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संसार अपने स्वार्थ में करता है प्रेम : जगतगुरु

Rupesh Kumar 2020-02-03 20:07:33    MEDITATION 8707
संसार अपने स्वार्थ में करता है प्रेम : जगतगुरु
मुजफ्फरपुर/बंदरा, 3 फरवरी 2020, (आरएनआई )। भगवान तब प्रेम करते है, जब हमारे पास कुछ नही रह जाता है. संसार तो अपने स्वार्थ के लिए प्रेम करता है।केवल भगवान का संबंध ही सास्वत है, संसार में संबंध नही अनुबंध होते है। जब तक हम ईश्वर से संबंध नही बनाएंगे तब तक ईश्वर को प्राप्त नही कर सकते है। अपने जीवन मे कोई भी प्राणी कितना भी पढ़-लिख कर ज्ञान प्राप्त करले, जब तक जीवन मे सीताराम के चरणों की भक्ति नही मिलती तब तक जीवन मे शांति की प्राप्ति नही हो सकती। उक्त बातें जगतगुरु श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज ने मतलुपुर के बाबा खगेश्वरनाथ मंदिर प्रांगण में आयोजित श्रीराम कथा के दौरान कही.

उन्होंने कहा कि भगवान गुण से रहित हो ही नही सकते। जैसे जल से मधुरता को अलग नही कर सकते, वायु से स्पर्श को अलग नही कर सकते, पृथ्वी को गंध से अलग नही कर सकते उसी प्रकार भगवान को छोड़ कर गुण कही जा ही नही सकते। दूसरे दिवस की कथा में जगतगुरु ने अहिल्या उद्धार, तारका संहार की भी कथा प्रसंग को विस्तार से श्रवण कराया.

कथा शुरुआत से पहले मुख्य अतिथि अशोक कुमार सिन्हा (पूर्व मुख्य सचिव, बिहार सरकार) ने जगतगुरु को माल्यार्पण एवं अंगवस्त्र देकर अभिनंदन किया। कथा की शुरुआत छात्रा अंजलि द्वारा मंगलगान कर की गई। मुख्य यजमान के रूप में राहुल कुमार और सीमा कुमारी थे।कथा श्रवण को सैंकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी.

मौके पर शांति और सुरक्षा व्यस्था को लेकर न्यास समिति के पारसनाथ त्रिवेदी, बैद्यनाथ पाठक, रामसकल कुमार, रामकुमार त्रिवेदी, वीरचन्द्र ब्रह्मचारी, मतलुपुर मुखिया पति अशोक कुमार समेत हत्था ओपी की पुलिस बल मौजूद थी.



(रिपोर्ट-अभिषेक कुमार)







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जहां द्रोपदी ने की थी भगवान शिव की आराधना
Rupesh Kumar 2020-03-19 10:09:56
अरेराज, 19 मार्च 2020, (आरएनआई )। बिहार के मोतिहारी शहर से 28 किमीटर दक्षिण-पश्चिम में स्थित अरेराज में भगवान शिव का प्रसिद्व मंदिर है जो सोमेश्वर शिव मंदिर कहलाता है। बिहार में तीन शिव धाम प्रसिद्ध हैं। जिनमें अरेराज का स्थान सबसे उपर है। इसके बाद मुजफ्फरपुर के गरीब नाथ व बक्सर, ब्रह्पुर के शंकर मंदिर आते हैं। माना जाता है कि सोमेश्वरनाथ एक कामनापरक पंचमुखी शिवलिंग हैं। जिसपर सावन महीने में कमल का फूल व गंगा जल चढ़ाने से सारी मनोकामना पूरी होती हैं।इस मंदिर का जिक्र स्कंद, पदम व बाराह पुराण में भी है। त्रेता युग में अपनी पत्नी सीता के साथ विवाह कर जनकपुर से अयोध्या लौटने के क्रम भगवान राम ने यहां पूजा की थी। इसी कारण, हर वर्ष जनकपुर में अगहन पंचमी को आयोजित होने वाले राम विवाह में अयोध्यवाशी भाग लेते हैं। और लौटते वक्त अरेराज मंदिर में जल जरूर चढ़ाते हैं। वर्ष 1983 में प्रसिद्ध साहित्यकार सच्चितानंद वात्स्यायन (अज्ञेय) व शंकर दयाल सिंह की खोजी टीम आई थी। उन्होंने भी इस तथ्य की पुष्टि की। रोटक व्रत कथा के मुताबिक, द्वापर में अज्ञातवास के दौरान राजा युधिष्ठिर ने अपने भाइयों व पत्नी द्रौपदी के साथ यहां पूजा की थी।(रिपोर्ट/अनूप नारायण सिंह)
वास्तु शास्त्र मानव जीवन के लिए अति महत्वपूर्ण
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Rupesh Kumar 2020-02-21 14:39:06
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महाशिवरात्रि पर 117 साल बाद शनि और शुक्र का दुर्लभ योग, विष दोष व सर्प दोष से मिलेगी मुक्ति
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