गोंडा मे जनकल्याणार्थ एवं विश्व कल्याण हेतु विशाल रूद्रचण्डी महायज्ञ एवं श्री देवी भागवत महापुराण कथा का  आयोजन

Laxmi Kant Pathak 2019-01-09 17:21:11    MEDITATION 4681
गोंडा मे जनकल्याणार्थ एवं विश्व कल्याण हेतु विशाल रूद्रचण्डी महायज्ञ एवं श्री देवी भागवत महापुराण कथा का  आयोजन
गोंंड़ा, 9 जनवरी (आरएनआई)। यज्ञ के चतुर्थ दिवस पर मां स्कन्द माता के पूजन का वर्णन कथावाचक कौशलेन्द्र कृष्ण शास्त्री ने बडे ही मनोहारी तरीके से वर्णन किया। कथा  में बताया कि मां स्कन्द माता भगवान कार्तिकेय की माता गौरी ही हैं और कोई नहीं। मां स्कन्द माता की पूजा करने से पुत्र की प्राप्ति होती है। इनकी पूजा में श्वेत पुष्प, श्वेत तिल व अनन्नास गोला से विशेष है। मां स्कन्द माता की पूजन से अखण्ड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। कौशलेन्द्र  जी महाराज ने भक्तों को ज्ञान दिया कि मां की पूजा करने से समस्त सुख प्राप्त होते हैं। मां जगत जननी है। ये सारे संसार की मां हैं और मां कभी अपने बच्चों को दुखी नहीं देख सकती।राघवेन्द्र पाण्डेय  ने बताया कि ये यज्ञ राष्ट्र कल्याण के लिए कराया जा रहा है।

यज्ञाचार्य अतुल शास्त्री लोगो को कहा यज्ञ में एक आहुती आपकी भी आप सभी यज्ञ मे बढ चढ कर हिस्सा ले। आज पूजा में अपने हाथ से रूद्राअभिषेक और हवन 

अवंरनाथ पाण्डेय गंगा प्रसाद मिश्रा पकज तिवारी जितेन्द्र शुक्ला रूपेश मिश्रा प्रमेद पाण्डेय दिनेश मिश्रा आदि न किया।




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कानपुर का गंगा मेला - कहानी रंगों द्वारा विरोध की
Root News of India 2019-03-26 13:07:22
कानपुर, 26 मार्च (आरएनआई) | कानपुर में होली सिर्फ़ एक दिन नहीं मनायी जाती। होलिका दहन से लेकर गंगा मेला, जो हिंदी तिथि के हिसाब से अनुराधा नक्षत्र पड़ने पर मनाया जाता है, तक होली मनायी जाती है। इसके पीछे की कहानी अत्यंत दिलचस्प है।
भक्ति के रंग में डूबी महर्षि दधीचि की नगरी
Mahendra Kumar Agrawal 2019-03-16 17:04:18
सीतापुर, 16 मार्च (आरएनआई) | नैमिषारण्य से शुरु हुयी चौरासी कोसीय परिक्रमा महर्षि दधीचि की नगरी मिश्रित पहुंच चुकी है। जहां पंच कोसीय परिक्र्रमा पांच दिन तक चलेगी। जिसमें शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु वहां शुक्रवार को पहुंच गये। वहीं रामादल में शामिल संत-महंतों के पण्डालों में हो रही विभिन्न कथाओं से वहां का पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है। रात में सन्त महंतों के पण्डालों भक्ति की बहने वाली गंगा में परिक्रमार्थी डुबकी लगा रहे हैं। बताते चलें कि फाल्गुन मास की प्रतिपदा से शुरू हुई विश्व विख्यात चौरासी कोसी परिक्रमा में शामिल होने के लिए उप्र के विभिन्न अांचलो सहित बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, नेपाल सहित विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं। श्रद्धालु ट्रैक्टर ट्राली, कार, जीप, मोटर साइकिल, साइकिल व पैदल परिक्रमा करते है। वहीं परिक्रमा में महन्तों के हाथी व घोडे आर्कषण का केन्द्र बने रहते है। मिश्रित में इन दिनों पूरी रात धर्ममय वातावरण से गुंजायमान रहती है। पण्डालों में भगवान का संकीर्तन तथा वाचकों द्वारा विभिन्न प्रकार की कथाओं से परिक्रमार्थियों का रसास्वादन कराया जा रहा है। वहीं पंचकोशीय परिक्रमा में हजारों की संख्या में परिक्रमार्थी 84 योनियों में आवागमन की मुक्ति की अभिलाषा लिए भक्ति भाव में आस्था और श्रद्धा के साथ पैदल चलते हैं। बच्चे, बूढे, जवान, महिला, पुरूष विशालकाय शरीर वाले लोग तथा अनेक विकलांग वह लोग जिनके लिए दस कदम की दूरी तय करना भी मुश्किल होती है वह लोग भी आस्था, श्रद्धा और आत्मविश्वास के साथ सीताराम सीताराम, राधेश्याम राधेश्याम आदि का जाप करते हुए परिक्रमा करने में तल्लीन देखे जाते हैं। परिक्रमा के अंतिम पड़ाव मिश्रिख में विभिन्न सम्प्रदायो के सन्त महन्तो ने अपने-अपने पन्डाल लगाकर विभिन्न धार्मिक कथाओ से भारी संख्या मे आये क्षेत्रीय धर्मावलम्वियो एवं परिक्रमार्थियो को मंत्र मुग्ध कर दिया। पडाव स्थल की छटा देखते ही बन रही है।
मिश्रित पहुंची चौरासी कोशीय परिक्रमा
Mahendra Kumar Agrawal 2019-03-15 16:53:42
सीतापुर, 15 मार्च (आरएनआई) | नैमिषारण्य से शुरु हुयी चौरासी कोसीय परिक्रमा महर्षि दधीचि की नगरी मिश्रित पहुंच चुकी है। जहां पंच कोसीय परिक्र्रमा पांच दिन तक चलेगी। जिसमें शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु वहां पहुंच गये। वहीं रामादल में शामिल संत महंतों के पण्डालों में हो रही विभिन्न कथाओं से वहां का पूरा माहौल भक्तिमय हो गया है। रात में सन्त महंतों के पण्डालों भक्ति की बहने वाली गंगा में परिक्रमार्थी डुबकी लगा रहे हैं। बताते चलें कि फाल्गुन मास की प्रतिपदा से शुरू हुई विश्व विख्यात चौरासी कोसी परिक्रमा में शामिल होने के लिए उप्र के विभिन्न अांचलो सहित बिहार, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड, नेपाल सहित विदेशों से भी श्रद्धालु पहुंचे हैं। श्रद्धालु ट्रैक्टर ट्राली, कार, जीप, मोटर साइकिल, साइकिल व पैदल परिक्रमा करते है। वहीं परिक्रमा में महन्तों के हाथी व घोडे आर्कषण का केन्द्र बने रहते है। मिश्रित में इन दिनों पूरी रात धर्ममय वातावरण से गुंजायमान रहती है। पण्डालों में भगवान का संकीर्तन तथा वाचकों द्वारा विभिन्न प्रकार की कथाओं से परिक्रमार्थियों का रसास्वादन कराया जा रहा है। वहीं पंचकोशीय परिक्रमा में हजारों की संख्या में परिक्रमार्थी आस्था और श्रद्धा के साथ पैदल चलते हैं।
कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ विष्णु महायज्ञ
Rama Shanker Prasad 2019-03-15 11:25:23
आरा, 15 मार्च (आरएनआई) | भोजपुर जिले के सदर प्रखंड के रामापुर संदिया मोड़ के पास संत देवरहा बाबा के परम शिष्य त्रिकालदर्शी संत देवराहा शिवनाथ दास जी महाराज के सानिध्य में 15 मार्च से 19 मार्च तक होने वाले विष्णु महायज्ञ की कलश शोभा यात्रा रामापुर संदिया मोड़ से काली मंदिर छोटकी संदिया तक निकाला गया। इस वार शोभा यात्रा आरा शहर तक नही गया क्योंकि आचार संहिता लागू हैं उसका पालन किया गया।शोभायात्रा में हाथी घोड़ा गाजे बाजे के साथ रथ पर सवार संत शिव नाथ दास जी महाराज थे।वही 16 मार्च को अग्नि मंथन(अरणी मंथन) एवं सन्ध्या में सुप्रसिद्ध कथा वाचक पंडित रामा शंकर पांडेय एवं अन्य कथा वाचक का प्रवचन होगा।रात्रि में संध्या 7 बजे से 10:30 बजे तक राम लीला/रासलीला वृंदावन की मंडली द्वारा की जाएगी।दिनांक 17-19 मार्च को सुवह 9 बजे से 11 बजे पूर्वाह्न तक गुरु दीक्षा का कार्यक्रम होगा तथा 19 मार्च को अपराह्न 2:30बजे महा भंडारा/महा प्रसाद कराने के बाद यज्ञ की समाप्ति होगी। यह प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी धूम धाम से यज्ञ का कार्यक्रम किया जाएगा।इस आशय की जानकारी यज्ञ कार्यक्रम प्रभारी राजेश्वर पासवान ने दी।
आठवें पड़ाव जरिगवां पहुंची चौरासी कोशीय परिक्रमा
Mahendra Kumar Agrawal 2019-03-14 16:26:21
सीतापुर, 14 मार्च (आरएनआई) | नैमिषारण्य से शुरु हुयी 84 कोसीय परिक्रमा सातवें पड़ाव मडरूवा से अपने आठवें पड़ाव जरिगवां की ओर कूच कर गया। दोपहर बाद धीरे-धीरे श्रद्धालु जरिगवां पहुंचने लगे जहां उन्होनें अपना डेरा डाल दिया। जिसके बाद भजन कीर्तनों का दौर शुरु हो गया। भक्तिमय वातावरण में किसी भी परिक्रमार्थी के चेहरे पर थकान तक नजर नहीं आ रही थी। परिक्रमा का लाखों का हुजूम उसके बीच हो रहे शंखनाद संकीर्तन नैमिष तीर्थ की जय हो, रामादल बाबा की जय हो, महर्षि दधीचि की जय हो इसके अलावा परिक्रमार्थी अपने-अपने संत महंत की जय हो के आकाश गुंजित नारे अनायास ही कुपथगामी मनुष्यों को सतमार्ग की प्रेरणा दे रहे थे। परिक्रमा में मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, चंडीगढ़, झारखंड सहित पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु शामिल होने आए हैं। पैदल परिक्रमार्थियो पर पडाव की दूरी भारी तो पड ही रही थी, जो आस्था और श्रद्धा के आगे बौनी साबित हो रही थी। आस्था, श्रद्धा और आत्म विश्वास के साथ सीता-राम सीता-राम आदि का जाप करते हुए परिक्रमार्थी परिक्रमा करने में तल्लीन थे। पूरी रात धर्ममय वातावरण से गुंजायमान रही आश्रमों में भगवान का संकीर्तन तथा वाचकों द्वारा विभिन्न प्रकार की कथाओं से परिक्रमार्थियों का रसास्वादन कराया जाता रहा। जरिगवां में विश्राम करने के बाद परिक्रमार्थी अगले पडाव के लिए रवाना हो जायेंगे।
24 घंटे का अष्याम आरंभ
Umesh Kumar 2019-03-12 12:27:22
वैशाली, 12 मार्च (आरएनआई) | वैशाली जिले के सदर प्रखंड के शुभई नयाटोला अवसिथत बाबा कारिख के मंदिर परिसर मे 24घंटे का अष्टयाम मंगलवार को आरंभ हुई।
चढने लगा लोगों मे रंगों की खुमारी
Rama Shanker Prasad 2019-03-09 14:35:43
पटना, 9 मार्च (आरएनआई) | रंगों से सबको सराबोर करने वाला होली का त्योहार इस वर्ष 21 मार्च को मनाया जाएगा। 20 मार्च को होलिका दहन होगा। वहीं, शहरवासियों पर होली का खुमार अभी से चढ़ने लगा है। शिवरात्रि खत्म होने के साथ ही लोग होली की तैयारी में जुट गए हैं। होलिकादहन कर बुराई पर अच्छाई की जीत की खुशी मनाई जाएगी। इसके लिए गोबर के उपले, आम की लकड़ी, धूप आदि सामग्री एकत्रित किए जाने लगे हैं। होलिकादहन के दिन घरों में विभिन्न पकवान बनाए जाएंगे। वहीं, होली के दिन मालपुआ व अन्य व्यंजन से लोगों का स्वागत किया जाएगा। 20 को शुभ मुहूर्त में होलिकादहन किया जाएगा। इस दिन चंदन तिलक लगाकर सूत बांधकर ओम होलिकाय नम: के साथ पूजन व होलिका दहन की परिक्रमा करने से विघ्न—बाधा दूर होती हैं और सुख-समृद्धि आती है। होलिका दहन के भस्म को लगाकर होली खेलनी चाहिए। मूलत: होली का त्योहार प्रकृति का पर्व है। इस पर्व को भक्ति और भावना से इसीलिए जोड़ा जाता है ताकि प्रकृति के इस रूप से आदमी जुड़े और उसकी अमूल्य धरोहरों को समझे जिनसे ही आदमी का जीवन है। मनुष्य का जीवन अनेक कष्टों और विपदाओं से भरा हुआ है। वह दिन-रात अपने जीवन की पीड़ा का समाधान ढूंढने में जुटा रहता है। इसी आशा और निराशा के क्षणों में उसका मन व्याकुल बना रहता है। ऐसे ही क्षणों में होली जैसे पर्व उसके जीवन में आशा का संचार करते हैं। होली का नाम आते ही मन रंगों के बिछावन पर लोटने लगता है। रंग-बिरंगे चेहरे, भाभियों और देवरों का मजाक मन में कुलांचे मारने लगता है। मानव मन के उत्कृष्ट उल्लास का नाम होली का त्योहार है। होली हमारे देश का एक विशिष्ट सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक त्योहार है। यह बहुत प्राचीन उत्सव है। इस पर्व को भक्ति और भावना से इसीलिए जोड़ा जाता है ताकि प्रकृति के इस रूप से आदमी जुड़े और उसकी अमूल्य धरोहरों को समझे जिनसे ही आदमी का जीवन है। मनुष्य का जीवन अनेक कष्टों और विपदाओं से भरा हुआ है। वह दिन-रात अपने जीवन की पीड़ा का समाधान ढूंढने में जुटा रहता है। इसी आशा और निराशा के क्षणों में उसका मन व्याकुल बना रहता है। ऐसे ही क्षणों में होली जैसे पर्व उसके जीवन में आशा का संचार करते हैं। कोई अबीर-गुलाल से तो कोई पक्के रंग और पानी से होली खेलता है, लेकिन आज भी कुछ लोग हैं, जो प्रकृति से प्राप्त फूल-पत्तियों व जड़ी-बूटियों से रंग बनाकर होली खेलते हैं। उनके अनुसार इन रंगों में सात्विकता होती है और ये किसी भी तरह से हानिकारक नहीं होते। होली के अवसर पर छेड़खानी, मारपीट, मादक पदार्थों का सेवन, उच्छृंखलता आदि के जरिए शालीनता की हदों को पार कर दिया जाता है। यह अनुचित है। आवश्यकता है कि होली के वास्तविक उद्देश्य को आत्मसात किया जाए और उसी के आधार पर इसे मनाया जाए। होली का पर्व भेदभाव को भूलने का संदेश देता है, साथ ही यह मानवीय संबंधों में समरसता का विकास करता है। 
आरएसएस चाहता है कि जल्द बने राम मंदिर
Root News of India 2019-03-08 19:46:33
ग्वालियर, 8 मार्च (आरएनआई) | सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राम मंदिर के मुद्दे के समाधान के लिए तीनों पक्षों के बीच सहमति बनाने के लिए मध्यस्थता समिति बनाए जाने के बीच शुक्रवार को ग्वालियर में शुरू हुई राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) की अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की तीन विदसीय बैठक में राम मंदिर निर्माण का मार्ग जल्द प्रशस्त किए जाने पर जोर दिया गया।
पहले पड़ाव से दूसरे पड़ाव हरैया पहुंचे परिक्रमार्थी
Mahendra Kumar Agrawal 2019-03-08 17:32:03
सीतापुर, 8 मार्च (आरएनआई) | नैमिषारण्य से शुरु हुयी 84 कोसीय परिक्रमा आज प्रातः पहले पड़ाव कोरौना से अपने दूसरे पड़ाव हरैया की ओर कूच कर गयी। दोपहर बाद धीरे धीरे श्रद्धालु हरैया पहुंचने लगे जहां उन्होनें अपना डेरा डाल दिया। जिसके बाद भजन कीर्तनों का दौर शुरु हो गया। भक्तिमय वातावरण में किसी भी परिक्रमार्थी के चेहरे पर थकान तक नजर नहीं आ रही थी। परिक्रमा का लाखों का हुजूम उसके बीच हो रहे शंखनाद संकीर्तन नैमिष तीर्थ की जय हो, रामादल बाबा की जय हो, महर्षि दधीचि की जय हो इसके अलावा परिक्रमार्थी अपने अपने संत महंत की जय हो के आकाश गुंजित नारे अनायास ही कुपथगामी मनुष्यों को सतमार्ग की प्रेरणा दे रहे थे। परिक्रमा में मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, बिहार, राजस्थान, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, गुजरात, चंडीगढ़, झारखंड सहित पड़ोसी देश नेपाल से भी श्रद्धालु शामिल होने आए हैं। नैमिषारण्य से पूरब की ओर को प्रवाहित होने वाली यह 84 कोसीय परिक्रमा रूपी गंगा की अविरल धारा और पूरब से उगता सूरज इसके अलावा पडोस के खेतो में लहलहाते सरसों के फूल साश्वत प्रकृति प्रेम में लीन करने को उत्सुक थे। जिसमें हर परिक्रमार्थी आस्था और श्रद्धा की डुबकी लगाते हुए इतना स्पूर्थिवान एव प्रफुल्ल दिखा रहा था जैसे मानो जगत की अनमोल वस्तु प्राप्त हो गयी हो। यह वास्तव में सत्य है कि जब मानव को धार्मिक गंगा के प्रवाह से आनंद की अनुभूति होती है वह सुनहरा पल अभिव्यक्त होता है जैसे आनंद किसी के अन्तःकरण में किसी प्रकार अनुभूति को व्यक्त नही किया जा सकता। पैदल परिक्रमार्थियो पर पडाव की दूरी भारी तो पड ही रही थी, जो आस्था और श्रद्धा के आगे बौनी साबित हो रही थी। आस्था, श्रद्धा और आत्म विश्वास के साथ सीताराम सीताराम आदि का जाप करते हुए परिक्रमार्थी परिक्रमा करने में तल्लीन थे। पूरी रात धर्ममय वातावरण से गुंजायमान रही आश्रमों में भगवान का संकीर्तन तथा वाचकों द्वारा विभिन्न प्रकार की कथाओं से परिक्रमार्थियों का रसास्वागन कराया जाता रहा। आश्रमों के साथ साथ जगह जगह श्रद्धालुओं द्वारा विशाल भंडारों का आयोजन किया गया था। जहां जलपान से लेकर भोजन इत्यादि की व्यवस्था की गयी थी।
सत् श्री सांई शिव शक्ति मन्दिर का त्रियोदशम् वार्षिकोत्सव
Mahendra Kumar Agrawal 2019-03-08 16:24:58
सीतापुर, 8 मार्च (आरएनआई) | सत् श्री सांई शिव शक्ति मन्दिर द्वारा त्रियोदशम् वार्षिकोत्सव के अवसर पर स्थानीय नई बस्ती मोहल्ला होली नगर में विविध धार्मिक अनुष्ठान आयोजित हुए। जिसकी अगुवाई पूर्व गृह राज्यमंत्री भारत सरकार राम लाल राही ने किया। शुक्रवार को आयोजित वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में सत् श्री सांई शिव शक्ति मन्दिर में प्रातःकाल पूजन अर्चन प्रारम्भ किया गया। तत्पश्चात मंदिर कलश यात्रा श्यामनाथ मंदिर के लिए रवाना हुई। जिसमें उपस्थित सभी श्रद्धालुओं ने जयकारे लगाते हुए शामिल हुए। कलश यात्रा के पुनः मंदिर वापसी कर श्रद्धालुओं ने आयोजित भण्डारे में प्रसाद ग्रहण किया। वहीं कार्यक्रम की श्रृंखला में यज्ञशाला में अग्नि प्रवेश एवं हवन पूजन उपस्थित शास्त्रियों द्वारा सम्पन्न कराया गया। त्रियोदशम् वार्षिकोत्सव कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए अगुवाई कर रहे पूर्व केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री राम लाल रही ने कहा कि ‘‘सबका मालिक एक’’ बाबा का यह संदेश हर मानव हदय में मानवता के प्रति सर्व-धर्म सम्भाव की अलख जगाता है। वास्तव में यदि श्रद्धा और सबूरी से सत् श्री सांई नाथ के इस संदेश को जीवन में उतारा जाए, तो अपकर्म से मुक्ति की राह मिलती है। श्री राही ने कहा कि मन और मस्तिष्क में ‘वासुधैव कुटुम्बकम्’’ का भाव जागृह होता है। अंत में उन्होंने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया। इस अवसर पर पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष सुन्दरी राही, पूर्व जिला पंचायत सदस्य मंजरी राही, रेनू राही, राम दयाल अवस्थी, पत्रकार ज्ञान प्रकाश सिंह ‘प्रतीक’, पूर्व सभासद पं0 गंगाधर शुक्ला, संजीव मिश्रा ‘पूनम’, विनीत श्रीवास्तव, प्रधान पुजारी पं0 बृजेश शास्त्री, सह पुजारी पं0 मनोज शास्त्री, सुरेश कुमार वर्मा, उर्मिला, सावित्री, सोनी दीक्षित, कल्पना शुक्ला, प्रिया गुप्ता, माया रस्तोगी, अंशू गुप्ता, रागिनी मिश्रा, ब्यूटी तिवारी, शिवानी मिश्रा, विनीता अग्रवाल, रेखा गोयल, प्रिन्शी रस्तोगी, मोनिका, रितु सहित सैकड़ो की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
मुजफ्फरपुर : पंच दिवसीय पंचमुखी महावीर मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का हुआ आयोजन
Rupesh Kumar 2019-03-08 10:08:10
मुज़फ्फरपुर, 8 मार्च (आरएनआई) | बिहार यूथ बिल्डर एसोसिएशन के अध्यक्ष व पटना ग्रीन हाउसिंग के सीएमडी श्री भूषण कुमार सिंह बबलू के पैतृक गांव रघवा छपरा थाना सरैया जिला मुजफ्फरपुर में 8 से 12 फरवरी तक पंच दिवसीय पंचमुखी महावीर मंदिर प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ का आयोजन किया गया. जिसमें 8 मार्च को हजारों की तादाद में श्रद्धालु भक्त कलश यात्रा में भाग लेंगे साथ ही साथ देशभर के संत महात्माओं को इस महायज्ञ में भाग लेने के लिए बुलाया गया है.
डंका बजते ही शुरू हो गयी चौरासी कोशीय परिक्रमा
Mahendra Kumar Agrawal 2019-03-07 14:32:19
सीतापुर, 7 मार्च (आरएनआई) | भू लोक का सर्वश्रेष्ठ तीर्थ स्वायंभु मनु सतरूपा सहित अठ्ठासी हजार ऋषि मुनियों की तपस्थली, निराकार परब्रह्म परमेश्वर का साकार रुप मे प्राकट्य स्थली महर्षि दधीचि की अस्थिदान, ब्रह्म, विष्णु, महेश की नित विचरण स्थली एवं 33 करोड़ देवताओ की निवास स्थली, अष्टम बैकुण्ठ, अष्टम आरण्य, वेद पुराणों की रचना एवं सूत जी की पुराण परायण स्थली, मां ललिता की सिद्धि पीठ, नाभिगया के रूप में विश्व विख्यात एवं 33 करोड़ देवताओ की निवास स्थली नैमिषारण्य तीर्थ से प्रारम्भ हुयी। विश्व विख्यात 84 कोसीय परिक्रमा आज सुबह गोमती, चक्र आदि तीर्थो मे स्नान कर चक्र तीर्थ के निकट स्थापित गणेश जी के मन्दिर मे लडडू चढाकर प्राचीन मन्दिर पंचमुखी महादेव, बदरीनाथ, राधाकृष्ण, भूतेश्वर, हनुमान, ओमकारनाथ आदि के दर्शन करते हुए ललिता देवी, पंच प्रयाग, जानकी कुण्ड, कर्कराज, कटह रामकुण्ड होते हुए अपने पहले पडाव कोरौना पहुंची। इस दौरान परिक्रमा में शामिल लाखों श्रद्धालु शंखनाद संकीर्तन नैमिष तीर्थ की जय हो, रामादल बाबा की जय हो, महर्षि दधीचि की जय हो इसके अलावा परिक्रमार्थी अपने-अपने संत महंत की जय हो के आकाश गूंजित नारे अनायास ही कुपथगामी मनुष्यों को सतमार्ग की प्रेरणा दे रहे थे। विश्व विख्यात 84 कोसीय परिक्रमा में उप्र के विभिन्न अांचलो सहित विदेशी श्रद्धालु शामिल हुए है। जो कि हाथी, घोडे, पालकी, लग्जरी गाडियों के साथ-साथ बैलगाडी, तांगा, ठेलिया, ट्रैक्टर, पैदल व दंडवत कर परिक्रमा के आनंद से मंत्रमुग्ध थे। इसके साथ-साथ हजारों की संख्या में परिक्रमार्थी साइकिल, पैदल 84 योनियों में आवागमन की मुक्ति की अभिलाषा लिए भक्ति भाव में आस्था और श्रद्धा के साथ पैदल चल रहे थे। बच्चे, बूढे, जवान, महिला, पुरूष विशालकाय शरीर वाले लोग तथा अनेक विकलांग वह लोग जिनके लिए दस कदम की दूरी तय करना भी मुश्किल होगी वह लोग भी आस्था, श्रद्धा और आत्म विश्वास के साथ सीताराम सीताराम, राधेश्याम राधेश्याम आदि का जाप करते हुए परिक्रमा करने में तल्लीन थे। आज परिक्रमा का पहला पडाव कोरौना पहुंचा। जहॉ विभिन्न सम्प्रदायो के सन्त महन्तो ने अपने अपने पंडाल लगाकर विभिन्न धार्मिक कथाओ से भारी संख्या मे आये क्षेत्रीय धर्मावलम्वियो एवं परिक्रमार्थियो को मंत्रमुग्ध कर दिया। पडाव स्थल की छटा देखते ही बन रही थी। ज्ञात हो कि कोरौना को कोरावन भी कहते है और इसे द्वारिका क्षेत्र भी कहा जाता है। यहां पर द्वारिकाधीश भगवान का एक विशाल मंन्दिर स्थापित है। इस द्वारिका क्षेत्र का महात्म्य है कि भगवान द्वारिकाधीश का यहां सायुज्य प्राप्त होता है। यहां प्रतिपदा को परिक्रमा रात्रि को विश्राम करके द्वितीय को प्रातः काल हरैया को गमन करती है।
शाह बिलाली दरगाह पर सालाना उर्स 31 मार्च से
Neeraj Chakrapani 2019-03-06 17:23:14
सासनी, 6 मार्च (आरएनआई) | सासनी-नानऊ रोड स्थित हजरत ख्वाजा सूफी हाफिज अलाउद्दनी हसन शाह बिलाली की दरगाह पर सालाना उर्स का आगाज 31 मार्च दिन बरोज इतवार से की जाएगी।
महाशिवरात्रि पर शिव अर्चना से आत्मबोध प्राप्त कर सकते हैं: संत श्रीपाल
Ram Prakash Rathore 2019-03-05 14:08:40
शाहाबाद, 5 मार्च (आरएनआई) | शिव सत्संग मंडल के आद्य परमाध्यक्ष संत श्रीपाल ने कहा कि पर्वों का महापर्व महाशिवरात्रि है।महाशिवरात्रि पर की गई शिव अर्चना से आत्मबोध प्राप्त कर सकते हैं।
दलसिंहसराय क्षेत्र के शिवालयों में शिव भक्तों की उमड़ी भीड़
Kunal Kumar Gupta 2019-03-05 11:25:20
दलसिंहसराय, 5 मार्च (आरएनआई) | शहरी क्षेत्रों में शिवरात्रि को लेकर भक्तों की आस्था देखते ही बन रही थी ।शहर के लोकनाथपुर गंज स्थिति खुट्टी गोदाम,गंज रोड, 33 नम्बर रेलवे गुमटी, स्टेशन रोड, जजपट्टी, गोला रोड, मंसूरचक रोड स्थित शिवालयों में शिव भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी ।
बाबा खुदनेश्वर धाम में उमड़ा आस्था का जनसैलाब
Kunal Kumar Gupta 2019-03-05 10:16:04
समस्तीपुर, 5 मार्च (आरएनआई) | हिंदू मुस्लिम सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बाबा खुदनेश्वर धाम में सोमवार को पूरे आस्था के साथ शिवरात्रि मनाया गया ।इस दौरान भक्तो का जनसैलाब उमड़ पड़ा है।बिहार के समस्तीपुर जिला में स्थित बाबा खुदनेश्वर धाम मन्दिर में एक ही छत के नीचे दोनो धर्म के लोग पूजा करते है ।
महाशिवरात्रि पर भक्तों ने लगाई नदी में डुबकी
Ramesh Shanker Pandey 2019-03-04 19:56:17
बाराबंकी/लखनऊ, 4 मार्च (आरएनआई) | महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर आज जहा शिवालयों में लोग पहुचकर जलाभिषेक कर भूतभावन शिव को प्रसन्न कर मनवांछित फल की कामना कर रहे है वही कल्याणी नदी के पावन निर्मल धारा में नहाकर बुड़वा बाबा में जलाभिषेक के लिए सुबह चार बजे से ही ताता लगा हुआ है । *नमामीशमीशान निर्वाणरूपं*
महाशिवरात्रि पर मंदिरों में उमड़ा भक्तों का सैलाब, हर हर बम बम के जयघोष से गूंज उठे शिवालय
Ramesh Shanker Pandey 2019-03-04 19:52:29
बाराबंकी/लखनऊ, 4 मार्च (आरएनआई) | महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ देखी गई। भोर पहर से नागेश्वर नाथ स्थित प्राचीन शिव मंदिर में भक्तों की लम्बी कतार लग चुकी थी।हाथों में जल का लोटा व बेलपत्र लिए श्रद्धालुओं को बड़े धैर्य के साथ अपनी बारी आने का इंतजार करते देखा गया।मंदिर में पहुंचे भक्तों ने पूजा अर्चना कर परिवार की सुख समृद्धि के लिए दुआ मांगी। सभी दिशाओं में देवाधिदेव महादेव के बम बम भोले,हर हर महादेव एवं ऊँ नमः शिवाय के गगनभेदी जयकारों से सारा वातावरण गुंजायमान हो रहा था।भगवान शिव के प्रादुर्भाव वाले शिवधाम हो चाहे गाँव गली मुहल्ले के शिव मंदिर हर जगह गौरीशंकर पार्वतीशंकर के जयकारे तथा गुणगान होते देखे गए।देश के कोने कोने से शिवभक्त काँवड़िये भगवान सदाशिव का अभिषेक करने के लिए गंगाजल लेकर शिवधाम पहुंचे। महाशिवरात्रि का पावन यहापर्व है।भगवान भोलेनाथ हमेशा अपने भक्तों पर अपनी दया दृष्टि बरसाते रहते हैं और कभी अपने भक्तों को कष्ट नहीं देते हैं यही कारण है कि भगवान भोलेनाथ को महावरदानी कहा जाता है। भगवान शिव के बारे में कहा जाता है कि उनका स्वभाव क्षणे रुष्टा क्षणे तुष्टा वाला है और जरा सी आराधना से यह खुश होकर क्षण भर में बड़े से बड़े द्रोही भक्त को भी माफ कर देते हैं।रावण इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है जो उनकी अर्द्धांगिनी जगत जननी का हरण करने कैलाश पर्वत पर पहुंच गया था और भगवान भोलेनाथ ने कैलाश पर्वत को अपने पैर के अगूंठे से दबाकर उसे मरणासन्न बना दिया था लेकिन उसकी क्षणिक आराधना से खुश होकर उसे चन्द्रहास वरदान में दे दिया था। महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक एवं फूल बेलपत्र आदि चढ़ाने का विशेष महत्व माना गया है।महाशिवरात्रि पर अगर महापापी भूल से भी उनकी शिवलिंग पर बेलपत्र आदि चढ़ा देता है वह उसके सारे पापो को भुलाकर उसका कल्याण कर देते हैं। महाशिवरात्रि का पर्व मनाने के पीछे अलग अलग कथाएं प्रचलित है।कहा जाता है कि माता सती द्वारा भगवान राम पर संदेह व्यक्त करते हुए माता सीता का स्वरूप धारण करने के बाद अपने पिता दक्ष के यहां यज्ञ में अपने शरीर को भस्म कर के हिमांचल के घर पार्वती के रूप में अवतरित हुई थी और पुनः भगवान शिव की अर्धांगिनी आज के ही दिन बनी थी।महाशिवरात्रि के दिन भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक सुबह शाम दोपहर ही नहीं बल्कि रात के चारो पहर में किया जाता है। महाशिवरात्रि के पर्व पर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती अपने भक्तों पर विशेष कृपा दृष्टि करती हैं और जो भी उन्हें दिल से याद करता है वह उनकी दैविक देहिक भौतिक सारी समस्याओं एवं दुखों का निवारण करके उसके सारे संताप समाप्त कर देते हैं।जो व्यक्ति कभी भगवान भोलेनाथ की भक्ति नहीं करता है लेकिन शिवरात्रि के दिन उनके शिवलिंग की पूजा-अर्चना कर देता है वह उसका कल्याण कर उसे अपनी भक्ति प्रदान कर देते हैं।जगह जगह पर श्रद्धालुओं द्वारा स्टाल लगाकर शिव भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया।
सांतेश्वर मंदिर पर गूंजे हर हर महादेव के जयकारे
Ramesh Shanker Pandey 2019-03-04 19:42:06
फिरोजाबाद/लखनऊ, 4 मार्च (आरएनआई) | महाशिवरात्रि के अवसर पर फिरोजाबाद में अति प्राचीन सांतेश्वर मंदिर पर भक्तों का सैलाब उमड़ा, आपको बता दें फिरोजाबाद के साथी गांव में एक महादेव का अति प्राचीन मंदिर स्थित है जोकि सांतेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है लोगों में इस मंदिर को लेकर बहुत सारी मान्यताएं हैं, लोगों का मानना है कि जो भी महादेव के मंदिर में अपनी मनोकामना लेकर जाता है उसकी सारी इच्छाएं पूरी होती हैं, शास्त्रों के अनुसार भी महाशिवरात्रि के अवसर पर महादेव की पूजा करना बहुत ही पुण्यदायक बताया गया है संयोग से इस बार महाशिवरात्रि सोमवार के दिन होने के कारण भक्तों में विशेष उमंग तथा श्रद्धा देखने को मिली। सुबह से ही भक्तों का महादेव के दर्शन करने के लिए तांता लगा रहा सुबह से ही मंदिर के बाहर कावड़ियों की लाइन भी लगना शुरू हो गई, हजारों की संख्या में कांवरिया अपनी कावड़ लेकर आए तथा गंगाजल महादेव पर चढ़ाने के लिए लाइन में लग कर अपनी बारी का इंतजार करते रहे, पुलिस प्रशासन भी पूरी मुस्तैदी के साथ श्रद्धालुओं को दर्शन कराने तथा उन्हें व्यवस्थित करने में जुटा रहा, श्रद्धालु मंदिर में जाते और हर हर महादेव और बम बम भोले के जयकारे लगाते
ଆଖଣ୍ଡଳମଣି ପୀଠରେ ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁଙ୍କ ଭିଡ଼
Laxmikanta Nath 2019-03-04 14:37:04
ଭଦ୍ରକ : ମହାଶିବରାତ୍ରୀ ପାଇଁ ଓଡିଶା ତଥା ଭଦ୍ରକ ଜିଲାର ପ୍ରସିଦ୍ଧ ଶୈବପୀଠ ଆରଡି ଚଳଚଞ୍ଚଳ ହୋଇପଡିଛି । ବାବା ଆଖଣ୍ଡଳମଣିଙ୍କୁ ଦର୍ଶନ କରିବା ଲାଗି ରାଜ୍ୟ ତଥା ରାଜ୍ୟ ବାହାରୁ ଲକ୍ଷାଧିକ ଭକ୍ତଙ୍କର ସମାଗମ ହୋଇଛି । ଭୋର ୪ଟାରେ ମନ୍ଦିର ପହଡ ଖୋଲାଯାଇ ବାବାଙ୍କ ପାଖରେ ମଙ୍ଗଳ ଆଳତି କରାଯାଇଥିଲା । ଏହାକୁ ଦର୍ଶନ କରିବା ପାଇଁ ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁମାନେ ଲମ୍ବା ଲାଇନରେ ଲଗାଇଥିବା ଦେଖିବାକୁ ମିଳିଛି । ବାବାଙ୍କୁ ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁମାନେ ସକାଳରୁ ରାତି ୧୧ଟା ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଦିଗମ୍ବର ବେଶରେ ଦର୍ଶନ କରିବେ । ଏହି ସମୟ ମଧ୍ୟରେ ବାବାଙ୍କୁ ଘର୍ଷଣ ଲାଗି କରାଯିବ । ଭିଡକୁ ଦୃଷ୍ଟିରେ ରଖି ପୀଠରେ ବ୍ୟାପକ ପୋଲିସ ମୃତୟନ କରାଯାଇଛି । ଜିଲା ପ୍ରଶାସନ, ମନ୍ଦିର ପ୍ରଶାସନ ସଜାଗ ରହିଥିବା ବେଳେ ନଦୀଘାଟରେ ଓଡ୍ରାଫ ଟିମ ଓ ଅଗ୍ନିଶମ ବାହିନୀର କର୍ମଚାରୀଙ୍କୁ ମୁତୟନ କରାଯାଇଛି । ରାତି ଗୋଟାଏରେ ପ୍ରଭୁଙ୍କର ସୁନାବେଶ ହୋଇ ଭୋର ୫ଟାରେ ମହାଦୀପ ଉଠିବ ବୋଲି ସେବାୟତଙ୍କ ପକ୍ଷରୁ ସୂଚନା ମିଳିଛି।

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