पुलवामा की खुनी सड़कें

Root News of India 2019-02-15 09:19:16    EDITORSPICK 8107
पुलवामा की खुनी सड़कें
पुलवामा की खुनी सड़कें

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रूह काँपती, देख के मंजर,

कुकृत्य है उन, गद्दारों का !

कर दूँ धर से, सर अलग,

उन आतंकी, गुनाहगारों का !!

पुलवामा की, खुनी सड़कें,

हम भूल नहीं, कभी पाएँगे !

बस एकबार, कह दें सरकारें,

उनका सर, काटकर लाएँगे !!

घात लगाकर, हमला करते,

कुकर्म है उन, मक्कारों का !

कर दूँ धर से, सर अलग,

उन आतंकी, गुनाहगारों का !!

सिर्फ निंदा का, वक्त नहीं यह,

कुछ निर्णय ठोस, लेना होगा !

पाक प्रायोजित, षड्यंत्र को बँधु,

जवाब करारा, देना होगा !!

आज अभी करना है कर दो,

अब वक्त नहीं, विचारों का !

कर दूँ धर से, सर अलग,

उन आतंकी, गुनाहगारों का !!

रूह काँपती, देख के मंजर,

कुकृत्य है उन, गद्दारों का !

कर दूँ धर से, सर अलग,

उन आतंकी, गुनाहगारों का !!

-अमरेंद्र कुमार तिवारी



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Editorspick

एक था टाइगर.........
Root News of India 2019-06-23 12:23:47
आज अधिक प्रासंगिक है श्यामाप्रसाद मुखर्जी।मुल्क के लिए।कश्मीर के लिए।झारखण्ड के सिंदरी के लिए भी।अगर नेहरूजी उनकी बात मान लेते तो कश्मीर बदहाल न होता।असल जन्नत वहां होती।अगर मोदीजी उनकी राह पर चले होते तो कश्मीर की मौजूदा बदहाली न होती।अगर देश उनको सुना होता तो सिंदरी का कारखाना बन्द नहीं होता।हरित क्रांति होती।किसान आत्महत्या नहीं करते।
तस्वीरों में सैकड़ों पर हक़ीकत में एक भी नहीं पत्रकार नेता !
Root News of India 2019-06-12 17:12:32
-डरते हैं.. जिम्मेदारियों से भागते हैं और विमर्श में दीवालिया हैं यूपी के पत्रकार संगठन
प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था को हजारों सवालों के घेरे में खड़ा कर गया हादसा
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कब कहा किसी को मिला दे ये ईश्वर का खेल है समय से बड़ा कोई नही बलवान
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ग्वालियर, 26 अप्रैल (आरएनआई) | समय चुनाव का है, तो थोड़ी राजनीतिक बात जरूरी है। आज अधिकांश लोगों को खुलकर समर्थन और विरोध करना चाहिये किसी ना किसी पार्टी, उम्मीदवार का ताकि गवाही रहे कि देश में लोकतांत्रिक मूल्य और गणतांत्रिक व्यवस्था बनी रही है आज तक।
आकाश छूती स्त्रियां
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वैशाली, 28 मार्च (आरएनआई) | महिला सशक्तिकरण के तमाम दावे और योजनाओं के बावजूद महिलाओं पर एक तरफ हत्या ,बलात्कार ,उत्पीड़न का कहर बरप रहा है ।दशकों से 33फीसदी महिला आरक्षण का मामला अधर में लटका पड़ा है ।आश्चर्यजनक बात तो ये है कि भारत की तमाम राजनीतिक पार्टियाँ स्वयं को आधी आबादी की हित चिंतक और हितैषी घोषित करती है ।इतना ही नहीं पुरुष मानसिकता पोषित इस समाज में स्त्री की चेतना ,ताकत और संकल्प को कम करने की हजार तरकीबें तलाशी जाती है। स्त्री को बंधुआ मजदूर के रुप में देखने की आदत सी हो गयी है यहाँ लोगों को ।सुरक्षा, रोटी, कपड़ा और सम्मान के नाम पर उसे बच्चा जनने की मशीन और भाव संवेदना से रहित बुत बनाने की जो कवायद सदियों पहले शुरु की गयी वह आज तक नये नये संशोधित रुपों में जारी है ।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं
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लखनऊ, 8 मार्च (आरएनआई) | भारतीय संस्कृति में नारी के सम्मान को बहुत महत्त्व दिया जाता है, भारतीय संस्कृत कहती है कि जहां पर नारी का सम्मान है वहां पर नारी की पूजा होती है वहां पर देवता निवास करते हैं
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जहरीला जहर
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शाहजहांपुर, 10 फरवरी (आरएनआई)। गत दिनों उत्तर प्रदेश के सहारनपुर तथा उत्तराखंड में जहरीली शराब पी लेने से कई लोगों की मौत हो जाने की दुखद खबर सामने आई वैधानिक चेतावनी से लेकर चिकित्सक आदि सभी सचेत करते रहते हैं कि शराब एक प्रकार का जहर है वह भले ही इथाइल अल्कोहल क्यों ना हो शरीर के लिए तो हानिकारक है इसमें बगैर मिलावट के सेवन से तो घर के घर नष्ट हो जाते हैं सामाजिक विकृतियों चारों ओर चीखते चिल्लाते घूमती हैं बच्चे अशिक्षित रह जाते हैं परिवार उजड़ जाते हैं फिर भी समाज के का एक बड़ा वर्ग मदिरा सेवन को स्टेटस मान रहा है वह अच्छे और विपरीत सभी अवसरों पर मदिरा को आइकन मान बैठा है ऐसे में धन की लिप्सा पैदा होना स्वाभाविक है
पत्रकारिता की सिमटती परिभाषा को बचाना होगा
Anand Mohan Pandey 2019-02-09 13:29:58
शाहजहांपुर, 9 फरवरी (आरएनआई)। आजकल कलम का चलना या कहें पत्रकारिता की परिभाषा राजनेताओं और कार्यपालिका की गणेश परिक्रमा करती हुई नजर आ रही है या यह कहें कि राजनेताओं और कार्यपालिका की धुन पर थिरक रही है तथा आमजन के सामने वही परोस रही है जो भी राजनेता तथा अधिकारीगण चाहते हैं आम जनता के दुख को और उनकी समस्याओं को समस्या का ही रूप देकर एक कोने में समेटने की आदत सी बन चुकी है आज की पत्रकारिता में ।कभी-कभी कलम इन दोनों पक्षों की ओर से बहस भी करने लगती है जिसका परिणाम यह होता है कि कलम अपना स्वधर्म एवं संतुलन खो बैठती है तथा पत्रकारिता की गरिमा का क्षरण होना तथा अविश्वास में वृद्धि होना अनिवार्य हो जाता है हां एक पक्ष समाज की तरफ से भी अपूर्ण रहा है कि वह यह है कि पीड़ित पत्रकार या पत्रकारिता से अपेक्षाएं तो बहुत करता है किंतु सामने आने को तैयार नहीं होता सभी चाहते हैं कि देश और समाज सोने की चिड़िया हो जाए लेकिन आग में सोने को तपाए कौन जिससे कि वह चिड़िया बन सके फिलहाल केवल पत्रकार और पत्रकारिता पर प्रश्न उठाना न्याय पूर्ण नहीं होगा क्योंकि वर्तमान में आमजन क्या पढ़ना देखना पसंद करता है इसका विश्लेषण करना भी आवश्यक है प्रेमचंद माखनलाल चतुर्वेदी महावीर प्रसाद द्विवेदी और गणेश शंकर विद्यार्थी तथा मदन मोहन मालवीय जी जैसे पत्रकारिता के काल जय स्तंभों का क्या स्थान रह गया है यह तो श्रष्टि निर्माता ही जाने तमाम तरह के संतुलन को बनाए रखने के लिए पत्रकारिता की परिभाषा को सिमटने से बचाना होगा
सुधार के पथ पर अग्रसर बच्चा जेल
Anand Mohan Pandey 2019-01-12 18:08:02
खुटार/शाहजहांपुर, 12 जनवरी (आरएनआई)। स्थानीय बच्चा जेल इधर कुछ दिनों से सुधार के पथ पर अग्रसर है। कभी सैकड़ों की संख्या से भरी रहने वाली इस जेल में अब निरन्तर बच्चों की संख्या में कमी आती जा रही है। इसका कारण यदि जेल के स्टाफ को दिया जाये तो कोई अतिस्योक्ति नहीं होगी क्योकि वर्तमान समय में जेल में मौजूद बच्चों के खान पान व स्वास्थ्य तथा खेल कूद के लिए जो व्यवस्थायें हैं। उन्हे पर्याप्त ही कहा जायेगा। जेल प्रबन्धन ने बताया कि बच्चों के खान पान वस्त्रों व खेल कूद की यहां समुचित व्यवस्था है और बच्चे भी व्यवस्था से पूर्ण रूप से संतुष्ट हैं। लेकिन बच्चों की पढ़ाई के लिए शिक्षकों का अभाव होना बच्चों के हित में नहीं है। दो वर्ष के अथक प्रयासों के बाद बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा एक शिक्षक उपलब्ध कराया गया है। जो बच्चों को पढ़ा रहे हैं। जबकि यहां शिक्षकों के दो पद श्रृजित हैं। किन्तु दोनों पद पर नियुक्ति न होने से हमें बेसिक शिक्षा विभाग से मजबूरी में एक अध्यापक मांगना पड़ा। बच्चों ने भी जेल की व्यवस्था में संतुष्टि दर्शाते हुये कहा कि हमें यहां कोई परेशानी नहीं है।
भीषण गंदगी से सरावोर खुटार का बुद्धा पार्क
Anand Mohan Pandey 2019-01-10 16:25:22
शाहजहांपुर, 10 जनवरी (आरएनआई)। राजनीतिक शिकार के कारण खुटार के बुद्धा पार्क में राजकीय इण्टर कालेज का निर्माण नही हो सका है नेता चाहते तो अब तक जनता को लाभ मिलने लगते चुनाव के समय नेता जनता को झूठे वायदे देकर वोट लेता है। चुनाव जीतने के बादफिर पीछे मुडकर नही देखता हैखुटार पुवायां रोड पर स्थित बुद्धा पार्क में भीषण गंदगी का साम्राज्य वना हुआ है इसकी साफ सफाई पर सरकार करोडो रूपये देने के वावजूद समस्या जस की तस बनी हुई हैयह पार्क ग्राम सभा रसवां कलां के अर्न्तगत आता है किन्तु ग्राम प्रधान जानवूझ कर इसकी सफाई नही करा रहै है इस पार्क मे बाबा भीमराव अम्वेडकर की वसपा सरकार के दौरान मूर्ति स्थापित करायी गयी थी कई एकड की भूमि पर बनाया गया पार्क जिसमें अभी तक इसके सौन्दर्यकरण कराने के लिए प्रशासन द्धारा कोई भी प्रयास न किए जाने से यहां पर लम्बी लम्बी धास उगी है सरकार धार्मिक स्थलो व पार्को व तालाबो के रख रखाव के लिए करोडो रूपये खर्च कर रही है ग्राम प्रधान व सचिव ने अभी तक इसमें उगी धास को सफाई कराने के कोई प्रयास तक नही किए जाने से भीषण गंदगी का साम्राज्य है नागरिको ने इस पार्क में राजकीय इन्टर कालेज खोलने के लिए सरकार से कई बार मांग करने के वावजूद अमल नही किया है इतना ही नही क्षेत्र के विधायक व सांसद ने भी इस भूमि का न तो सौन्दर्यकरण कराने का प्रयास ही किया है और ना ही इसमें स्कूल कालेज खोलवाने का प्रयास ही किया है इस भूमि पर स्कूल कालेज खुलने से क्षेत्र की जनता को इसका लाभ मिलता खाली पडी भूमि पर अराजक तत्वो का जमाव वाडा बना रहता है तथा यहां पर मबेशी भी बने रहते है जिला प्रशासन की अनदेखी के कारण भी बुद्धा पार्क अपनी वदहाली पर आंसू बहा रहा है इस पार्क में अभी तक इसके रख रखाव के लिए व्लाक से लेकर जिले तक के अधिकारियो की उदासीनता के कारण इस पर अमल नही किया गया हैै सरकार चाहे तो इस जगह पर इण्टर कालेज का निर्माण कराकर जनता को लाभ दिला सकता है जब बसपा सरकार में यह भूमि पर बाबा की प्रतिमा स्थापित की जा सकती है तो भाजपा सरकार में यहां पर कालेज खुलवाया जा सकता है किन्तु नगर के भाजपा नेता नही चाहते इस पर कालेज का निर्माण हो ऐसे नगर बिकास मंत्री को जनता क्या करे जब अपने क्षेत्र के पार्को का बिकास अधूरा है
विगत चार साल
Root News of India 2018-12-30 19:52:10
विगत चार साल ! राज्य खस्ता हाल !!
वन्य जीवो के प्रति संवेदनशील होना होगा हमें
Anand Mohan Pandey 2018-12-23 13:06:52
शाहजहांपुर, 23 दिसंबर (आरएनआई)। गत दिनों जनपद के खुटार क्षेत्र में बाघ ने एक व्यक्ति को अपना शिकार बना दिया इससे पूर्व भी ऐसी घटनाएं सामने आई थी नुकसान भी हुआ था जो चिंताजनक है प्रश्न है कि वन्यजीवों का आबादी की ओर रुख क्यों हो रहा है ऐसा तो नहीं कि हम उसके आवासीय क्षेत्र में दखल देने लगे हैं जब ऐसी दुखद घटनाएं होती हैं तो प्रशासन पुलिस तथा वन विभाग तथा अन्य विभाग सक्रिय हो जाते हैं इसे एक प्रकार की आपदा मानकर उसका हल और रेस्क्यू चलाया जाता है किंतु थोड़े दिनों के बाद स्थिति फिर ढाक के तीन पात हो जाती है हम अपना आत्म मूल्यांकन करना भूल जाते हैं जिसका परिणाम होता है ऐसी घटनाओं का बार-बार घटित होना तथा जन एवं जीव की हानि
प्रसून वाले 'मास्टर स्ट्रोक' के गायब सिग्नल की तरह अब अंबानी का जियो मरने लगा !
Root News of India 2018-12-19 20:51:32
नई दिल्ली, 19 दिसंबर (आरएनआई)। अभी चर्चाएं शुरू नहीं हुई हैं। बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी। मीडिया को मुट्ठी में लेने वाली सियासी ताकतों की तरह अब अंबानी ग्रुप ने देश की हलचलों को अपनी मुट्ठी में ले लिया है। हुकूमत के बचाव की सियासत में इंटरनेट की दुनिया में वन टू का फोर करने वाली ताकतें फोर टू का वन करने लगी हैं। मेरा ये शक आपके यकीन में बदल सकता है। इसके लिए पूरा माजरा समझये-
सुख सुविधा से दूर कर्तव्य के बोझ से कराहती खाकी 
Laxmi Kant Pathak 2018-11-30 17:56:06
हरदोई, 30 नवंबर (आरएनआई)। आम नागरिक से लेकर अधिकारी राजनेता  तक खाकी के सहारे अपनी सम्पत्ति ,अपना जीवन की सुरक्षा के लिये हर समय दिन रात घर से बाहर गांव नगर मे कराने की अपेक्षा रखते है और कराते भी है। वही दूसरी ओर खाकी पर ही नेता मन्त्री अपना रोब भी गाठते देखे जा सकते है। सरकारी अमले मे यदि देखा जाय तो सबसे ज्यादा पुलिस की जिम्मेदारी ही दिखाई देती है चाहे यातायात सचालन हो या दंगा नियन्त्रण ,अपराध नियन्त्रण ,सभी की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी इन्ही पुलिसकर्मियों के कन्धे पर है।रात हो चाहे दिन सडक चौराहों पर पुलिसकर्मियों की गाडियां व सिपाही दिखाई देते है।लेकिन समाज मे इन खाकी धारियों को कभी भी सम्मान की द्रष्टि से नही देखा जा सका है।पुलिस जैसा विभाग जिसके कन्धे पर पूरे राष्ट्र की आन्तरिक सुरक्षा का भार रखकर भी इसी खाकी को जनता के लोगो को कोसते देखा जा सकते है। सबसे मजे की बात तो यह है इन्ही पुलिसकर्मियों व पुलिस अधिकारियों की सिक्योरिटी के बीच राजनेता भी खाकी पर रौब गालिब करना अपना अधिकार मानते है।लेकिन किसी ने यह जानने का प्रयास नही किया कि पुलिस की नौकरी मे आकर इन पुलिसकर्मियों व अधिकारियों को कितने दबाव मे काम करना पड रहा है।अपने कर्तव्य निर्वहन मे कितना दबाव होता है इनको सुख सुविधाएं कितनी मिल रही है।इनको खाना कैसे मिल रहा है।काम के घन्टे कितने है।इनको नीद की जरूरत है कि नही इन बातो पर कभी भी हमारे देश की सरकारों ने बिचार नही किया।केवल खाकी को दोषारोपण कर अपनी राजनैतिक रोटियां सेकने के अलावा कुछ नही है। यदि पुलिस की डयूटी तय कर जरा सा भार कम कर देखा जाय तो शायद ही देश के किसी हिस्से मे अपराध या अपराधी बचा रह जाय।
अयोध्या के अखाड़े में हिन्दुत्व की विरासत पर जंग
Root News of India 2018-11-24 11:43:32
भाजपा बनाम शिव सेना
एक बुलंद शख्सियत की मालिक थी इंदिरा गांधी
Rama Shanker Prasad 2018-11-18 16:02:57
इंदिरा गांधी का जन्म 19 नवंबर 1917 को इलाहाबाद में हुुआ था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी एक निडर नेता थीं जिन्होंने कई बार ऐसे साहसी फैसले लिए, पूरे देश को लाभ मिला और उनके कुछ ऐसे भी निर्णय रहे जिनका उन्हें राजनीतिक खामियाजा भुगतना पड़ा लेकिन उनके प्रशंसक और विरोधी, सभी यह मानते हैं कि वह कभी फैसले लेने में पीछे नहीं रहती थीं। जनता की नब्ज समझने की उनमें विलक्षण क्षमता थी। स्वर्गीय गांधी आपातकाल की घोषणा, लोकनायक जयप्रकाश नारायण तथा प्रमुख विपक्षी नेताओं को जेल में डालना, ऑपरेशन ब्लू स्टार जैसे कुछ निर्णयों के कारण उन्हें काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
योगी के रामराज्य मे भी महिला अस्मिता सुरक्षित नही
Root News of India 2018-11-18 07:24:00
लखनऊ, 18 नवंबर (आरएनआई)। भारत जैसा विशाल राष्ट्र जहाँ यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता जैसी सस्कृति पुष्पित पल्लवित होती रही है।इसी की दम पर भारत विश्व के क्षितिज पर विश्व गुरु बना रहा है।लेकिन हम जैसे ही भाषिक द्रष्टि से बडबोलेपन का शिकार होकर पाश्चात्य सभ्यता की ओर उन्मुख हुये वैसे ही महिला अस्मिता तार तार होने लगी। भारत के उत्थान मे महिलाओं के योगदान को नकारा नही जा सकता। उत्पादन के क्षेत्र मे,युद्ध के क्षेत्र मे ,सामाजिकता के क्षेत्र मे महिलाओं की महती भूमिका रही है। इतिहास गवाह है कि महिलाओं की वजह से ही भारत का गर्वोगत भाल विश्व क्षितिज पर चन्द्रमा की भातिं चमकता रहा है। भारत मे पाश्चात्य सभ्यता अपनाने की होड ने महिलाओं को पीछे की पंक्ति मे ढकेल दिया।और अपने  को  सभ्य और सुंंसस्क्रत मानने लगे।भारत मे आज महिलाओं की बडी ही दीन दशा दिखाई पड रही है। आये दिन छेडछाड, यौन उत्पीड़न के सैकडो केस सामने आ रहे है। सरकार केवल बयान वाजी कर अपने कर्तव्य की इति श्री कर ले रही है।देश मे जब कोई बडी घटना होती है तो बडे बडे तिजारती ऊचे ऊचे मंचो से घडियाली आसूं बहाते दिखाई देते है।कैडिल मार्च का आवाहन कर भोली भाली जनता को गुमराह कर अपनी राजनैतिक रोटियाँ सेकने से बाज नही आते। ऐसे मे यह प्रश्न ऊठना लाजिमी है कि आखिर इन घटनाओं पर रोक क्यो नही लगती। या तो सरकार ऐसी घटनाओं को रोकना नही चाहती या अपराधियों के दबाव मे रोक नही पा रही है। भारत मे खादीधारी महिलाओं के प्रति कितना सवेदनहीन है इसकी बानगी गत बर्ष पेश करते हुये समाजवादी पार्टी के मुखिया व पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिह यादव ने कहा था कि लडको से गलतियां हो ही जाती है। जिसकी चहुँ ओर निन्दा हुई थी। बर्तमान मे उप्र मे भाजपा सरकार मे योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री है जिन्होंने ने महिलाओं की अस्मिता के रक्षार्थ एन्टी रोमियो स्क्वायड बना डाली लेकिन यह टीम भी महिलाओं को सुरक्षा न दे सकी।प्रदेश के किसी स्कूल ,कालेज,बाजार, रेलवेस्टेशन, बस अड्डा पर देख लीजिए महिलाओं की अस्मिता पर सकट के बादल छाये नजर आयेगे।इसी सरकार मे उन्नाव, मुजफ्फरनगर ,जैसे काण्ड हो गये।देवरिया सुधार ग्रह मे यौन उत्पीड़न का सबसे लेटेस्ट उदाहरण है। सरकार केवल बयान देकर अपना पल्ला झाड लेती है। ऐसे मे देश के प्रसिद्ध कवि रहे मैथलीशरण गुप्त की पक्तियां "अबला तेरे जीवन की है यही कहानी ।आंचल मे है दूध और आंंखो मे पानी"आज भी कितना प्रासंगिक है।
मौलाना अबुल कलाम आजाद : भारतीय राजनीति एवं नव भारत निर्माण का महान व्यक्तित्व
Anand Mohan Pandey 2018-11-10 13:01:26
शाहजहांपुर, 10 नवंबर (आरएनआई)। मानवता और राष्ट्रीयता के आकाश में स्थित् दैदीप्यमान नक्षत्रों में मौलाना अबुल कलाम आजाद का नाम अमर है वह कुशल राजनीतिज्ञ शिक्षाविद पत्रकार एवं राष्ट्रीय समरसता के पक्षधर तथा राष्ट्र को समर्पित नेता थे उनका जन्म 11 नवंबर 1888 को पवित्र नगर मक्का में हुआ था इनकी प्रारंभिक शिक्षा घर पर ही तथा परंपरागत परिवेश में हुई थी इनके पिता मौलाना खैरूद्दीन अरबी भाषा के विद्वान थे यह प्रारंभ से ही प्रखर बुद्धि के थे तथा भाषा एवं मानवीय मूल्यों को प्राथमिकता देने वाले थे आगे चलकर इनका झुकाव वैज्ञानिक शिक्षा की ओर होता गया जहां तक भाषाओं का ताल्लुक है मौलाना साहब अरबी फारसी हिंदी उर्दू अंग्रेजी तथा बंगला आदि भाषाओं के विद्वान थे वर्ष 1890 में मौलाना साहब का परिवार भारत आकर कोलकाता में रहने लगा कुछ समय बाद मौलाना अबुल कलाम आजाद भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में सम्मिलित हो गए तथा 1905 में बंगाल विभाजन का विरोध किया उन्होंने मात्र 12 वर्ष की उम्र में प्रथम पत्रिका नेरंग आलम का संपादन किया इसके बाद तो संपादन और पत्रकारिता का सिलसिला आगे बढ़ता ही गया वर्ष 1912 में मौलाना साहब ने उर्दू का साप्ताहिक समाचार पत्र अल हिलाल का प्रकाशन और संपादन किया जिसका मिशन था राष्ट्रीय एकता और भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को जागृत करना तथा मार्गदर्शन करना मौलाना साहब महात्मा गांधी के आंदोलन में सक्रिय भागीदार रहे इसके लिए उन्हें अंग्रेजों का कोप भाजन भी बनना पड़ा और जेल की सजा भुगतनी पड़ी जहां तक राजनीतिक दल का प्रश्न है वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े रहे तथा कांग्रेस के दो बार प्रेसिडेंट भी बने अब्दुल कलाम साहब सबसे कम उम्र के कांग्रेस प्रेसिडेंट रहे भारत की स्वतंत्रता के पश्चात उन्हें नेहरू जी के मंत्रिमंडल में भारत का प्रथम शिक्षा मंत्री बनाया गया और वह 10 वर्षों तक शिक्षा मंत्री रहे वे सदैव एकता और राष्ट्र कल्याण को प्राथमिकता देते थे कलाम साहब वैज्ञानिक दृष्टिकोण से नवीन एवं सर्व शिक्षा व्यवस्था को स्थापित करने का प्रयत्न करते थे और उसे अपना लक्ष्य मानते थे यूजीसी आईआईटी तथा ललित कला एकेडमी की स्थापना उन्हीं के प्रयत्नों का परिणाम है वह शिक्षा सशक्त संपन्न और एकता के सूत्र में बंधा भारत देखना चाहते थे 22 फरवरी 1958 को काल के क्रूर हाथों ने उन्हें हमसे छीन लिया और वे विराट कायनाथ का हिस्सा बनकर आज भी हमारा मार्गदर्शन कर रहे हैं

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