है। जैसे उसे 440 वोल्टेज का करंट लग गया हो? वाकई सच में बहुत पॉवर होती है।
आओ अंतर्मन के दीप जलाए
Anand Mohan Pandey 2018-11-05 18:29:08
शाहजहांपुर, 5 नवंबर (आरएनआई)। दीपोत्सव अंधेरे से उजाले की ओर यात्रा का एक पावन पर्व है जिसे संपूर्ण देश में तथा विदेशों में भी विभिन्न प्रकार से मनाया जाता है यह हमारी ज्योतिर्मयी संस्कृति का प्रतीक है इस पर्व में हम जहां बाहरी अंधेरे को भांति भांति प्रकार से दूर करने का प्रयास करते हैं तमाम भौतिक पदार्थों की रंगाई पुताई और साज-सज्जा करते हैं यही साज सज्जा और दीपमालाओं का प्रकाश हम अपने मन में भी जगमगाए तो बाहर अंधेरा ही नहीं रह जाएगा आज जीवन के तमाम मुद्दों पर जिस अंधेरे का हम सामना कर रहे हैं उसका कारण अपने मन को प्रकाशित नही करना है इस अकल्पनीय विस्तृत ब्रह्मांड और समय के अति सूक्ष्म खंड में हमारा अल्प समय के लिए अस्तित्व है फिर भी हम विसंगतियों और अंधेरे के दास बने हुए हैं एक असंवेदनशील कण की तरह इधर-उधर टकरा रहे हैं यह पवित्र पर्व इसी बात का संकेत देता है कि हमें अपने अंदर के अंधकार को दूर करना है ताकि हमारी दिशाहीनता समाप्त हो सके जिससे पूरे विश्व में फैल रही वैमनस्यता विसंगतियां तथा चल रही आड़ी तिरछी लकीरों को समाप्त किया जा सके साथ ही ऐसा आयाम स्थापित किया जा सके जहां संपूर्ण जीवन और मूल्यों का दर्शन हो सके यही नहीं इस अखिल ब्रह्मांड का रचेता भी बार-बार उस आयाम में आने को उतावला रहे किंतु इसके लिए आवश्यकता है अपने अंतर्मन में चेतना रूपी एक दीप जलाने की जिसके प्रकाश से अंदर और बाहर सभी कुछ जगमगा उठेगा पर धनवर्षा तो क्या सुख समृद्धि आदि सभी से यह विश्व पूर्ण रहेगा
दीपों का त्योहार: दीपावली
Rama Shanker Prasad 2018-11-03 09:27:21
पटना, 3 नवंबर (आरएनआई)। भारत के त्योहार यहाँ की संस्कृति और समाज का आइना हैं । सभी त्योहारों की अपनी परंपरा व अपना महत्व है । भारत को त्योहारों का देश कहें तो अतिशयोक्ति नहीं होगी क्योंकि यहाँ हर माह कोई न कोई त्योहार आते ही रहते हैं।दीपावली हिंदुओं का एक प्रमुख त्योहार है । यह त्योहार कार्तिक मास की अमावस्या के दिन मनाया जाता है । यह शरद ऋतु के आगमन का समय है जब संपूर्ण वातावरण सुहावना एवं सुंगधित वायु से परिपूरित होता है। दीपावली त्योहार के संदर्भ में अनेक मान्यताएँ प्रचलित हैं । अधिकांश लोग अयोध्यापति राजा राम के दुराचारी श्रीलंका के राजा रावण पर विजय के पश्चात् अयोध्या लौटने की खुशी में इस त्योहार को मनाते हैं । उनका मानना है कि कार्तिक मास की अमावस्या की इसी तिथि को अयोध्यावासियों ने पूरी अयोध्या नगरी में भगवान राम के स्वागत के उपलक्ष्य में दीप प्रज्वलित किए थे, तभी से उसी श्रद्‌धा और उल्लास के साथ लोग इस पर्व को मनाते चले आ रहे हैं । वैश्य एवं व्यापारी लोग इस दिन आगामी फसल की खरीद तथा व्यापार की समृद्‌धि हेतु अपने तराजू, बाट, व बही-खाते तैयार करते हैं तथा ऐश्वर्य की प्रतीक देवी ‘लक्ष्मी’ की श्रद्‌धापूर्वक पूजा करते हैं । इसी प्रकार बंगाली एवं दक्षिण प्रदेशीय लोगों की इस त्योहार के संदर्भ में मान्यताएँ भिन्न हैं। यह त्योहार हिंदुओं के लिए विशेष महत्व रखता है । त्योहार के लगभग एक सप्ताह पूर्व ही इसके लिए तैयारियाँ प्रारंभ हो जाती हैं । इसमें सभी लोग अपने घरों, दुकानों की साफ-सफाई व रंग-रोगन आदि करते हैं । इसके अतिरिक्त विभिन्न प्रकार की कलाकृतियों व साज-सज्जा के द्‌वारा घर को सजाते हैं । इस प्रकार वातावरण में हर ओर स्वच्छता एवं नवीनता आ जाती है ।दीपावली मूलत: अनेक त्योहारों का सम्मिश्रण है । दीपावली धनतेरस, चौदस, प्रमुख दीपावली, अन्नकूट तथा भैया-दूज का सम्मिलित रूप है । धनतेरस के दिन लोग भगवान धन्वंतरि की पूजा करते हैं तथा सभी इस दिन नए बरतनों की खरीदारी को शुभ मानते हैं। चौदस के दिन बच्चों को उबटन द्‌वारा विशेष रूप से स्नान कराया जाता है । इसके बाद दीपावली का प्रमुख दिन आता है । अन्नकूट में गोबर को रखकर गोवर्धन पूजा को प्रारंभ करवाया जाता है । भैया दूज के दिन सभी बहनें भाइयों को टीका लगाकर उनकी दीर्घायु की कामना करती हैं। दीपवली का त्योहार खुशियों का त्योहार है । इस दिन सड़कों, दुकानों, गलियारों सभी ओर चहल-पहल व उल्लास का वातावरण दिखाई देता है । सजी-धजी दुकानों पर रंग-बिरंगे वस्त्र पहने हुए लोग बड़े ही मनोहारी लगते हैं । व्यापारीगण विशेष रूप से उत्साहित दिखाई देते हैं । सायंकाल सभी घरों में लक्ष्मी व गणेश की पूजा की जाती है। इसके पश्चात् सभी घर एक-एक कर दीपों से प्रज्वलित हो उठते हैं । इसके बाद सारा वातावरण पटाखों की गूँज से भर जाता है । बच्चे, बूढ़े, जवान सभी प्रसन्नचित्त दिखाई पड़ते हैं । घरों, दुकानों आदि में दीप प्रज्वलित करने के पीछे मनुष्य की अवधारणा यह है कि प्रकाशयुक्त घरों में लक्ष्मी निवास करने आती है । प्राचीन काल में तो लोग इस रात्रि को अपने दरवाजे खुले रखते थे। दीपावली के त्योहार का मनुष्य जीवन में विशेष महत्व है । लोग त्योहार के उपलक्ष्य में अपने घर की पूरी तरह सफाई करते हैं जिससे कीड़े-मकोड़ों व अन्य रोगों की संभावना कम होती है । महीनों की थकान भरी दिनचर्या से अलग लोगों में उत्साह, उल्लास व नवीनता का संचार होता है। परंतु इस त्योहार की दुर्भाग्यपूर्ण विडंबना यह है कि लक्ष्मी के आगमन के बहाने लोग जुए जैसी राक्षसी प्रवृत्ति को अपनाते हैं जिसमें कभी-कभी परिवार के परिवार बर्बाद हो जाते हैं । इसके अतिरिक्त दिखावे के चलते लोग इन त्योहारों पर जरूरत से ज्यादा खर्च करते हैं जो भविष्य में अनेक परेशानियों का कारण बनता है। अधिक धुआँ छोड़ने वाले तथा भयंकर शोर करने वाले पटाखों को छोड़कर खुश होने की घातक परंपरा को भी अब विराम देने की आवश्यकता है । हम सबका यह नैतिक कर्तव्य है कि हम इन कुरीतियों से स्वयं को दूर रखें ताकि इस महान पर्व की गरिमा युग-युगांतर तक बनी रहे ।
हम पत्रकारों को बहुत कुछ सीखना है।
Anand Mohan Pandey 2018-10-08 15:07:35
शाहजहॉपुर, 8 अक्टूबर (आरएनआई)। पत्रकार लोकतत्र का चौथा स्तंभ कहलाता है किन्तु यह चौथा स्तंम्भ बहुत कमजोर और जर्जर हो गया है। आय दिन पत्रकारों को हमले और उन्हें बेवजह थानों में बुलाया जाता है, मैने डाक्टरों और वकीलों में एक बहुत अच्छी चीज देखी है अगर किसी के ऊपर कोई परेशानी आती है तो सभी एक होकर हड़ताल पर चले जाते है, ये क्षेत्रीय सहित देशव्यापी हड़ताल भी हो सकती है और होती है उक्त विचार जनपद के वरिष्ठ पत्रकार एवं उपज के प्रदेश सचिव राकेश श्रीवास्तव ने दिये इस एकता के कारण ही शासन और सरकार मामले का तुरन्त सम्जानक हल निकाल लेते है वही दूसरी ओर पत्रकारों में एकता जैसे व्यवस्था का अच्छा खासा अभाव देखने को मिलता है तथा मीडिया पर अनावश्यक स्टेटमेन्ट एवं खबरें डालकर कम होता है तथा भिन्नता का लोग लाभ उठाते है।
वरिष्ठ जन और समाज
Anand Mohan Pandey 2018-10-02 10:36:29
शाहजहांपुर, 2 अक्टूबर (आरएनआई)। सीनियर सिटीजन या कहिए वरिष्ठ जन को समाज और सरकार की ओर से सम्मान मिलना हमारी संस्कृति का अभिन्न भाग है कदम कदम पर हमें उसकी सहायता और सम्मान के लिए तत्पर रहना चाहिए साथ ही वरिष्ठ से समाज की अपेक्षा रहती है कि वह अपने अनुभवों को नई पीढ़ी में बैठे वह नई पीढ़ी को सही दिशा निर्देश दें ताकि समाज और देश ही नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व में किसी भी प्रकार की विसंगति या विकृति समाज में जन्म ना ले सके यह आरोप कि आज के बच्चे या नई पीढ़ी कुछ सीखना ही नहीं चाहती पूर्णतया गलत है क्योंकि अतीत में जब हम सक्षम थे आज की युवा पीढ़ी तरुण थी तब हमारा ध्यान कहीं और था ऐसा नहीं है कि आज वरिष्ठ नागरिक समाज देश और विश्व को कुछ प्रदान नहीं कर रहे हैं किंतु इस क्रम में अभी संस्कृति का रूप नहीं आया है इसका सबसे बड़ा कारण अतीत का अहम नामक रोग है जो पंचतत्व के इस शरीर में गहरे जा बैठा है जब तक हम सरल होने की आदत नहीं डालेंगे तब तक हम नामक रोग हमें कष्ट पहुंचाता ही रहेगा सरलता का तात्पर्य वाणी व्यवहार और धैर्य की सरलता से है समाज देश और इस विश्व में एकता बंधुत्व और अहिंसा की स्थापना तभी आगे बढ़ सकती है जब वरिष्ठ जन और अतीत के अनुभवों से ओतप्रोत समाज को दिशा दें वरिष्ठ होने का अर्थ यह नहीं है कि हमने अपने सभी कार्यों की इतिश्री कर ली बल्कि जीवन के इस मोड़ पर आकर युवाशक्ति भावना से ओतप्रोत होकर नई पीढ़ी का मार्गदर्शन करना है संस्कृतियों को एकाकार करना है ताकि वैमनस्यता और मानवता का दंश हमें कभी न लग सके यह सनातन है और रहेगी हमारा आवागमन बना रहेगा तो क्यों अच्छी से अच्छी परिस्थितियों में आए इन अच्छी परिस्थितियों की स्थापना और संचालन के लिए अनुभव और वास्तविकता के ज्ञान की आवश्यकता होती है जो वरिष्ठओं के पास होते हैं भले ही वह इन्हें पहचाने और किसी भी रूप में समाज को दें अथवा विमुख रहे
इस अपरिमेय सृष्टि के विज्ञानमय स्वरूप का अनुभव करें
Anand Mohan Pandey 2018-09-26 14:25:45
शाहजहांपुर, 26 सितम्बर (आरएनआई)। हमारा दृश्यमय ब्रह्मांड और अनगिनत अदृश्य ब्रह्मांड जो पूर्व में अस्तित्व में रह चुके हैं या भविष्य में अस्तित्व में आने वाले हैं विज्ञानमय हैं अर्थात समस्त दृश्य और अदृश्य सृष्टि पूर्ण रूप से विज्ञानमय है और विज्ञान के नियमों का पालन करती है जिसे हम प्रकृति कहते हैं वह भी विज्ञान के नियमों का पालन करती है किंतु प्रकृति ने विज्ञान को निरपेक्ष (absolute) नहीं रखा है हां नियमो के विपरीत जाने पर हमें कष्ट का अनुभव होता है यहां तक की भावनाओं का उदय होना उनका अनुभव होना आदि सभी कुछ विज्ञान आधारित हैं वास्तव में मृत्यु पदार्थ और ऊर्जा (आत्मा) के संरक्षण का प्रकृति द्वारा दिया गया उदाहरण है सृष्टि रचना कार ने मनुष्य के हाथों में विज्ञान नामक कामधेनु सौंप दी है इसका सम्मान और सदुपयोग करने से हमें दिया गया जीवन काल स्वर्णकाल के समान व्यतीत होगा इस विश्व के अन्य विषय भी विज्ञान के ज्ञान के प्रभाव के अनुरूप ही विकसित होते हैं दुनिया में जिन्हें हम आश्चर्य के विषय मान रहे हैं वे भी विज्ञान की ही देन है यह दूसरी बात है कि हम उसे स्तर के विज्ञान को समझ नहीं पा रहे हैं और यदि इन आश्चर्य के संरक्षण की बात करें तो वह भी विज्ञान के सहारे ही संभव है मनुष्य ने जब विज्ञान के नियमों के पालन करने में असावधानी बरती है तब तब उसे विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है और पड़ रहा है हमारा ज्ञान क्योंकि विज्ञान के बारे में बहुत थोड़ा है इसलिए हम बहुत कुछ भ्रमित रहते हैं प्रकृति के वरदान और आशीर्वाद भी हमें विज्ञान के रूप में ही मिलते हैं आदिकाल से लेकर वर्तमान तक या भविष्य में जो भी है जो कुछ भी हो रहा है या होगा उसमें विज्ञान की सहमति या असहमति छुपी है हमारे ऋषि यों वैज्ञानिकों विद्वानों ने जीवन के और इस जगत के जो भी रहस्य सरल भाषा में बताए हैं सब विज्ञान आधारित हैं आवश्यकता है चराचर में विज्ञान का अनुभव करने की
भूल-सुधार 
Root News of India 2018-09-24 08:08:39
भूल-सुधार सवाल रोजगार !इज्जत तार-तार !बेवजह अत्याचार !प्रशासन बेकार !
1942 में फिरंगी सिपाहियों ने लसाढ़ी गांव पर ढ़ाया सितम, जिसमे 12 लोग शहीद एवं 25 लोगो को अंग्रेजी शासन ने भेजा था जेल
Rama Shanker Prasad 2018-09-16 10:01:10
आरा, 16 सितंबर (आरएनआई)। अंग्रेजी शासन में अंग्रेजों द्वारा भारत के कई जगहों पर क्रांतिकारियों को आंदोलन करने पर मौत के घाट उतार दी वही पंजाब के जलियांवाला बाग में लोगों को फिरंगियों ने गोलियों से भून दिया था। ऐसी ही एक घटना बिहार के भोजपुर में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान हुई थी।15 सितंबर के दिन 1942 में भोजपुर के अगिआंव प्रखंड के लसाढ़ी में अंग्रेज सिपाहियों ने हिंसा का नंगा नाच किया था। सिपाहियों ने गांव को निशाना बनाकर चारों ओर से स्टेनगनों व एलएमजी जैसे अत्याधुनिक हथियारों से गोलियों की बौछार कर दी थी। घटना में 12 लोग शहीद हो गए थे, जबकि आठ बुरी तरह जख्मी हुए थे। सन् 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन चरम पर था। उस समय भोजपुर जनपद (बिहार) का लसाढ़ी गांव भारत छोड़ो आंदोलन के कई नेताओं की शरण स्थली था। गांव के किसान अंग्रेजों से मुकाबला तो करते ही थे, साथ ही आसपास के गांव ढकनी, चासी आदि के किसानों को भी अंग्रेजों से मुकाबला करने के लिए प्रेरित करते थे।
हिंदी ब्रह्मांडीय चेतना की भाषा का पर्याय है
Anand Mohan Pandey 2018-09-14 16:00:24
शाहजहांपुर, 14 सितंबर (आरएनआई)। महान कवि साहित्यकार श्री सुमित्रानंदन पंत जी ने कहा था हिंदी हमारे राष्ट्र की अभिव्यक्ति का सरलतम स्रोत है साथ ही तमाम महान साहित्यकारों एवं पत्रकारों ने हिंदी को महान ही नहीं बल्कि इसे एक जीवन शैली की उपाधि से विभूषित किया कहना ना होगा कि हिंदी तो कई संस्कृतियों का स्रोत है किंतु आज स्थिति यह है कि हिंदी के रखवालों को हिंदी रास नहीं आ रही बातें तो हिंदी के प्रचार-प्रसार और उत्थान की की जाती हैं किंतु कथनी और करनी में बड़ा अंतर मिलेगा तमाम विभागों में दीवारों पर लिखा मिलता है कि हम हिंदी में भी प्रार्थना पत्र फॉर्म आदि स्वीकार करते हैं उनके द्वारा प्रेषित लिफाफों पर लिखा होता है हम हिंदी में भी पत्राचार आदि स्वीकार करते हैं उनके द्वारा यह उदाहरण बताते हैं कि हमें हिंदी स्वीकार करने में दुविधा है अरे यह क्यों नहीं लिखते कि हम अमुक कार्य हिंदी में ही स्वीकार करते हैं कितना असहज लगता है जब हम भारत भूखंड निवासी हिंदी या अन्य भारतीय भाषा के अतिरिक्त किसी आयातित जवान में अपने सुख-दुख या प्रसन्नता को बांटते हैं भाषाएं तो सभी सम्मानजनक हैं किसी भाषा की आलोचना का अर्थ है कि हम अपनी भाषा से अनभिज्ञ हैं कहने का अर्थ है कि भारत भूखंड की भाषा हिंदी की भारतीय सुगंध अनोखी ही है आज की स्टेटस सिंबल वाली भाषा में ना तो भारतीयता की सुगंध है और ना ही कोई छांव प्रतिवर्ष आने वाला 14 सितंबर यानी हिंदी दिवस यह याद दिलाता है कि हम अपनी ही जुबान में हंसे रोए चिल्लायें ताकि ऐसा महसूस हो कि हम अपनों के बीच में हैं और अपनों से ही कुछ साझा कर रहे हैं यह स्वयं सिद्ध है कि वैज्ञानिक दार्शनिक विद्वान और विचारक सदैव अपनी ही भाषा में सोचते हैं विचार करते हैं मन से बाहर आने पर यह विचार भाषाई पर्यावरण के अधीन हो जाते हैं और विस्तार ले लेते हैं दुख और दया के भाव तो उन भद्र जनों के प्रति उत्पन्न होते हैं जो हिंदी या भारतीय भूखंड की अन्य भाषा को अपनाने या उसे समृद्ध ना करके आयातित भाषा में अपना राग अलापते हैं ऐसी स्थिति में लगता है कि भाषा रूपी निर्धनता यहीं से शुरू होती है हिंदी के विस्तार के लिए हमें अपनी चेतना को समृद्ध करना होगा हिंदी सभी भाषाओं को सम्मान प्रदान करती है यह हम हैं कि हिंदी के विस्तार और उसकी विस्तृत प्रकृति का अनुभव नहीं कर पा रहे। हिंदी तो ब्रह्मांड ही चेतना की भाषा का पर्याय है
भारत में जातिवाद से दरकती लोकतंत्र की दीवारें
Laxmi Kant Pathak 2018-08-29 11:24:31
हरदोई, 29 अगस्त (आरएनआई) I भारत देश और यहाँ की मिट्टी की समरसता की विश्व मे कोई सानी नही रही है। यहां बहु धर्म ,विभिन्न जाति, वर्ग के होते हुये भी देश शान्ति का पैगाम देता चला आ रहा था।लेकिन भारत की खादी ने अपनी अपनी दुकानों को चलाने के लिये अपने अपने हिसाब से समाज को तोडने के हथकंडे अपनाकर अपना व अपने निजी स्वार्थ को साधने का काम किया। देश हित समाज हित पर किसी ने ध्यान नही दिया।कानून सविधान सब अपने अनुकूल बना लिये जिससे वह भी डर समाप्त हो गया। भारतीय सविधान मे समता का अधिकार ,देकर भी अधिकार नही है।सविधान मे एक शब्द लिखा गया धर्मनिरपेक्ष शायद इसका अर्थ सभी धर्मो का सममान करना होगा लेकिन भारत की राजनीति मे कानून कायदा केवल कागजो तक ही सीमित है। आज जब भाजपा सरकार सत्तारूढ़ है तो पूरा विपक्ष भाजपा पर मुस्लिम विरोधी सरकार का तोहमत मढती रहती है लेकिन यही काग्रेंस कुर्सी के लोभ मे इतना गिर गयी की मां भारती के दो भाग कर दिये।लेकिन कुर्सी नही छोडी। आजादी का जश्न मनाने वाला भारत कभी आजाद हुआ ही नही केवल रग बदला गोरै से काले हो गये लेकिन फूट डालो राजकरो की नीति भारतीय राजनीति से जा ही नही पायी। समाज बाटने मे क्षेत्रीय दलो का अहम रोल रहा हैँ।समाज वादी पार्टी के सस्थापक मुलायम सिह ने पिछडी जाति को समाज से तोडकर राजनीति की और वही तत्कालिन प्रधानमंत्री वीपीसिंह ने मजबूती प्रदान कर दी।दूसरी तरफ भाजपा द्वारा पोषित बहुजन समाज पार्टी नै केवल दलित राजनीति कर अपनी राजनीतिक रोटियां सेक तिजोरियों को भरा। समाज को विभिन्न सरकारों ने वोटबैंक को साधने के लिये वर्ग बिशेष की राजनीति कर छिन्न भिन्न कर डाला। जिसने समाज मे एकरूपता लाने के बजाय आज बटवारे की स्थिति खडी कर दी है।पिछडा दलित, सबर्णो मे बटा हिन्दू समाज देश को कैसे आगे ले जा सकता है।इसी समस्या से निपटने के लिए अगडो पिछडो ने भाजपा पर भरोसा व्यक्त कर प्रचण्ड बहुमत से सत्ता मे लाये लेकिन दलित प्रेम के चक्कर मे फसी सरकार ने समाज के 78% लोगो के खिलाफ एससी/एसटी विल लाकर लोगो को निराश कर अपने पैरो मे कुल्हाड़ी मारने से कतई कम नही है।जिस तरह भाजपा के प्रति अगडो पिछडो मे पनपता आक्रोश भाजपा को अर्श से फर्श पर ला सकता है जिसके लिये गुजरात की जुगलबंदी ही जिम्मेदार होगी।जिस देश समाज के लिये अपनी जान निछावर करने वाले शहीदों ने भी शायद यह नही सोचा होगा कि जिस धरती माता के लिये बलिवेदी पर चढ कर जान निछावर कर रहे है उसकी खादी द्वारा इतनी बुरी गति की जायेगी।आजादी से अबतक जितनी सरकारे सत्ता मे आयी विभाजन के अलावा दूसरा काम ही नही किया जबकि शपथ लेते समय देश की एकता अखण्डता भारतीय सविधान के प्रति सच्ची निष्ठा की शपथ लेकर सविधान की आत्मा को मारने के लिये रात दिन एक किये रहते है।जैसा की बर्तमान सरकार ने किया है।इन आचरणो से समाज मे बढती बैमन्स्व की भावना देश को विभाजन की ओर ले जाती दिखायी दे रही है।

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