तुलसी के लाजवाब फायदे व रोगों के अचूक घरेलू नुस्खे

Shyam Singh Chandel 2019-02-19 20:28:43    HELTH 6475
तुलसी के लाजवाब फायदे व रोगों के अचूक घरेलू नुस्खे
मथुरा, 19 फरवरी (आरएनआई) तुलसी सभी का परिचित एक पवित्र पौधा है । इसका लेटिन नाम ‘ओसिमन सैन्कटम’ है। तुलसी की प्रकृति गर्म है। इसलिए गर्मियों में इसका कम मात्रा में सेवन करें । बड़ों के लिए 25 से 100 पत्ते और बालकों के लिए 5 से 25 पत्ते एक बार पीस कर शहद या गुड़ में मिलाकर नित्य 2-3 बार माह तक लें ।



तुलसी के औषधीय गुण :

प्रातः काल भूखे पेट-प्रथम मात्रा लें । इस विधि से तुलसी का सेवन करने से गठिया, आर्थराइटिस, ओस्टियों अर्थाराइटिस, स्नायुशूल, गुर्दो की खराबी से सूजन, पथरी, सफेद दाग (ल्यूकोडमी) रक्त में चर्बी (ब्लड कोलेस्ट्रोल) बढ़ना, मोटापा, कब्ज, गैस, अम्लता (एसिडिटी) पेचिश,कोलायटिस, प्रास्टेट के रोग, मानसिक रूप से मन्द-बुद्धि बच्चे, सर्दी-जुकाम, विवर-प्रदाह, घाव भरना, टूटी हुई हड्डियाँ जल्दी जुड़ना, घाव शीघ्र भरना, बार-बार बुखार आना, कैन्सर, बिबाइयाँ, दमा, श्वास रोग, एलर्जी, आँखे-दुखना, विटामिन ‘ए’ और ‘बी’ की कमी दूर होना, खसरा, सिर दर्द और आधे सिर का दर्द दूर हो जाते है। जहाँ तुलसी के पत्ते उपलब्ध न हों, वहाँ होम्योपैथी की बनी तुलसी की मदर टिन्क्चर ओसिमम सेंकटम काम में लें । वायुमण्डल को शुद्ध रखने के लिए प्रत्येक घर में तुलसी का पौधा लगाना चाहिए



तुलसी के फायदे / रोगों का उपचार

1- मस्तिष्क की गर्मी–तुलसी के 5 पत्ते और कालीमिर्च पीस लें । इसे 1 गिलास, जल में मिलाकर प्रातः समय 21 दिनों तक पीएँ।



2- शक्तिप्रद-शौच आदि से निवृत्त होकर प्रातः समय तुलसी के 5 पत्ते पानी के साथ निगल जाने से बल, तेज और स्मरणशक्ति बढ़ती है । तुलसी के पत्तों का रस 8 बूंद पानी में मिलाकर प्रतिदिन पीने से माँसपेशियाँ और हड्डियाँ मजबूत होती हैं। तुलसी के बीज दूध में उबालकर शक्कर मिलाकर पीना भी शक्तिप्रद प्रयोग है।



3- मिरगी-तुलसी के हरे पत्तों को पीसकर मिरगी वाले रोगी के सम्पूर्ण शरीर पर मालिश करना लाभप्रद है।



4- बेहोशी-तुलसी के पत्तों को पीसकर नमक मिलाकर उस रस को नाक में डालने से बेहोशी में लाभ होता है।



5- मलेरिया ज्वर-तुलसी के पत्तों का नित्य सेवन करने से मलेरिया नहीं होता । यदि मलेरिया हो जाए तो ज्वर उतरने पर प्रातः समय 15 तुलसी के पत्ते और 10 कालीमिर्च खाने से मलेरिया बुखार पुनः नहीं चढ़ता।



6- तुलसी के सेवन से समस्त प्रकार के ज्वरों में लाभ होता है -20 तुलसी के पत्ते, 10 कालीमिर्च और 1 चम्मच शक्कर का काढ़ा बनाकर सेवन करने से भी मलेरिया बुखार में लाभ होता है।



7- खाँसी, जुकाम, गलशोथ और फेफड़ों में कफ जमा होना-इन कष्टों में तुलसी के सूखे पत्ते, कपूर, कत्था और इलायची प्रत्येक समान मात्रा में और शक्कर 9 गुनी लेकर सबको बारीक पीस लें । इसे चुटकी भर की मात्रा में सुबह-शाम दिन में 2 बार सेवन करने से फेफड़ों में जमा हुआ कफ निकल जाता है।



8- नाक में दुर्गन्ध-तुलसी के पत्तों का रस या सूखे हुए तुलसी के पत्तों को सूंघने से नाक की दुर्गन्ध दूर होकर अपीनस रोग दूर हो जाता है और नाक के अपीनस के कृमि मर जाते हैं।



9- ज्वर-तुलसी के 10 पत्ते, सौंठ 3 ग्राम, लौंग 5 और कालीमिर्च 21 तथा चीनी स्वादानुसार लेकर उबालें । जब पानी आधा शेष रह जाए तो रोगी को पिला दें । इस प्रयोग से ज्वर उतर जाएगा ।



10- ज्वर में घबराहट-यदि ज्वर में घबराहट हो तो तुलसी के पत्तों के रस में शर्बत मिलाकर शर्बत बनाकर पिलाएँ।



11- जीर्ण ज्वर और खाँसी-यदि जीर्ण ज्वर हो गया हो और साथ ही ऐसी खाँसी हो जिससे छाती में दर्द हो तो तुलसी के पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर पीना लाभप्रद है।



12- गले में खराश-यदि यह कष्ट खट्टी चीजें खाने से हो तो 25 तुलसी के पत्ते और अदरक पीसकर शहद में मिलाकर चाटें । इस प्रयोग से खराश दूर हो जाएगी।



13- जुकाम व ज्वर-15 तुलसी के पत्ते और 4 कालीमिर्च सदैव खाते रहने से ज्वर व जुकाम नहीं होता।



14- तुलसी की चाय-लोग चाय को आदत के रूप में नित्य पीते हैं जो बहुत-ही हानिकारक है। चाय के स्थान पर तुलसी की चाय काम में लेने से अनेकों रोग दूर होकर स्वास्थ्य अच्छा हो जाता है।

विधि:- छाया में सूखी हुई तुलसी की पत्ती 50 ग्राम, बनफ्शा, सौंफ, ब्राह्मी बँटी, लाल चन्दन प्रत्येक 30 ग्राम, इलायची, दाल-चीनी प्रत्येक 10-10 ग्राम मिलाकर कूट लें और इसे चाय के समान पानी में डालकर चाय बनाएँ तथा दूध और शक्कर मिलाकर पीएँ। इस चाय के सेवन से सामान्य ज्वर, जुकाम और छीकें आना ठीक हो जाएगा।



खाँसी और तुलसी (अनेक प्रयोग)-

(1) 5 लौंग भूनकर तुलसी के पत्तों के साथ चबाने से समस्त प्रकार की खाँसी में लाभ होता है।

(2) केवल तुलसी के पत्तों के काढ़े को पीने से भी खाँसी ठीक होती है।

(3) तुलसी की सूखी पत्तियाँ और मिश्री 4 ग्राम की 1 मात्रा लेने से खाँसी और फेफड़ों की घबराहट दूर हो जाती है।

(4) तुलसी के पत्ते और कालीमिर्च सममात्रा में लेकर पीस लें । इसकी मूंग के आकार की गालियाँ बना लें । 1-1 गोली दिन में 4 बार सेवन करने से खाँसी तथा कुकर खाँसी (हूपिंग कफ) भी ठीक हो जाती है ।

(5) तुलसी, अदरक और प्याज का रस शहद के साथ सेवन करने से भी खाँसी में लाभ होता है और बलगम बाहर आ जाती है।

(6) तुलसी की 12 ग्राम हरी पत्तियों का काढ़ा बनाकर उसमें चीनी और गाय का दूध मिलाकर पीने से खाँसी और छाती का दर्द दूर हो जाता है।

(7) तुलसी का सूखा चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से भी खाँसी में लाभ होता है ।

(8) तुलसी और अदरक समान मात्रा में पीसकर 1 चम्मच रस निकालें । इसमें 1 चम्मच शहद मिलाकर चाटें । इस प्रयोग से खाँसी और गले के रोग ठीक हो जाते हैं ।

(9) तुलसी का रस 3 ग्राम, मिश्री 6 ग्राम और कालीमिर्च 3 नग मिलाकर सेवन करने से छाती की जकड़न, पुराना बुखार और खाँसी में लाभ होता है।



10-निमोनिया-20 तुलसी के हरे पत्ते और 5 नग कालीमिर्च पीसकर पानी में मिलाकर पिलाने से निमोनिया में लाभ होता है।



11-पाचक प्रयोग-भोजनोपरान्त तुलसी के ताजे पत्तों को पीसकर पानी में मिलाकर पीने से अजीर्ण दूर होता है । नित्य तुलसी के 5 पत्ते सेवन करने से भोजन शीघ्र पच जाता है।



12-आधे सिर का दर्द-चौथाई चम्मच तुलसी के पत्तों का चूर्ण शहद के साथ सुबह-शाम दिन में 2 बार चाटें। लाभप्रद है।



13-सिर दर्द-तुलसी के पत्ते छाया में सुखाकर रख लें । इन्हें पीस लें । इसे सिर दर्द | के रोगी को सँघने से पीड़ा शान्त होती है तथा पागलपन की उत्तेजना भी ठीक होती है।

तुलसी के पत्तों का रस और नीबू का रस समान मात्रा में पीने से भी सिर दर्द दूर हो जाता है।



14-जुकाम-तुलसी के पत्ते 10 नग, कालीमिर्च 5 नग पानी में मिलाकर चाय की भाँति उबालें । फिर इसमें थोड़ा-सा गुड़ और देशी घी या सेंधा नमक डालकर पीएँ ।इससे जुकाम में लाभ होता है।

• केवल तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने से भी जुकाम ठीक हो जाता है या तुलसी के पत्ते, कालीमिर्च और सोंठ भी चाय की तरह उबालकर शक्कर और दूध मिलाकर सेवन करने से भी जुकाम में आराम होता है।

• तुलसी की पत्तियों को सुखाकर-पीसकर सूंघने से बहता हुआ जुकाम रुकता है।

• बच्चों की सर्दी, खाँसी, कफ की घबराहट में तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर पिलाने से लाभ होता है। | बच्चों के दस्त-तुलसी और पान का रस समान मात्रा में गर्म करके पिलाने से बच्चों के दस्त साफ आते हैं, पेट फूलना और अफारा ठीक हो जाता है।



15- दाँत निकलना-तुलसी के पत्तों का रस शहद में मिलाकर मसूढ़ों पर लगाने से और थोड़ा-सा चटाने से बच्चों के दाँत बिना कष्ट के सरलतापूर्वक निकल आते हैं । तुलसी के पत्तों का चूर्ण अनार के शर्बत के साथ देने से भी दाँत सरलतापूर्वक निकल आते हैं। दाद, सिर दर्द और ज्वर-इन कष्टों में तुलसी की पत्ती को पीसकर गोली बना लें। इसे दुःखते हुए दाँत के नीचे दबाए रखने से दाँत का दर्द शान्त हो जाता है।इसी गोली को खाने से हैजा ठीक होता है। तुलसी के पत्ते दाँतों से चबाकर खाने से दाँत मजबूत होते हैं और मुँह की बदबू दूर होती है।



16-पेचिश-तुलसी की पत्तियों को शक्कर के साथ खाने से पेचिश दूर होती है।



17-पेट दर्द- तुलसी और अदरक के रस को सम मात्रा में लेकर गरम करके पीने से पेट के दर्द में लाभ होता है।



18- मरोड़-10 ग्राम तुलसी का रस पीने से पेट की मरोड़ ठीक हो जाती है, तुलसी के पत्तों का काढ़ा पीने से दस्तों में लाभ होता है। 10 ग्राम तुलसी के पत्तों का रस नित्य पीने से पेट की मरोड़ ठीक हो जाती है। यह प्रयोग अजीर्ण में भी हितकारी है।



19-उल्टी-तुलसी की पत्तियों का रस पीने से उल्टी बन्द हो जाती हैं। पेट के कीड़े मर जाते हैं। शहद और तुलसी का रस मिलाकर चाटने से जी-मिचलाना और उल्टी आना भी बन्द हो जाती हैं



20-संग्रहणी-तुलसी के पत्तों का चूर्ण और शक्कर (प्रत्येक 3 ग्राम) मिलाकर सेवन करना लाभकारी है।



21-अजीर्ण-मन्दाग्नि-तुलसी के पत्ते 20, कालीमिर्च 5 भोजनोपरान्त चबाने से मन्दाग्नि ठीक हो जाती है । तुलसी के काढ़े में सेंधानमक और सौंठ मिलाकर पीने से अजीर्ण ठीक होता है।



22-हिचकी-तुलसी का रस 12 ग्राम, शहद 6 ग्राम दोनों को मिलाकर पीने से हिचकी बन्द हो जाती हैं।



23-यकृत-1 गिलास पानी में 10 ग्राम तुलसी के पत्ते उबालकर चौथाई पानी रहने पर छानकर पीने से यकृत वृद्धि एवं यकृत के अन्य रोग ठीक हो जाते हैं ।



24-नकसीर-तुलसी के रस की 4-5 बूंदें नाक में टपकाने से नाक से खून गिरना बन्द हो जाता है।



25-पीनस, नाक में दर्द, घाव व फुन्सी-इन कष्टों में तुलसी के सूखे पत्तों को पीसकर पूँघने से लाभ होता है।



26-सुनने में गड़बड़, कान का दर्द-तुलसी के पत्तों का रस गर्म करके 4-5 बूंदें कान में डालने से कान का दर्द ठीक हो जाता है। कान बहता हो तो इस प्रयोग को कुछ दिनों तक लगातार करने से लाभ होता है।



27-बच्चों का श्वास रोग- तुलसी के पत्तों का रस 5 बूंदें आधा चम्मच शहद में मिलाकर पिलाएँ।



28-चक्कर, सिर चकराना-इन कष्टों में तुलसी के 20 पत्तों को पीसकर 1 चम्मच शहद में मिलाकर चाटें ।



29-लू लगना, सिर चकराना-तुलसी के पत्तों का रस 5 बूंद, चीनी 1 चम्मच में पानी आधा कप मिलाकर सेवन करने से लू के मौसम में चलने वाली गर्म हवा नहीं लगती तथा चक्कर नहीं आते।



30-प्रदर-तुलसी के पत्तों का रस और शहद सममात्रा में मिलाकर सुबह-शाम चाटें या तुलसी के रस में जीरा मिलाकर गोदुग्ध के साथ सेवन करें। लाभ होगा।



31-स्त्रियों का अनावश्यक रक्तस्राव-तुलसी की जड़ का चूर्ण चौथाई चम्मच 1 पान में रखकर खिलाने से लाभ होता है।



32-प्रसव में आसानी–प्रसव-पीड़ा के समय तुलसी के पत्तों का रस पिलाने से | पीड़ा नहीं होती।



33-बन्द मासिकधर्म–मासिकधर्म रुकने पर तुलसी के बीज सेवन करने से लाभ होता है।



34-रक्तप्रदर-तुलसी के पत्तों के रस में मिश्री मिलाकर सेवन करने से रक्तप्रदर ठीक हो जाता है।



35-गर्भनिरोध-मासिकधर्म बन्द होने के 3 दिन तक प्रतिदिन 1 कप तुलसी के पत्तों का काढ़ा सेवन करने से गर्भ नहीं ठहरता तथा इस प्रयोग से कोई हानिकारक प्रभाव भी नहीं होता।



36- बाँझपन-यदि किसी स्त्री को मासिकधर्म नियमित रूप से सही मात्रा में होता हो, परन्तु गर्भ नहीं ठहरता हो तो मासिकधर्म के दिनों में तुलसी के बीज चबाने से या पानी में पीसकर लेने अथवा काढ़ा बनाकर सेवन करने से गर्भधारण हो जाता है। यदि गर्भ स्थापित न हो तो इस प्रयोग को 1 वर्ष तक करें । इस प्रयोग से गर्भाशय निरोग, सबल बनकर गर्भधारण करने के योग्य बनता है।



37-मूत्र में जलन-20 नग तुलसी की पत्तियाँ चबाने से लाभ होता है।



38-मुख के छाले-मुख के छाले तुलसी और चमेली की पत्तियाँ चबाने से ठीक हो जाते हैं।



39-चर्मरोग-दाद, खाज पर तुलसी के पत्तों का रस और नीबू का रस समान मात्रा में मिलाकर लगाने से ठीक हो जाता है । इस प्रयोग से चेहरे झाइयाँ, कील, मुँहासे व अन्य त्वचा रोग ठीक हो जाते हैं।



40-घाव-तुलसी की पत्तियों को छाया में सुखाकर, बारीक पीसकर कपड़े से छानकर घाव पर छिड़कने से घाव भरता है। इसके पत्तों को पीसकर भी लगा सकते हैं।



41-घाव में कीड़े-तुलसी के पत्तों को उबालकर उस पानी से घावों का धोवें । तुलसी के पत्तों का चूर्ण घावों पर छिड़कें और तुलसी के पत्तों के रस में पतला कपड़ा (गाज) भिगोकर पट्टी बाँधे ।



42-जलना, खुजली और फुन्सीनाशक मरहम-तुलसी के पत्तों का रस 250 ग्राम, नारियल का तेल 250 ग्राम लें और इन दोनों को मिलाकर धीमी आग पर गरम करें । जल का भाग जल जाने पर गरम तेल में ही 15 ग्राम मोम डालकर हिलाएँ। बस मरहम तैयार है। यह मरहम उत्तम एवं लाभकारी है।



43-सफेद दाग (ल्यूकोडर्मा ), खुजली की फुन्सियाँ व घाव-आदि पर तुलसी का तेल दिन में नित्य 3 बार लगाने से लाभ होता है । जड़ सहित सम्पूर्ण तुलसी का पौधा लें । इसे धोकर मिट्टी आदि साफ कर लें। फिर इसे कूट कर आधा किलो पानी और आधा किलो तिल का तेल मिलाकर धीमी-धीमी आँच पर पकाएँ। पानी जल जाने और तेल शेष रहने पर मलकर-छानकर सुरक्षित रख लें । यही तुलसी का तेल है। इसे ही लगाएँ। लाभप्रद है।



44-बच्चों के रोग-पेट फूलना, दस्त, सर्दी, जुकाम, खाँसी और उल्टी आदि कष्ट होने पर तुलसी के पत्तों के रस में चीनी मिलाकर शर्बत बना लें । इसे एक छोटी चम्मच भर पिलाएँ। बच्चों के यह रोग इस प्रयोग से ठीक हो जाते हैं। नियमित प्रयोग से बच्चा स्वस्थ रहता है।



45-बच्चों को स्वस्थ बनाए रखने हेतु-तुलसी और अदरक का रस गर्म करके ठण्डा होने पर शहद मिलाकर पिलाएँ।



46-दमा-तुलसी के रस में बलगम को पतला करके निकालने का गुण है। इसीलिए यह खाँसी, जुकाम में उपयोगी है । तुलसी का रस, शहद, अदरक व प्याज का रस मिलाकर सेवन करने से दमा, खाँसी में लाभ होता है। ( और पढ़े – )



47-हृदय रोग व टान्सिलाइटिस व गले के रोग-तुलसी की माला गले में पहनने से ये रोग नहीं होते।



48-निरोगताप्रद-

(1) जो व्यक्ति तुलसी के 6 पत्ते नित्य खा लेता है वह अनेकों रोगों से सुरक्षित रहता है और सामान्य रोग इस प्रयोग से स्वतः ही दूर हो जाते हैं ।

(2) तुलसी की पिसी हुई पत्तियाँ 1 चम्मच शहद मिलाकर सेवन करना भी गुणकारी है। इससे शरीर निरोग रहता है और गालों पर चमक पैदा होती है।



49-गृधसी शूल-तुलसी के पत्तों को पानी में उबालकर उसकी भाप वातनाड़ी पर देने से गृधसी (साइटिका पेन) में लाभ होता है।



50-मोटापा-तुलसी के पत्तों का रस 10 बूंद और शहद 2 चम्मच 1 गिलास पानी में मिलाकर कुछ दिनों तक सेवन करते रहने से मोटापा कम हो जाता है।



51-हृदय शक्तिवर्धक-सर्दी के मौसम में तुलसी के 10 पत्ते और 4 काली मिर्च 4 बादामों को लेकर ठण्डाई की तरह आधा कप पानी में नित्य घोलकर सेवन करने से विभिन्न प्रकार के हृदयरोग ठीक हो जाते हैं।



52-बिजली गिरना-तार की बिजली अथवा वर्षा में आकाश से गिरने वाली बिजली से यदि कोई व्यक्ति बेहोश हो गया हो तो सिर तथा चेहरे पर तुलसी का रस डालने से रोगी को होश आ जाता है।



53- पानी शुद्ध करना-पानी में तुलसी के पत्ते डालने से पानी शुद्ध हो जाता है।



54-आग से जल जाना—तुलसी के रस को नारियल के तेल में मिलाकर लगाने से जलन दूर होती है, छाले नहीं पड़ते, घाव ठीक हो जाते हैं।



55-स्मरणशक्ति-वर्द्धक-तुलसी पत्ते 10, कालीमिर्च 5 और 5 बादामों को लेकर थोड़ा-सा शुद्ध दूध मिलाकर ठण्डाई की भाँति पीने से स्मरणशक्ति बढ़ती है।



56-कील, मुँहासे, झाइयाँ व काले दाग-इन कष्टों में तुलसी का चूर्ण मक्खन में मिलाकर चेहरे पर मलें । | फोड़ानाशक-तुलसी के पत्ते पानी में उबालकर उस पानी से ही फोड़े को धोवें और तुलसी के ही ताजा पत्ते पीसकर फोड़ों पर लगाएँ ।



57-नारू या बाला-इस रोग में चमड़ी में से लम्बे धागे की तरह कीड़ा निकलता है। इसे ही बाला या नारू कहते हैं । जहाँ बाला निकलने वाला होता है वहाँ सूजन आ जाती है। इस सूजन वाले स्थान पर तुलसी की जड़ घिसकर लेप करने से बाला 2-3 बाहर आ जाता है। इसे बाँध देना चाहिए । इस प्रकार लेप करने से पूरा बाला बाहर निकल आता है।



58-बाल झड़ना या सफेद होना-यदि कम आयु में बाल गिरते हों या सफेद हो गएँ हों तो तुलसी के पत्ते और आँवले का चूर्ण पानी में मिलाकर सिर पर मलें । 10 मिनट बाद सिर धोलें। इससे बालों की जड़ें मजबूत होंगी।






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Shyam Singh Chandel 2019-01-22 16:47:59
मथुरा, 22 जनवरी (आरएनआई) चीनी और जापानी अपने भोजन के बाद गर्म चाय पीते हैं, ठंडा पानी नहीं। चलिए अब हम भी इनकी यही आदत निकाल लेते हैं। जो लोग भोजन के बाद ठंडा पानी पीना पसंद करते हैं, यह लेख उनके लिए है। खाने के साथ ठंडा ठंडा पेय या पानी पीना बहुत हानिकारक होता है क्योंकि ठंडा पानी ठोस खाद्य पदार्थों को आपके खाने के घी या तेल में बदल देता है जिसे आपने अभी खाया है। इससे पाचन बहुत धीमा हो जाता है। जब यह शरीर के अंदर कार्य करता है, तो यह टूट जाता है और जल्द ही यह ठोस भोजन आंतों द्वारा तेजी से अवशोषित कर लिया जाता है। यह आंतों में जमा हो जाता है। जल्द ही यह वसा में बदल जाता है और कैंसर का कारण बनता है। इसलिए भोजन के बाद गर्म पानी या गर्म पानी पीने का सबसे अच्छा तरीका है। सोने से ठीक पहले एक गिलास गर्म पानी पीना चाहिए। इससे आपको खून की कमी नहीं होगी और आप दिल के दौरे से बच जाएंगे।
थायराइड की समस्या से निजात पाने के उपाय
Shyam Singh Chandel 2019-01-06 10:59:01
मथुरा, 6 जनवरी (आरएनआई) थायराइड एक एसा रोग है जिसमें लक्षण शुरूआत में दिखाई नहीं देते हैं। यह थायरॉयड ग्रंथि का आम विकार है। थायराइड हार्मोंन शरीर के पाचन तन्त्र तथा शरीर के लगभग हर अंग प्रणाली के विनियमित को प्रभावित करता है। इस रोग मे शरीर के अंग तेज या धीमी गति से काम करते हैं। इसमें शरीर की ऑक्‍सीजन की खपत और हीट के उत्‍पादन को विनियमित करता है।
सेहतमन्द कैसे बने रह सकते हैं?
Shyam Singh Chandel 2019-01-06 09:58:10
मथुरा, 6 जनवरी (आरएनआई) सेहतमन्द कैसे बने रह सकते हैं?
जानिये मिजिल्स रूबेला टीकाकरण आखिर क्या है..? क्या है इसके लक्षण, क्या हैं इसके उपाय आइये बताते हैं आपको...
Rama Shanker Prasad 2018-12-25 08:55:33
आरा, 25 दिसंबर (आरएनआई)। रूबेला एक संक्रमण से होने वाली बीमारी है जो जीनस रुबिवायरस के वायरस द्वारा होता है। रुबेला संक्रामक है लेकिन प्राय: हल्का वायरल संक्रमण होता है। हालांकि रुबेला को कभी-कभी “जर्मन खसरा” भी कहते हैं, रुबेला वायरस का खसरा वायरस से कोई संबंधित नहीं है।
डेंगू के प्रकोप से बचाव के उपाय
Shyam Singh Chandel 2018-09-24 22:18:16
मथुरा, 24 सितम्बर (आरएनआई) डेंगू के प्रकोप से बचाव के उपाय1. डेंगू के लिए घरेलू नुस्खेडेंगू का प्राकोप आजकल बहुत तेजी से फैल रहा है। यह बीमारी एडीज मच्छर द्वारा काटने से होती है। डेंगू के बारे में सबसे खास बात यह है कि इसके मच्छर दिन के समय काटते हैं तथा यह मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। डेंगू के दौरान रोगी के जोड़ों और सिर में तेज दर्द होता है और बड़ों के मुकाबले यह बच्चों में ज्यादा तेजी फैलती है। डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स का स्तर बहुत तेजी से नीचे गिरने के कारण यदि इसका इलाज तुरंत न किया जाए तो यह जानलेवा भी हो सकता है। डेंगू से बचाव के लिए कुछ घरेलू उपाय भी हैं जिन्हें अपनाकर डेंगू से बचाव संभव है। हम आपको कुछ ऐसे ही घरेलू और प्राकृतिक नुस्खे बता रहे हैं ताकि आप खुद को डेंगू के प्रकोप से बचा सकें।
कपालभाति प्राणायाम के विभिन्न प्रकारों में अत्यंत महत्वपूर्ण प्राणायाम है
Shyam Singh Chandel 2018-09-23 23:45:19
मथुरा, 23 सितम्बर (आरएनआई) कपालभाति, प्राणायाम के विभिन्न प्रकारों में अत्यंत महत्वपूर्ण प्राणायाम है । इसमें सबसे महत्वपूर्ण ये है कि श्वास को स्वत: ही आने दे उसमें कर्ता भाव न लाएं क्योंकि श्वास को बाहर फेंकते समय नाभि से श्वास स्वत: ही उठ जाती है।कपालभाति का अर्थ‘कपाल’ का अर्थ है खोपड़ी (सिर) तथा भाति का अर्थ है चमकना। चूंकि इस क्रिया से सिर चमकदार बनता है अतः इसे कपालभाति कहते हैं। कपालभाति एक ऐसी सांस की प्रक्रिया है जो सिर तथा मस्तिष्क की क्रियाओं को नई जान प्रदान करता है। घेरंडसंहिता में इसे भालभाति कहा गया है, भाल और कपाल का अर्थ है ‘खोपड़ी’ अथवा माथा। भाति का अर्थ है प्रकाश अथवा तेज, इसे ‘ज्ञान की प्राप्ति’ भी कहते हैं।
उक्त रक्तचाप का उपचार व उपाय
Shyam Singh Chandel 2018-09-23 23:24:34
मथुरा, 23 सितम्बर (आरएनआई) रक्तचाप जिसे हाईपरटेंशन भी कहते हैं एक बहुत ही गंभीर और भयंकर रोग है क्योंकि अगर रोगी को सही समय पर सही चिकित्सीय मदद नहीं मिलती तो इससे हार्ट अटैक, ब्रेन हैंमरेज, वगैरह भी होने की संभावना रहती है।उच्च-रक्तचाप वह रोग है जिसमें हृदय के संकुचन की अवस्था में रक्त वाहिकाओं में रक्त का दबाव पारे के 140 mm से ज्यादा या हृदय के विस्तारण की अवस्था में 90 mm से ज्यादा रहता है या दोनों अवस्थाओं में ज्यादा रहता है। इसकी वजह है शारीरिक गतिविधियों की कमी। मोटापा, तनाव, खाने पीने में लापरवाही, गंभीर बीमारियाँ, अनुवांशिक बीमारियाँ, धूम्रपान, नशा वगैरह वगैरह।उच्च रक्तचाप के मुख्य कारणों में से एक है आपके रक्त का गाढ़ा होना। रक्त गाढ़ा होने से उसका प्रवाह धीमा हो जाता है। जिससे नसों और धमनियों पर दबाव पड़ता है। लहसुन में बहुत हीं ताकतवर एंटीओक्सीडेनट्स , जैसे कि सेलेनियम, विटामिन सी और एलीसीन होते है, जो कि रक्त को पतला करने में काफी प्रभावशाली होते हैं। इसीलिए सुबह सुबह कच्चे लहसुन के दो तीन कली के टुकड़े चबाने से या उसके महीन टुकड़े करके निगलने से काफी फायदा पहुँचता है।नमक ब्लड प्रेशर बढाने वाला प्रमुख कारक है, इसलिए हाई ब्लड प्रेशर वालों को नमक का प्रयोग कम करना चाहिए।
यूं दिखें 30 से ज्यादा की उम्र में भी जवां
ADMIN 2018-06-09 14:03:29
नई दिल्ली, 09 जून (आरएनआई) | जैसे जैसे उम्र बढ़ती है वैसे वैसे उम्र के साथ समस्यायें उत्पन्न होने लगती है , जैसे- चेहरे पर महीन रेखाएं, झुर्रियां, त्वचा का रंग काला पड़ते जाने से छुटकारा और त्वचा में कसाव बनाए रखने के लिए 30 साल की उम्र के बाद इसकी सही देखभाल बेहद जरूरी है।
Five practices that may add extra years to your life
ADMIN 2018-05-01 09:18:15
New Delhi, 1 May (RNI) | A study claims that eating a healthy diet, exercising regularly, keeping a healthy body weight, not drinking too much alcohol, and not smoking during adulthood may add over a decade to the life expectancy of a person.Researchers led by Harvard T H Chan School of Public Health also found that US women and men who maintained the healthiest lifestyles were 82 percent less likely to die from cardiovascular disease and 65 percent less likely to die from cancer when compared with those with the least healthy lifestyles over the course of the roughly 30-year study period.The study published in the journal Circulation is the first comprehensive analysis of the impact of adopting low-risk lifestyle factors on life expectancy in the US.
गर्मी में झुलसी त्वचा की यूं करें देखभाल
ADMIN 2018-04-16 15:14:49
नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आरएनआई) | गर्मियों के मौसम में चिलचिलाती धूप तथा यूवी रेडिएशन की वजह से त्वचा में नमी कम हो जाती है, जिस वजह से त्वचा रूखी, मुरझाई तथा बेजान हो जाती है और त्वचा का रंग सामान्य से ज्यादा गहरा या काला हो जाता है। इस मौसम में त्वचा की देखभाल के उपाय बताते हुए कहा कि इस समय सूर्य की किरणों से त्वचा के बचाव के लिए सनस्क्रीन का लेप काफी प्रभावी माना जाता है। इसके अलावा टोपी पहनना, छाता लेकर चलना तथा दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक घर में रहना वैकल्पिक उपाय माने जाते हैं। अगर आपको भरी दोपहर में घर से निकलना ही पड़े तो सूर्य की गर्मी से बचाव करने वाली सनस्क्रीन बाजार में उपलब्ध है। सूर्य की गर्मी तथा वायु प्रदूषण से चेहरे पर कील -मुहांसे, छाइयां, काले दाग, ब्लैकशेड तथा पसीने की बदबू की समस्या हो जाती है। कैसे झुलसती है त्वचा -
त्वचा को सर्दियों में यूं रखें मुलायम
Subir Sen 2018-01-10 01:30:30
नई दिल्ली, 10 जनवरी (आरएनआई) | सर्दियों के मौसम में त्वचा में रूखापन आना आम बात है, इसलिए त्वचा में कोमलता बरकरार रखने के लिए पपीता, नींबू या शहद युक्त नैचुरल मॉइश्चराइजर या कोकोनट मास्क का इस्तेमाल करें। 'जीवा आयुर्वेदा' के निदेशक प्रताप चौहान और 'जस्ट हर्ब्स' की ब्रांड निदेशक मेघा सबलोक ने इस संबंध में ये सुझाव दिए हैं : * गुड़हल, शहद और नारियल तेल से एंटी-एजिंग मास्क बनाने के लिए गुड़हल के फूल को दो कप पानी में तब तक उबालें, जब तक पानी आधा कप न रह जाए। अब इसमें शहद और नारियल तेल मिला लें और चेहरे व गर्दन पर लगाएं। 10-15 मिनट बाद गुनगुने पानी से धो लें। गुड़हल में अल्फा-हाइड्रोक्सी एसिड (एएचए) होता है, जो त्वचा को ताजगी प्रदान करता है और फ्लेक्सिबिलिटीमें सुधार करता है। इस मास्क के इस्तेमाल से त्वचा में चमक और कसाव भी आता है।

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