दुर्गापूजा मे दिखेगा बंगाल के मायापुर के इस्कॉन मंदिर का नजारा

Rama Shanker Prasad 2019-09-18 10:50:18    MEDITATION 4754
दुर्गापूजा मे दिखेगा बंगाल के मायापुर के इस्कॉन मंदिर का नजारा
आरा, 18 सितंबर 2019, (आरएनआई)। शारदीय नवरात्र की मां आदि शक्ति की पूजा को ले श्रद्धालुओं ने तैयारी शुरू कर दी है। पूजा को ले कई जगहों पर भव्य पंडाल बनाये जा रहे हैं।वही आरा शहर के चंदवा मोड़ पर ओम क्लब श्री दुर्गापूजा समिति की ओर से पंडाल का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इस बार यहाँ बंगाल के मायापुर के इस्कॉन मंदिर का नजारा शहरवासियों को देखने को मिलेगा।वही पूजा समिति की ओर से इस बार लगभग दस लाख रुपये मूर्ति, पंडाल व सजावट में खर्च किये जायेंगे। यह पंडाल 82 फीट ऊंचा और 65 फीट चौड़ा है। पंडाल बनाने के लिए गिरिडीह के कारीगर को बुलाया गया है। कारीगर अख्तर के साथ 20 अन्य कारीगर दिन-रात लगे हैं, जबकि मूर्तिकार करमनटोला निवासी भरत मिस्त्री हैं। प्रतिमा की विशेषता यह है कि माता दुर्गा की प्रतिमा 15 फीट उंची होगी। यहां पूजा की विशेषता यह है कि पांच कलश स्थापित कर मां दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश व कार्तिक की पूजा की जाती है।वही पूजा समिति अध्यक्ष रौशन तिवारी ने बताया कि पूजा कमेटी भव्य पंडाल के साथ आकर्षक प्रतिमा के लिए दिन-रात मेहनत कर रही है। प्रतिमा व पंडाल के साथ लाइट पर ध्यान दिया गया है। सीसीटीवी कैमरा भी लगाया जायेगा। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा का ख्याल रखा जाता है।




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कैसे डाकू से साधु बने वाल्मीकि?
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आंतरिक द्वन्द पर विजय प्राप्त करने का पर्व है दशहरा-कौशलेन्द्र शास्त्री
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लखनऊ, 7 अक्टूबर 2019, (आरएनआई)। भारतीय संस्कृति सदा से ही वीरता व शौर्य की समर्थक रही है। यदि कभी युद्ध अनिवार्य ही हो तब शत्रु के आक्रमण की प्रतीक्षा ना कर उस पर हमला कर उसका पराभव करना ही कुशल राजनीति है। अत: प्रत्येक व्यक्ति और समाज में वीरता का उदय हो इसी वजह से दशहरे का उत्सव मनाया जाता है। ऐसा विश्वास है कि इस दिन जो कार्य आरम्भ किया जाता है उसमें विजय मिलती है। भगवान श्री राम ने भी रावण से युद्ध हेतु इसी दिन प्रस्थान किया था। दशहरा का पर्व दस प्रकार के पापों- काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा और चोरी के परित्याग की सद्प्रेरणा प्रदान करता है।
PEOPLE WORSHIP MAHA GAURI-THE EIGHT FORM OF GODDESS DURGA, DISTRICT ADMINISTRATION NOT ALLOW SET OF PANDALS WITHOUT PERMISSION
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Ara, 6 October 2019, (RNI): Thousands of devotees thronged the Puja pandals in different parts of Bhojpur district seeking blessings of Maha Gauri, the eight form of Goddess Durga on the Mahaashtami day of Navaratra on Sunday.
MAREVELOUS PANDALS SET UP REPLICATING DIFFERENT TEMPLES AND HISTORICAL BUILDINGS
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भक्ति गीतों पर रातभर झूमे दर्शक
Ram Prakash Rathore 2019-10-04 08:17:18
शाहाबाद, 4 अक्टूबर 2019, (आरएनआई)। क्षेत्र के ग्राम रैंगवा में विशाल दुर्गा जागरण का आयोजन किया गया । जागरण का सुभारम्भ अखिलेश पाठक -प्रदेश कार्यसमिति सदस्य द्वारा माता रानी के पूजन अर्चन के बाद हुआ। वैशाली जागरण ग्रुप शाहजहांपुर द्वारा प्रस्तुत किए गए जागरण में मातारानी की तमाम भेंटे प्रस्तुत कीं गयीं । ग्रुप के कलाकार संजू किंकर व रूचि किंकर ने " चलो बुलाबा आया है" वेटा बुलाए माँ दौड़ी चली आए, राम जानकी बसी हैं मेरे सीने में आदि भक्ति पूर्ण गीतों से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया । भक्तिपूर्ण गीतों का आनंद भक्त गण सुबह तक लेते रहे तथा पूरा पंडाल मां शेरा बाली के जयजयकार से पूरा पंडाल रात भर गूंजता रहा।
नवरात्रि के नौ दिनो में हो रही है मां की नौ अलग-अलग रूपों की पूजा - आचार्य कौशलेंद्र शास्त्री
Laxmi Kant Pathak 2019-10-03 18:58:57
हरदोई, 3 अक्टूबर 2019, (आरएनआई)। आचार्य कौशलेन्द्र शास्त्री जी कहते है कि देवी दुर्गा को आदिशक्ति के नाम से भी जाना जाता है। शक्तिदायिनी मां दुर्गा की पूजा अर्चना के लिए साल के दो पखवाड़े बेहद महत्त्वपूर्ण माने जाते हैं। एक चैत्र नवरात्र और दूसरा शारदीय नवरात्र होता है। चैत्र नवरात्र चैत्र माह में मनाया जाता है। जबकि शारदीय नवरात्र आश्विन माह में मनाया जाता है। नवरात्रि के समय जब जगत जननी मां दुर्गा की पूजा आराधना की जाती है इसे कष्टों और जीवन की परेशानियों का हरण करने के रूप में जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, मां दुर्गा, शक्ति और सतत चक्र की ऊर्जा देने वाली है। 2019 में नवरात्रि में आप भी मनोकामना पूर्ति के लिए मां दुर्गा, और उनके सभी स्वरुपो की आराधना एवं मां को प्रसन्न कर सकते हैं।प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।
MAA DURGA ARRIVES ON ELEPHANT AND DEPARTS ON ELEPHANT
RAJIV NAYAN AGRAWAL 2019-10-02 14:02:59
Ara, 2 October 2019, (RNI): Goddess Durga with all her grandeur has arrived on elephant this year and will leave for Kailash on elephant. Devotees welcomed the Goddess with ‘Kalash Sthapan’ that marked the commencement of Shardiya Navaratara on September 29, 2019, according to Mithila panchang.
महिषासुर और रावण के वंशज नही मनायेंगे नवरात्रि: आचार्य कौशलेंद्र शास्त्री
Laxmi Kant Pathak 2019-09-29 19:35:27
लखनऊ, 29 सितंबर 2019, (आरएनआई)। झारखंड और छत्तीसगढ़ के अलावा पश्चिम बंगाल के तराई इलाके में भी कुछ संख्या में असुर समुदाय रहते हैं। वहां के असुर बच्चे मिट्टी से बने शेर के खिलौने से खेलते तो हैं, लेकिन उनके सिर काट कर। क्योंकि उनका विश्वास है कि शेर उस दुर्गा की सवारी है, जिसने उनके पुरखों का नरसंहार किया था।
मित्रता निभाना हो तो सुदामा की तरह : स्वामी अभयानंद महाराज
Rupesh Kumar 2019-09-25 18:38:17
मुज़फ़्फ़रपुर, 25 सितंबर 2019, (आरएनआई)। गायघाट प्रखंड क्षेत्र के जारंग पश्चिमी पंचायत के चन्द्रहास नगर गांव में चल रहें सात दिवसीय श्री मद् भागवत कथा का समापन बुधवार को हो गया । भागवत कथा के अंतिम दिन स्वामी अभयानंद जी महाराज ने प्रद्युम्न जन्म के द्वारा बताया की प्रद्युम्न पूर्व जन्म में कामदेव के अवतार थे। शम्बरासुर वध स्यमन्तक उपाख्यान के द्वारा बताया कि जो इस पवित्र उपाख्यान को सुनता है। यदि वह चौथ के चन्द्रमा को देख भी ले तो कोई दोष नहीं होता हैं। जाम्बवती सत्यभामा से विवाह स्यमन्तक उपाख्यान सुनाना कालिन्द्री ,मित्रविंदा लक्ष्मणा से विवाह मुर वध भौमासुर वध भूमि के द्वारा भगवान की दिव्य स्तुति औऱ सोलह हजार राज कन्याओं से विवाह पारिजात वृक्ष का हरण भगवान के पुत्र पोत्रो का वर्णन अनिरुद्ध का विवाह भगवान औऱ बाणा सुर का युद्ध भगवान शंकर का आना और भगवान शंकर जी के द्वारा भगवान की दिव्य स्तुति नृगोपाख्यान के द्वारा भगवान ने दिव्य सात श्लोको में भगवान ने बताया कि ब्राह्मण के धन, एवं ब्राह्मण को किसी भी प्रकार से कष्ट देना वाले को क्या क्या दुष्परिणाम देखने को मिलते है। इसका वर्णन किया बलराम जी के द्वारा यमुना जी का कर्षण करना पौण्ड्रक काशीराज का वध द्विविद का वध साम्ब विवाह पांडवो का राजसूय यज्ञ और शिशुपाल का वध जरासंध वध सुदामोपाख्यान के द्वारा बताया कि मित्रता किस प्रकार से निभाई जाती हैं।इस दौरान मौके पर मुखिया मनिष भारद्वाज, जय प्रकाश कुंवर, बैधनाथ कुवंर , संजय सिंह, प्रेम शंकर सिंह, पूर्व पंसस राजु कुमार आदि थें.
सच्चाई से प्रेम करने वालों को होता है भगवान का दर्शन - स्वामी अभयानंद महाराज
Rupesh Kumar 2019-09-24 21:09:04
मुज़फ़्फ़रपुर, 24 सितंबर 2019, (आरएनआई)। गायघाट प्रखंड क्षेत्र के जारंग पश्चिमी पंचायत के चन्द्रहास नगर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्री मद् भागवत कथा के छठे दिन कथा में स्वामी अभयानंद जी महाराज ने बताया कि भगवान ने वृंदावन लीलाओं मै वेणुगीत का वर्णन किया । शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर भगवान का वंशी बजाना और गोपियों के आगमन भगवान औऱ गोपियों के सम्बाद मै रासोत्सव और यह रासोत्सव 5 अध्यायों में वर्णित है। जिसे रास पंचाध्यायी भी कहते हैं। भगवान ने यह रास गोपियों के साथ इस लिये रचा था ताकि जीवो को सबसे श्रेष्ठ आनंद का लाभ प्रदान किया जा सके। इस रास पंचाध्यायी में गोपी गीत आता हैं। जिसमें गोपियों ने करुण स्वर में भगवान को पुकारती हैं तो जो जीव गोपी गीत का नित्य पाठ करता है । उसे एक दिन भगवान का दर्शन प्राप्त होता हैं। जो जीव इस सम्पूर्ण रासपंचाध्यायी का पाठ करता है तो उसका ह्रदय रोग समाप्त हो जाता हैं ।ऐसा यह दिव्य रासोत्सव हैं शंखचूड़ वध युग्मगीत अरिष्टासुर वध केशी वध नारद जी द्वारा भगवान का स्तवन व्योमासुर वध अक्रूर जी का वृंदावन आगमन और भगवान श्री कृष्ण, बलराम जी साथ मथुरा गमन अक्रूर जी द्वारा भगवान की स्तुति रजक वध कुब्जा पर कृपा धनुष भङ्ग कुँवलयापीठ वध और कंस वध करके अपने माता पिता को बन्धन मुक्त किया था। उग्रसेन का राज्य भिषेक भगवान ने गुरुकुल जाकर यह बताया कि गुरु का महत्व मनुष्य के लिए कितना महत्व रखता है । जब भगवान जो इस सम्पूर्ण स्षिटि के रचयिता हैं उनको भी गुरु के पास जाना पड़ा। इस लीला से भगवान यह बताना चाहते की प्रत्येक जीव को गुरु का सानिध्य प्राप्त करना चाहिए ।यह जीव मात्र का धर्म है उद्धव गोपी सम्बाद मैं भ्रमर गीत का वर्णन भगवान का जरासन्ध से युद्ध औऱ भगवान का द्वारकापुरी का निर्माण कालयवन विनाश मुचकुंद ऋषि के द्वारा भगवान की स्तुति बलराम जी का विवाह श्री कृष्ण भगवान को रुक्मिणी जी का संदेश और भगवान का कुंडनपुर गमन रुक्मिणी जी का हरण और रुक्मिणी जी के साथ विवाह हुआ ।इस दौरान मौके पर मुखिया मनिष भारद्वाज, पूर्व पंसस राजु कुमार, प्रेम शंकर सिंह, जयप्रकाश कुंवर, प्रकाश कुंवर, बैधनाथ कुवंर, शिवजी राय आदि थें.
मनुष्य को हमेशा करना चाहिए पूजा अर्चना - स्वामी अभयानंद
Rupesh Kumar 2019-09-23 18:26:51
मुज़फ़्फ़रपुर, 23 सितंबर 2019, (आरएनआई)। गायघाट प्रखंड क्षेत्र के जारंग पश्चिमी पंचायत के चन्द्रहास नगर गांव में आयोजित सात दिवसीय श्री मद् भागवत कथा के पांचवे दिन स्वामी अभयानंद जी महाराज ने पूतना मोक्ष के द्वारा बताया कि भगवान को आप किसी भी भाव से भजो चाहे अच्छा या बुरा परन्तु भगवान तो दया ही करते हैं "क्योंकि भगवान का स्वभाव ही दया करना है शकट, तृणावर्त का वध नामकरण संस्कार , विश्वरूप दिखाना ,उलूखल बन्धनम ,गोकुल से वृंदावन जाना औऱ वत्सासुर, वकासुर ,अघासुर वध ब्रह्मा जी के द्वारा भगवान की दिव्य स्तुति धेनुकासुर वध ,कालिया दमन नागपत्नियो द्वारा भगवान का स्तवन भगवान के द्वारा दावानलरक्षण गोवर्धन धारण लीला के द्वारा इंद्र का मान भङ्ग करना' औऱ बताया कि जिसके द्वारा हमें सब कुछ प्राप्त हो रहा हो उसकी पूजा अर्चना करते रहना चाहिए।इस कथा के दौरान मौके पर मुखिया मनिष भारद्वाज, पूर्व पंसस राजु कुमार, बैधनाथ कुवंर , जयप्रकाश कुंवर, शिवजी राय, संजय सिंह, प्रेम शंकर सिंह, प्रकाश कुंवर आदि थें.
भक्त की भक्ति से भगवान कही भी अवतीर्ण हो जाते है - स्वामी अभयानंद जी महाराज
Rupesh Kumar 2019-09-22 16:21:26
मुज़फ़्फ़रपुर, 22 सितंबर 2019, (आरएनआई)। गायघाट प्रखंड के चन्द्रहाॅस नगर में चौथे दिन भागवत कथा को सुनने दूर-दूर से लोग आए, व कथा सुनकर उपस्थित सभी का मन भक्ति में मग्न हो गया. कथा के चौथे दिन स्वामी अभयानंद जी महाराज ने भगवान श्री कृष्ण के परम् कल्याण कारी चरित्रों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रह्लाद चरित्र के माध्य्म से बताया कि यदि हमारा कोई प्रिय व्यक्ति या फिर गुरु, माता, पिता ही क्यों न हो यदि वो भगवद मार्ग से हटाते है तो उनकी बात नहीं मानना चाहिए. अथवा उनका त्याग कर देना चाहिए. नृसिंह अवतार के माध्य्म से बताया की भक्त की भक्ति से भगवान कही भी अवतीर्ण हो जाते है, इसमें कोई संदेह नहीं है गजेंद्र उद्धार के माध्य्म से बताया कि भगवान को तो भाव औऱ श्रद्धा से एक फूल भी चढ़ाओ तो भगवानअपने भक्त का कल्याण करते हैं. वामन अवतार के माध्य्म से बताया की ब्राह्मण यदि कोई याचना करें तो उसे कभी मना नही करना चाहिए. चाहे वो गुरु मना ही क्यों ना करें तो ऐसे गुरु का भी त्याग कर देना चाहिए, परन्तु गुरु गलत हो तो संक्षिप्त रूप में राम अवतार का सम्पूर्ण चरित्र श्री वाल कृष्ण लाल के जन्मोत्सव की कथा सुनाई. आसपास के क्षेत्र से आये सैंकड़ो की संख्या में लोगों ने कथा का आनंद उठाया है.
जिनका मन निर्मल है वहीं प्रभु को प्राप्त कर सकता है : आचार्य अभयानंद महाराज
Rupesh Kumar 2019-09-20 20:06:34
मुज़फ़्फ़रपुर/गायघाट, 20 सितंबर 2019, (आरएनआई)। गायघाट प्रखंड क्षेत्र के जारंग पश्चिमी पंचायत के चन्द्रहास नगर गांव में आयोजित सात दिवसीय संगीतमय श्री मद् भागवत कथा के दूसरें दिन वृंदावन से आए अभयानंद महाराज जी ने अमर कथा एवं शुकदेव जी के जन्म का वृतांत विस्तार से वर्णन किया.
ଭଦ୍ରକରେ ଶତାଧିକ ବର୍ଷର ପ୍ରସିଦ୍ଧ ଶ୍ରୀଶ୍ରୀ ଅନନ୍ତ ନାରାୟଣଙ୍କ ପୂଜୋତ୍ସବ : ହଜାର ହଜାର ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁ ସମାଗମ
Laxmikanta Nath 2019-09-19 20:51:51
ଭଦ୍ରକ,୧୯/୦୯: ଭଦ୍ରକ ସହର ଅନ୍ତର୍ଗତ ଠାକୁର ଅନନ୍ତ ନାରାୟଣ ମାର୍ଗ, ନରିପୁର (ଅସ୍ତଳ) ଗ୍ରାମରେ ପ୍ରତିବର୍ଷ ପରି ଚଳିତ ବର୍ଷ ପବିତ୍ର ‘ଅନନ୍ତ ବ୍ରତ’ ଉପଲକ୍ଷେ ପ୍ରସିଦ୍ଧ ଠାକୁର ଶ୍ରୀ ଶ୍ରୀ ଅନନ୍ତ ନାରାୟଣଙ୍କ ପୂଜା ଉତ୍ସବ, ଭଜନ ସମାରୋହ ଓ ବିଭିନ୍ନ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ଆଠ ଦିନ ବ୍ୟାପୀ ମହାସମାରୋହରେ ପାଳିତ ହୋଇ ଯାଇଛି । ଏହି ଉତ୍ସବ ସାର୍ବଜନୀନ ଓ ଗଣପର୍ବ ରୂପ ନେଇ ଶହେ ବର୍ଷରୁ ଉଦ୍ଧ୍ୱର୍ଧରି ଭକ୍ତି ଓ ନିଷ୍ଠାର ସହ ପାରମ୍ପରିକ ରୀତିରେ ପୁରଷାନୁକ୍ରମେ ପାଳିତ ହୋଇ ଆସୁଅଛି । ସାଳନ୍ଦୀ ନଦୀରେ କଳସ ବୁଡା ଯାଇ ଜଳ ଅଣାଯିବା ପରେ ଘଟ, ପୂଜା,ପାଠ, ହୋମ ଓ ପୂଜାର୍ଚ୍ଚନା ଆଦି ପ୍ରଭୁଙ୍କ ନୀତିକାନ୍ତି ପରମ୍ପରା ଅନୁଯାୟୀ ସମ୍ପନ୍ନ ହୋଇଥିଲା । ବାଙ୍ଗାଲୋର ଓ କୋଲକାତାରୁ ଆସିଥିବା କାରୀଗରଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ବିଭିନ୍ନ କିସମର ସୁବାସିତ ପୁଷ୍ପମାଲ୍ୟରେ ବିଗ୍ରହଙ୍କୁ ସୁସଜ୍ଜିତ କରାଯାଇ ମନ୍ଦିରର ଶୋଭାବର୍ଦ୍ଧନ କରାଯାଇଥିଲା । ମହାପ୍ରଭୁଙ୍କ ‘ଅନନ୍ତ ଶୟନ’ ଦୃଶ୍ୟ ଚିତ୍ତାକର୍ଷକ ହୋଇଥିବାରୁ ଏହାକୁ ଦେଖିବା ପାଇଁ ଜାତି, ଧର୍ମ, ବର୍ଣ୍ଣ ନିର୍ବିଶେଷରେ ଜିଲ୍ଲା ଓ ରାଜ୍ୟର ବିଭିନ୍ନ ଅଞ୍ଚଳରୁ ବହୁ ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁଙ୍କ ସମାଗମ ହୋଇଥିଲା । ଭକ୍ତଙ୍କ ସମାଗମକୁ ଦୃଷ୍ଟିରେ ରଖି ଜିଲ୍ଲା ପ୍ରଶାସନ ଓ ପୁଲିସ ପକ୍ଷରୁ ବ୍ୟାପକ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଗ୍ରହଣ କରାଯାଇଥିଲା । ପୂଜା ଦିନ ପ୍ରବଳ ବର୍ଷା ଲାଗି ରହିଥିବା ବେଳେ ଅପରାହ୍ନ ଠାରୁ ତହିଁ ପରଦିନ ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ପାଗ ଶୁଖିଲା ରହିଥିବାରୁ ଏହା ପ୍ରଭୁ ଅନନ୍ତଙ୍କର କୃପା ବୋଲି ଲୋକେ ମତ ଦିଅନ୍ତି । ମେଳାରେ ମନୋହରୀ ଦୋକାନ, ଆକର୍ଷଣୀୟ ଆଲୋକସଜ୍ଜା, ସୁଉଚ୍ଚ ତୋରଣ ଆଧ୍ୟାତ୍ମିକ ପରିବେଶକୁ ଭାବ ଗମ୍ଭୀର କରିଥିଲା । ପୂଜାରେ କୁଳ ପୁରୋହିତ ଗୋବର୍ଦ୍ଧନ ମିଶ୍ର, ପଣ୍ଡିତ ସହଦେବ ପଣ୍ଡା ପ୍ରମୁଖ ପୂଜାପାଠ କରିଥିଲେ । ଏଠାକୁ ବିଭିନ୍ନ ଅଞ୍ଚଳରୁ ଆସିଥିବା ବ୍ରତଧାରୀ ମହିଳମାନେ ଉପବାସ କରି ମନ୍ଦିରରେ ନାଗ ଓ ବ୍ରତପୂଜା କରିଥିଲେ । ଏହା ଏକ ସାର୍ବଜନୀନ ଗଣପର୍ବର ରୂପ ନେଇଥିବାରୁ ପ୍ରତିବର୍ଷ ପରି ଚଳିତ ବର୍ଷ ବିଭିନ୍ନ ଜିଲ୍ଲାରୁ ହଜାର ହଜାର ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁ ପ୍ରଭୁଙ୍କୁ ଦର୍ଶନ କରି ଭକ୍ତି ନୈବେଦ୍ୟ ଅର୍ପଣ କରିଥିଲେ । ମନ୍ଦିର ପ୍ରତିଷ୍ଠାତା ରାଜ୍ୟଗୋପବନ୍ଧୁ ପୁରସ୍କାରପ୍ରାପ୍ତ ସମାଜସେବୀ ସ୍ୱର୍ଗତ ସୁରେନ୍ଦ୍ର ଚନ୍ଦ୍ର ନାୟକ ଓ ସହଧର୍ମିଣୀ ୰ ହରିପ୍ରିୟା ନାୟକ ମୁଖ୍ୟ ସେବିକା ଭାବେ ଦୀର୍ଘ ବର୍ଷ ଧରି ପ୍ର୍ରଭୁଙ୍କୁ ପୂଜା କରି ଆସୁଥିଲେ । ପ୍ରଭୁ ଅନନ୍ତଙ୍କ ନିକଟରେ ଯିଏ ଯାହା ମାନସିକ କରେ ସେମାନଙ୍କର ମନକାମନା ପୂର୍ଣ୍ଣ ହୋଇଯାଏ ବୋଲି ବିଶ୍ୱାସ ରହିଥିବା କିମ୍ବଦନ୍ତୀ ରହିଛି । ଶହେବର୍ଷରୁ ଉଦ୍ଧ୍ୱର୍ ଧରି ଧର୍ମୀୟ ପରମ୍ପରାକୁ ନେଇ ଅନନ୍ତ ନାଗ ବ୍ରତ ପୂଜା ଉତ୍ସବ ପାଳନ ହୋଇ ଆସୁଥିବା ବେଳେ ୧୯୭୯ ମସିହାରେ ସ୍ୱପ୍ନାଦେଶ ହେବାରୁ ପବିତ୍ର ଅକ୍ଷୟ ତୃତୀୟାରେ ଅନନ୍ତ ଶଯ୍ୟା ବିଶିଷ୍ଟ ବିଗ୍ରହ, ମନ୍ଦିର ପ୍ରତିଷ୍ଠା ହୋଇ ଅଦ୍ୟାବଧି ଭକ୍ତି ନିଷ୍ଠାର ସହ ନରିପୁର ଅସ୍ତଳ ଗ୍ରାମରେ ଆଡମ୍ବର ସହକାରେ ଅଦ୍ୟାବଧି ପାଳିତ ହୋଇ ଆସୁଅଛି
कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ संगीतमय सप्तम दिवसयी श्री मद्भभागवत कथा ज्ञान यज्ञ
Rupesh Kumar 2019-09-19 19:06:46
मुज़फ़्फ़रपुर, 19 सितंबर 2019, (आरएनआई)। जिला के गायघाट प्रखंड के जारंग में गुरुवार को कलश यात्रा के साथ शुरू हुआ संगीतमय सप्तम दिवसयी श्री मद्भभागवत कथा ज्ञान यज्ञ. स्थानीय जय प्रकाश कुँवर ने बताया कि प्रखंड के जारंग गांव के चन्द्रहाॅस नगर स्थित वीपीएस पब्लिक स्कूल के प्रांगण में इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई है. ये कार्यक्रम सात दिनों तक चलेगा. वंही इस कार्यक्रम की शुरुआत स्कूल प्रांगण स्थल से चलकर तीन सौ गयारह कन्याओं ने शिव मंदिर के प्रांगण मे स्थित तालाब से मंत्र उच्चारण के साथ जल भरकर पुनः यज्ञ स्थल (वीपीएस पब्लिक स्कूल) पर पहूची. मौके पर अभयानंद जी महाराज वृंदावन वाले, वर्तमान मनीष भरद्वाज, नूनू सिंह, अंतिम सिंह, पूर्व पंचायत समिति सदस्य राजू कुमार, रंजन कुवॅर, जय प्रकाश कुवॅर, ओम प्रकाश, कुवॅर बैधनाथ कुवॅर, शिवजी राय, संजय सिंह व अन्य कई गण्यमान लोग शामिल रहे.
दुर्गापूजा मे दिखेगा बंगाल के मायापुर के इस्कॉन मंदिर का नजारा
Rama Shanker Prasad 2019-09-18 10:50:18
आरा, 18 सितंबर 2019, (आरएनआई)। शारदीय नवरात्र की मां आदि शक्ति की पूजा को ले श्रद्धालुओं ने तैयारी शुरू कर दी है। पूजा को ले कई जगहों पर भव्य पंडाल बनाये जा रहे हैं।वही आरा शहर के चंदवा मोड़ पर ओम क्लब श्री दुर्गापूजा समिति की ओर से पंडाल का निर्माण शुरू कर दिया गया है। इस बार यहाँ बंगाल के मायापुर के इस्कॉन मंदिर का नजारा शहरवासियों को देखने को मिलेगा।वही पूजा समिति की ओर से इस बार लगभग दस लाख रुपये मूर्ति, पंडाल व सजावट में खर्च किये जायेंगे। यह पंडाल 82 फीट ऊंचा और 65 फीट चौड़ा है। पंडाल बनाने के लिए गिरिडीह के कारीगर को बुलाया गया है। कारीगर अख्तर के साथ 20 अन्य कारीगर दिन-रात लगे हैं, जबकि मूर्तिकार करमनटोला निवासी भरत मिस्त्री हैं। प्रतिमा की विशेषता यह है कि माता दुर्गा की प्रतिमा 15 फीट उंची होगी। यहां पूजा की विशेषता यह है कि पांच कलश स्थापित कर मां दुर्गा, लक्ष्मी, सरस्वती, गणेश व कार्तिक की पूजा की जाती है।वही पूजा समिति अध्यक्ष रौशन तिवारी ने बताया कि पूजा कमेटी भव्य पंडाल के साथ आकर्षक प्रतिमा के लिए दिन-रात मेहनत कर रही है। प्रतिमा व पंडाल के साथ लाइट पर ध्यान दिया गया है। सीसीटीवी कैमरा भी लगाया जायेगा। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा का ख्याल रखा जाता है।
ବୁଢ଼ା, ଟୋକା, ପିଲା, ଛୁଆ ଓ କୁନି ଗଣେଶ ପୂଜନରେ କମ୍ପିଲା ଭଦ୍ରକ ସହର
Laxmikanta Nath 2019-09-03 17:52:05
ଭଦ୍ରକ,୦୩/୦୯ : ଆଜିର ଦିନରେ ସମଗ୍ର ଭାରତବର୍ଷ ଶ୍ରୀ ଗଣପତିଙ୍କ ଆଗମନରେ ଉତ୍ସବମୁଖର ହୋଇଉଠିଥିବାବେଳେ ଭଦ୍ରକର ଉଭୟ ହିନ୍ଦୁ ଓ ମୁସଲିମ୍ ସଂପ୍ରଦାୟର ଲୋକଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ଭାଇଚାରାର ସଂପର୍କ ଯୋଡିରଖିଥିବା ମୋଗଲ ସମୟର ପ୍ରସିଦ୍ଧ ବୁଢ଼ା ଗଣେଶ ପୂଜାର ମାହୌଲ ସହିତ ଟୋକା ଓ ପିଲା ଗଣେଶ ପୂଜନର ଉଦ୍ଦିପନା ସହରବାସୀଙ୍କ ହୃଦୟରେ ଉନ୍ମାଦନା ସୃଷ୍ଟି କରିଛି । ଏହି ତିନି ଗଣେଶଙ୍କ ମଧ୍ୟରୁ ମୋଗଲ ସମୟର ବୁଢା ଗଣେଶଙ୍କ ଇତିହାସ ବେଶ୍ ଚର୍ଚ୍ଚିତ । ଯାହା କେଉଁ ଆବହମାନ କାଳରୁ ଏ ମାଟିର ଉଭୟ ହିନ୍ଦୁ ଓ ମୁସଲମାନଙ୍କୁ ଏକତାର ମହାମନ୍ତ୍ରରେ ବାନ୍ଧି ରଖିଛି । ଯାହା ଅନ୍ୟତ୍ର ବିରଳ । ଭଦ୍ରକ ସହରର ପ୍ରମୁଖ ବାଣିଜ୍ୟିକ ପେଣ୍ଠସ୍ଥଳୀ ଭାବେ ଏକଦା ପରିଚିତ ପୁରୁଣା ବଜାର ଅଂଚଳର ଏହି ବୁଢ଼ା ଗଣେଶଙ୍କ ପୂଜନର ଇତିହାସ ପ୍ରାୟ ୫ ଶହରୁ ଊର୍ଦ୍ଧ୍ଵ ବର୍ଷ ବୋଲି ‘ବୋଇତ ଯୁଗର ବୁଢ଼ା ଗଣେଶ’ ପୁସ୍ତକରୁ ଜଣାଯାଏ । ଏକଦା ଏହି ମାଟିର ସାଧବମାନେ ନିଜ ବାଣିଜ୍ୟ ବ୍ୟବସାୟର ଯାତ୍ରା କରିବା ପୂର୍ବରୁ ଏହି ବୁଢ଼ାଗଣେଶଙ୍କୁ ପ୍ରତଷ୍ଠା କରି କୁଶଳରେ ଫେରିବାର କାମନା କରୁଥିଲେ । ପୁରୁଷାନୁକ୍ରମେ ସେହି ସମୟରୁ ଏ ଅଞ୍ଚଳର ଉଭୟ ହିନ୍ଦୁ ଓ ମୁସଲମାନମାନେ ଏହି ଦେବତାଙ୍କୁ ପ୍ରତିବର୍ଷ ପ୍ରତିଷ୍ଠା କରି ପାରମ୍ପରିକ ରୀତିରେ ପୂଜାକରି ଆସୁଛନ୍ତି । ଏଥିରେ ଜାତି, ଧର୍ମ, ବର୍ଣ୍ଣ ନିର୍ବିଶେଷରେ ସମସ୍ତେ ନିଜ ନିଜର ମାନସିକ ନଡ଼ିଆ ରଖି ବୁଢ଼ାଗଣେଶଙ୍କୁ ମନସ୍କାମନା ପୂରଣର କାମନା କରନ୍ତି ବୋଲି ଉଭୟ ସମ୍ପ୍ରଦାୟର ବିଶ୍ୱାସ ରହିଛି । ପ୍ରତ୍ୟେକ ବର୍ଷ ଶ୍ରୀଗଣେଶ ତିଥିରେ ଏହି ମୂର୍ତ୍ତି ନିର୍ମାଣ ହୋଇ ମାସାଧିକ କାଳ ନିଜ ଆସ୍ଥାନରେ ପୂଜାପାଇ ସାଳନ୍ଦୀ ନଦୀର ଆଶ୍ରମ ଘାଟରେ ବିସର୍ଜିତ ହୋଇଥାନ୍ତି । ପ୍ରବାଦ ଅଛି ଭସାଣିବେଳେ ବୁଢ଼ାଗଣେଶଙ୍କ କାନରେ ଯିଏ ଯାହା ମନାସି ଥାଏ, ତାହା ପୂରଣ ହୁଏ । ବୁଢ଼ାଗଣେଶଙ୍କର ବିଶେଷତ୍ୱ ଏହା ଯେ ମାସାଧିକକାଳ ପୂଜା ପାଇବା ଠାରୁ ଆରମ୍ଭ କରି ଭସାଣି ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ସମସ୍ତ ବ୍ୟୟଭାର ଭକ୍ତଙ୍କ ମାନସିକ ଦାନଅର୍ଥରେ ସଂପନ୍ନ ହୋଇଥାଏ ଏବଂ ଏହି ମୂର୍ତ୍ତିର ଢାଞ୍ଚା ଆରମ୍ଭରୁ ଆଜିପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଅପରିବର୍ତ୍ତିତ ରହିଛି । ଏହା ବିଭିନ୍ନ ସମୟରେ ଅନେକ ଶିଳ୍ପୀଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ନିର୍ମାଣ ହୋଇଆସୁଥିଲେ ମଧ୍ୟ ଠାକୁରଙ୍କ ମହିମାରୁ ମୂଳମୂର୍ତ୍ତିଙ୍କର କୌଣସି ପରିବର୍ତ୍ତନ ଆଜିପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ହୋଇନାହିଁ ବୋଲି କହନ୍ତି ପୂଜା କମିଟିର ସଭାପତି । ଅନୁରୂପ ପୁରୁଣା ବଜାର ଅଂଚଳର କେତେକ ଶ୍ରଦ୍ଧାଳୁ ବ୍ୟକ୍ତି ୧୯୭୦ ମସିହାରୁ ଆରମ୍ଭ କରିଥିବା ଟୋକାଗଣେଶଙ୍କ ପୂଜା ମଧ୍ୟ ଆଜିି ବେଶ୍ ଉତ୍ସାହ ଉଦୀପନା ମଧ୍ୟରେ ଆରମ୍ଭ ହୋଇଛି । ଏହି ମୂର୍ତ୍ତିର ବିଶେଷତ୍ୱ ଏହା ଯେ ଏହାର ମେଢ଼ଟି ସଂପୂର୍ଣ୍ଣ ଚାନ୍ଦିରେ ତିଆରି । ତେବେ ଏହାର ପୂଜା ଓ ଭଷାଣି ବୁଢାଗଣେଶଙ୍କ ଭଳି ମାସାଧିକ ଧରି ପାଳିତ ହେଉଛି ବୋଲି କହନ୍ତି ପୂଜା କମିଟିର ସଭାପତି । କେବଳ ଏହି ଦୁଇ ଗଣେଶ ନୁହଁନ୍ତି ସ୍ଥାନୀୟ କୁଆଁସ ଗ୍ରାମସ୍ଥିତ ମୁକ୍ତେଶ୍ୱର କ୍ଲବିର କେତେକ ଯୁବକଙ୍କ ଦ୍ୱାରା ୨୦୦୭ ମସିହାରୁ ପାଳିତ ହୋଇଆସୁଥିବା ପିଲାଗଣେଶ ମଧ୍ୟ ମାସାଧିକକାଳ ପୂଜା ପାଇ ବେଶ୍ ଯାକଯମକରେ ବିସର୍ଜିତ ହୋଇଆସୁଛି ବୋଲି କହନ୍ତି ସଭାପତି ଓ ସଂପାଦକ । ସେହିଭଳି କୁଆଁସସ୍ଥିତ ସୁଇପର କଲୋନୀ ଠାରେ ଛୁଆ ଗଣେଶ ପୂଜା ବେଶ୍ ଧୁମ ଧାମରେ ପାଳିତ ହୋଇଆସୁଥିବା ବେଳେ କୁନି ଗଣେଶ ମଧ୍ୟ ପୂଜା ପାଉଛନ୍ତି । ଏହି ପାଞ୍ଚୋଟି ଗଣେଶଙ୍କ ପୂଜନ ପାଇଁ ପ୍ରଶାସନ ପକ୍ଷରୁ ଶାନ୍ତିଶୃଙ୍ଖଳା ରକ୍ଷା ପାଇଁ ବେଶ୍ ବ୍ୟବସ୍ଥା ଗ୍ରହଣ କରାଯାଇଛି ବୋଲି କହିଛନ୍ତି ଜିଲା ଆରକ୍ଷୀ ଅଧୀକ୍ଷକ ରାଜେଶ ପଣ୍ଡିତ ।
ଆଖଣ୍ଡଳମଣି ପୀଠରେ ୪ଶହ ବର୍ଷର ପରମ୍ପରା .... ବୁଢା ଗଣେଶଙ୍କୁ ଲାଗି ହେଲା ୧୫୧ ଥାଳି ଭୋଗ
Laxmikanta Nath 2019-09-03 17:51:33
ଭଦ୍ରକ,୦୩/୦୯ : ରାଜ୍ୟର ବହୁ ପୁରାତନ ଶୈବପୀଠ ଆରଡି ଧାମରେ ସୋମବାର ଅଧିଷ୍ଠିତ ପ୍ରଭୁ ଆଖଣ୍ଡଳେଶ୍ୱରଙ୍କ ମନ୍ଦିର ବେଢା ପ୍ରାଙ୍ଗଣରେ ଥିବା ସିଦ୍ଧିମଣ୍ଡପ(ମୁକ୍ତିମଣ୍ଡପ)ର ଅଧିପତି ତଥା ବାବା ବୁଢାଗଣେଶଙ୍କ ପବିତ୍ର ଭାଦ୍ରବମାସ ଶୁକ୍ଳପକ୍ଷ ଚତୁର୍ଥୀ ଅବସରରେ ଲାଗି ହୋଇଛି ୧୫୧ ଥାଳି ଭୋଗ । ଏହି ପରମ୍ପରା ନୀତିକାନ୍ତି ଦୀର୍ଘ ୪ଶହ ବର୍ଷ ଧରି ପାଳିତ ହୋଇ ଆସୁଥିବା ମନ୍ଦିରର ପୁରୁଖା ସେବାୟତମାନେ ପ୍ରକାଶ କରିଛନ୍ତି । ମନ୍ଦିରର ସେବାୟତ ତଥା ପୀଠର ଅଧିବାସୀମାନଙ୍କ ପକ୍ଷରୁ ଲାଗି ହୋଇଥାଏ ଏହି ଭୋଗ । ଶୁଦ୍ଧ ଘିଅରେ ପ୍ରସ୍ତୁତ ମାଣ୍ଡୁଅ, ଲଡୁ, ପୁରୀ, କାକରା, ମାଲପୁଆ, ମଣ୍ଡା, କରଞ୍ଜି, ମୁଆଁ, ପଞ୍ଚାମୃତ, କ୍ଷୀରସାଗର, ରସଗୋଲା ନାନାଦି ପ୍ରକାର ପ୍ରସ୍ତୁତ କରାଯାଇ ସନ୍ଧ୍ୟାରେ ଅଣାଯାଇଥାଏ ସିଦ୍ଧମଣ୍ଡପକୁ । ପୀଠରେ ଦୀର୍ଘ ୪ଶହ ବର୍ଷ ଧରି ପୂଜା ପାଇ ଆସୁଥିବା ବୁଢାଗଣେଶଙ୍କ ପୂଜା ମହା ଆଡମ୍ବରେ ପାଳିତ ହେଉଅଛି । ପବିତ୍ର ଭାଦ୍ରବମାସ ଶୁକ୍ଳପକ୍ଷ ଅବସରରେ ସୋମବାର ଦିନ ମନ୍ଦିରର ରୀତିନୀତି ଅନୁଯାୟୀ ଭୋର ୪ଘଟିକାରେ ମଣିବାବାଙ୍କ ପହୁଡ ଫିଟା ହେବା ପରେ ମଙ୍ଗଳ ଆରତୀ, ମହାସ୍ନାନ, ବାଲ୍ୟଭୋଗ ଲାଗି ହେଉଥିବା ବେଳେ ମନ୍ଦିର ଦକ୍ଷିଣ ପାର୍ଶ୍ୱରେ ଥିବା ସିଦ୍ଧମଣ୍ଡପ ଠାରେ ବୁଢାଗଣେଶଙ୍କ ମନ୍ଦିରରେ ଅନୁରୂପ ଭାବେ ସମସ୍ତ ନୀତି ପୂଜା କରାଯାଇଥିଲା । ଦିବା ୧ଘଟିକା ସୁଧା ସମସ୍ତ ସକାଳ ଧୂପ ସରିବା ପରେ ଅପରାହ୍ନ ୪ଘଟିକାରେ ବାବାଙ୍କୁ ଚନ୍ଦନ, ଫୁଲ ଆଦିରେ ବଡସିଂହାର ବେଶରେ ସଜ୍ଜିତ କରାଯିବା ସହ ବିଘ୍ନରାଜ ବୁଢାଗଣେଷଙ୍କୁ ଚନ୍ଦନ ଫୁଲ ଆଦିରେ ଗଜାନନ ବେଶ କରାଯାଇଥିଲା । ପରେ ଘଟ ଉତ୍ତୋଳନ ନିମନ୍ତେ ଘଣ୍ଟାକୀର୍ତ୍ତନ ସହ ଭକ୍ତ ମାନଙ୍କ ହରିବୋଲ ଧ୍ୱନିରେ ଘଟକୁ ମନ୍ଦିର ବେଢା ପ୍ରଦକ୍ଷଣ କରାଯାଇ ପବିତ୍ର ଶିବଗଙ୍ଗା ପୁଷ୍କରିଣୀରେ ବ୍ରାହ୍ମଣମାନଙ୍କ ମନ୍ତ୍ରପାଠରେ ଘଟ ଉତ୍ତୋଳନ କରାଯିବା ପରେ ବୁଢାଗଣେଶଙ୍କ ଆସ୍ଥାନରେ ସ୍ଥାପନ କରାଯାଇ ଷୋଡଶ ଉପଚାର ପୂଜା, ପାର୍ଶ୍ଵ ଦେବତା ପୂଜା, ମହାସ୍ନାନ, ହୋମ, ଆଦି କରାଯାଇଥିଲା । ମନ୍ଦିରର ବହୁ ପୁରୁଖା ସେବାୟତଙ୍କ କହିବା ଅନୁଯାୟୀ ପବିତ୍ର ଗଣେଶ ପୂଜା ପୀଠରେ ଦୀର୍ଘ ୪ଶହ ବର୍ଷ ଧରି ପୂଜା ହୋଇ ଆସୁଥିବା ବେଳେ ଏଠାରେ ଲାଗି ହେଉଥିବା ବିଭିନ୍ନ ପ୍ରକାରର ଭୋଗ ରାଜ୍ୟରେ ଥିବା ଦେବାଦେବୀଙ୍କ ମନ୍ଦିର ଠାରୁ ନିଆରା । ସେହିପରି ପୀଠରେ ବିଭିନ୍ନ ଅନୁଷ୍ଠାନ, ବ୍ୟବସାୟିକ ପ୍ରତିଷ୍ଠାନ, ଶିକ୍ଷାନୁଷ୍ଠାନ, ସ୍ୱାମୀ ବିବେକାନନ୍ଦ ଶିକ୍ଷା କେନ୍ଦ୍ର ଆଦି ସ୍ଥାନରେ ବେଶ ଧୁମ ଧାମରେ ପବିତ୍ର ଗଣେଶ ପୂଜା ପାଳିତ ହେଉଥିବା ବେଳେ ମେଡିକାଲ ଛକସ୍ଥିତ ଗଣେଶ କମିଟି, କଲ୍ୟାଣମଣ୍ଡପସ୍ଥିତ ଗଜାନନ କମିଟି ପକ୍ଷରୁ ବଡବଡ ତୋରଣ କରାଯାଇ ପାଞ୍ଚଦିନ ଧରି ପୂଜା ପାଳିତ କରାଯାଉଥିବା କମିଟି ପକ୍ଷରୁ ଜଣାଯାଇଛି ।

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