बसन्त पंचमी 10 फरवरी विशेष

Laxmi Kant Pathak 2019-02-09 17:32:40    MEDITATION 8614
बसन्त पंचमी 10 फरवरी विशेष
मुुुम्बई, 9 फरवरी (आरएनआई)। प्रणो देवी सरस्वती वाजेभिर्वजिनीवती धीनामणित्रयवतु।*

अर्थात ये परम चेतना हैं। सरस्वती के रूप में ये हमारी बुद्धि, प्रज्ञा तथा मनोवृत्तियों की संरक्षिका हैं। हममें जो आचार और मेधा है उसका आधार भगवती सरस्वती ही हैं। इनकी समृद्धि और स्वरूप का वैभव अद्भुत है। पुराणों के अनुसार श्रीकृष्ण ने सरस्वती से ख़ुश होकर उन्हें वरदान दिया था कि वसंत पंचमी के दिन तुम्हारी भी आराधना की जाएगी और यूं भारत के कई हिस्सों में वसंत पंचमी के दिन विद्या की देवी सरस्वती की भी पूजा होने लगी जो कि आज तक जारी है।

बसंत पंचमी की तिथि पूजा विधि, शुभ मुहूर्त व महत्व

पंचमी तिथि अारंभ  9/फरवरी/2019 को 12.25 बजे से

पंचमी तिथि समाप्त 10/फरवरी/2019 को 14.08 बजे तक

बसन्त पंचमी कथा

सृष्टि के प्रारंभिक काल में भगवान विष्णु की आज्ञा से ब्रह्मा ने जीवों, खासतौर पर मनुष्य योनि की रचना की। अपनी सर्जना से वे संतुष्ट नहीं थे। उन्हें लगता था कि कुछ कमी रह गई है जिसके कारण चारों ओर मौन छाया रहता है। विष्णु से अनुमति लेकर ब्रह्मा ने अपने कमण्डल से जल छिड़का, पृथ्वी पर जलकण बिखरते ही उसमें कंपन होने लगा। इसके बाद वृक्षों के बीच से एक अद्भुत शक्ति का प्राकट्य हुआ। यह प्राकट्य एक चतुर्भुजी सुंदर स्त्री का था जिसके एक हाथ में वीणा तथा दूसरा हाथ वर मुद्रा में था। अन्य दोनों हाथों में पुस्तक एवं माला थी। ब्रह्मा ने देवी से वीणा बजाने का अनुरोध किया। जैसे ही देवी ने वीणा का मधुरनाद किया, संसार के समस्त जीव-जन्तुओं को वाणी प्राप्त हो गई। जलधारा में कोलाहल व्याप्त हो गया। पवन चलने से सरसराहट होने लगी। तब ब्रह्मा ने उस देवी को वाणी की देवी सरस्वती कहा। सरस्वती को बागीश्वरी, भगवती, शारदा, वीणावादनी और वाग्देवी सहित अनेक नामों से पूजा जाता है। ये विद्या और बुद्धि प्रदाता हैं। संगीत की उत्पत्ति करने के कारण ये संगीत की देवी भी हैं। बसन्त पंचमी के दिन को इनके जन्मोत्सव के रूप में भी मनाते हैं। ऋग्वेद में भगवती सरस्वती का वर्णन करते हुए कहा गया है-

बसंत पंचमी भारतीय संस्कृति में एक बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला त्यौहार है जिसमे हमारी परम्परा, भौगौलिक परिवर्तन , सामाजिक कार्य तथा आध्यात्मिक पक्ष सभी का सम्मिश्रण है, हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी का त्यौहार मनाया जाता है वास्तव में भारतीय गणना के अनुसार वर्ष भर में पड़ने वाली छः ऋतुओं (बसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत, शिशिर) में बसंत को ऋतुराज अर्थात सभी ऋतुओं का राजा माना गया है और बसंत पंचमी के दिन को बसंत ऋतु का आगमन माना जाता है इसलिए बसंत पंचमी ऋतू परिवर्तन का दिन भी है जिस दिन से प्राकृतिक सौन्दर्य निखारना शुरू हो जाता है पेड़ों पर नयी पत्तिया कोपले और कालिया खिलना शुरू हो जाती हैं पूरी प्रकृति एक नवीन ऊर्जा से भर उठती है।

बसंत पंचमी को विशेष रूप से सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है यह माता सरस्वती का प्राकट्योत्सव है इसलिए इस दिन विशेष रूप से माता सरस्वती की पूजा उपासना कर उनसे विद्या बुद्धि प्राप्ति की कामना की जाती है इसी लिए विद्यार्थियों के लिए बसंत पंचमी का त्यौहार बहुत विशेष होता है।

बसंत पंचमी का त्यौहार बहुत ऊर्जामय ढंग से और विभिन्न प्रकार से पूरे भारत वर्ष में मनाया जाता है इस दिन पीले वस्त्र पहनने और खिचड़ी बनाने और बाटने की प्रथा भी प्रचलित है तो इस दिन बसंत ऋतु के आगमन होने से आकास में रंगीन पतंगे उड़ने की परम्परा भी बहुत दीर्घकाल से प्रचलन में है।

बसंत पंचमी के दिन का एक और विशेष महत्व भी है बसंत पंचमी को मुहूर्त शास्त्र के अनुसार एक स्वयं सिद्ध मुहूर्त और अनसूज साया भी माना गया है अर्थात इस दिन कोई भी शुभ मंगल कार्य करने के लिए पंचांग शुद्धि की आवश्यकता नहीं होती इस दिन नींव पूजन, गृह प्रवेश, वाहन खरीदना, व्यापार आरम्भ करना, सगाई और विवाह आदि मंगल कार्य किये जा सकते है।

माता सरस्वती को ज्ञान, सँगीत, कला, विज्ञान और शिल्प-कला की देवी माना जाता है।

भक्त लोग, ज्ञान प्राप्ति और सुस्ती, आलस्य एवं अज्ञानता से छुटकारा पाने के लिये, आज के दिन देवी सरस्वती की उपासना करते हैं। कुछ प्रदेशों में आज के दिन शिशुओं को पहला अक्षर लिखना सिखाया जाता है। दूसरे शब्दों में वसन्त पञ्चमी का दिन विद्या आरम्भ करने के लिये काफी शुभ माना जाता है इसीलिये माता-पिता आज के दिन शिशु को माता सरस्वती के आशीर्वाद के साथ विद्या आरम्भ कराते हैं। सभी विद्यालयों में आज के दिन सुबह के समय माता सरस्वती की पूजा की जाती है।

वसन्त पञ्चमी का दिन हिन्दु कैलेण्डर में पञ्चमी तिथि को मनाया जाता है। जिस दिन पञ्चमी तिथि सूर्योदय और दोपहर के बीच में व्याप्त रहती है उस दिन को सरस्वती पूजा के लिये उपयुक्त माना जाता है। हिन्दु कैलेण्डर में सूर्योदय और दोपहर के मध्य के समय को पूर्वाह्न के नाम से जाना जाता है।

ज्योतिष विद्या में पारन्गत व्यक्तियों के अनुसार वसन्त पञ्चमी का दिन सभी शुभ कार्यो के लिये उपयुक्त माना जाता है। इसी कारण से वसन्त पञ्चमी का दिन अबूझ मुहूर्त के नाम से प्रसिद्ध है और नवीन कार्यों की शुरुआत के लिये उत्तम माना जाता है।

वसन्त पञ्चमी के दिन किसी भी समय सरस्वती पूजा की जा सकती है परन्तु पूर्वाह्न का समय पूजा के लिये श्रेष्ठ माना जाता है। सभी विद्यालयों और शिक्षा केन्द्रों में पूर्वाह्न के समय ही सरस्वती पूजा कर माता सरस्वती का आशीर्वाद ग्रहण किया जाता है।

नीचे सरस्वती पूजा का जो मुहूर्त दिया गया है उस समय पञ्चमी तिथि और पूर्वाह्न दोनों ही व्याप्त होते हैं। इसीलिये वसन्त पञ्चमी के दिन सरस्वती पूजा इसी समय के दौरान करना श्रेष्ठ है।

सरस्वती, बसंतपंचमी पूजा

1. प्रात:काल स्नाना करके पीले वस्त्र धारण करें।

2. मां सरस्वती की प्रतिमा को सामने रखें तत्पश्चात कलश स्थापित कर प्रथम पूज्य गणेश जी का पंचोपचार विधि पूजन उपरांत सरस्वती का ध्यान करें

ध्यान मंत्र

या कुन्देन्दु तुषारहार धवला या शुभ्रवस्त्रावृता।

या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना ।।

या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।

सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा ।।

शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमांद्यां जगद्व्यापनीं ।

वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यांधकारपहाम्।।

हस्ते स्फाटिक मालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम् ।

वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्।।2।।

3. मां की पूजा करते समय सबसे पहले उन्हें आचमन व स्नान कराएं।

4. माता का श्रंगार कराएं ।

5. माता श्वेत वस्त्र धारण करती हैं इसलिए उन्हें श्वेत वस्त्र पहनाएं।

6. प्रसाद के रुप में खीर अथवा दुध से बनी मिठाईयों का भोग लगाएं।

7. श्वेत फूल माता को अर्पण करें।

8. तत्पश्चात नवग्रह की विधिवत पूजा करें।

बसंत पंचमी पर मां सरस्वती की पूजा के साथ सरस्वती चालीसा पढ़ना और कुछ मंत्रों का जाप आपकी बुद्धि प्रखर करता है। अपनी सुविधानुसार आप ये मंत्र 11, 21 या 108 बार जाप कर सकते हैं।

निम्न मंत्र या इनमें किसी भी एक मंत्र का यथा सामर्थ्य जाप करें

1. सरस्वती महाभागे विद्ये कमललोचने

विद्यारूपा विशालाक्षि विद्यां देहि नमोस्तुते॥

2. या देवी सर्वभूतेषू, मां सरस्वती रूपेण संस्थिता।

नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।

3. ऐं ह्रीं श्रीं वाग्वादिनी सरस्वती देवी मम जिव्हायां।

सर्व विद्यां देही दापय-दापय स्वाहा।।

4. एकादशाक्षर सरस्वती मंत्र

ॐ ह्रीं ऐं ह्रीं सरस्वत्यै नमः।

ज्योतिष सेवा केंद्र मुंबई संस्थापक पंडित अतुल शास्त्री 






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ଶ୍ରୀରାମ ନବମୀ ମହୋତ୍ସବ : ଶୋଭାଯାତ୍ରାରେ ୬୦ରୁ ଊର୍ଦ୍ଧ୍ୱ ମେଢ଼ ସାମିଲ
Laxmikanta Nath 2019-04-14 12:26:37
ଭଦ୍ରକ : ଭଦ୍ରକର ପ୍ରସିଦ୍ଧ ଶ୍ରୀରାମ ନବମୀ ମହୋତ୍ସବ ପାଇଁ ଶନିବାର ଗାନ୍ଧୀପଡ଼ିଆ ସମେତ ସହର ପରିବେଶ ଲୋକାରଣ୍ୟ ହୋଇପଡ଼ିଥିଲା । ବିଭିନ୍ନ ଅଞ୍ଚଳରୁ ଲକ୍ଷାଧିକ ଭକ୍ତଙ୍କ ସମାଗମ ହୋଇଥିଲା । ଲୋକ ମହୋତ୍ସବ ଭାବେ ପରିଗଣିତ ଶ୍ରୀରାମ ନବମୀ ସମାରୋହରେ କଡ଼ା ସୁରକ୍ଷା ବ୍ୟବସ୍ଥା ମଧ୍ୟରେ ବିଶାଳ ନଗର ସଂକୀର୍ତ୍ତନ ଶୋଭାଯାତ୍ରା ବାହାରିଥିଲା । ଏଥରେ ୬୦ରୁ ଊର୍ଦ୍ଧ୍ୱ ସୁସଜ୍ଜିତ ମେଢ଼ ସାମିଲ ହୋଇଥିଲେ । ପୌରାଞ୍ଚଳରେ ବିଭିନ୍ନ ସାହି, ବସ୍ତି ସମେତ ଜିଲାର ବିଭିନ୍ନ ବ୍ଲକରୁ ସୁସଜ୍ଜିତ ମେଢ଼ ବାହାରି ଶୋଭାଯାତ୍ରାକୁ ଆସିଥିଲେ । ଅପରାହ୍ନ ସାଢ଼େ ୩ଟାରୁ ନୃତ୍ୟ, ବାଦ୍ୟ, ସଂକୀର୍ତ୍ତନ ସାଙ୍ଗକୁ ସାଂସ୍କୃତିକ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମ ମଧ୍ୟରେ ଶୋଭାଯାତ୍ରା ଆରମ୍ଭ ହୋଇ ବିଳମ୍ବିତ ରାତି ପର୍ଯ୍ୟନ୍ତ ଚାଲିଥିଲା । ନୃତ୍ୟ ଓ ବାଦ୍ୟରେ ସହରର ସବୁ ରାସ୍ତାଘାଟ ଦୁଲୁକି ଉଠିଥିଲା । ଶୋଭାଯାତ୍ରାକାରୀମାନେ ସହର ପରିକ୍ରମା କରି ଗାନ୍ଧୀପଡ଼ିଆରେ ପହଞ୍ଚିବା ପରେ ଏହା ଉଦ୍‌ଯାପିତ ହୋଇଥିଲା । ଏଥିସହ ଶ୍ରୀରାମ ମହାଯଜ୍ଞ ସମିତି ପକ୍ଷରୁ ଗାନ୍ଧୀପଡ଼ିଆରେ ୭ ଦିନ ବ୍ୟାପୀ ଚାଲିଥିବା ଐତିହାସିକ ଶ୍ରୀରାମ ମହାଯଜ୍ଞର ପୂର୍ଣ୍ଣାହୁତି ଦିଆଯାଇଥିଲା । ଶ୍ରୀରାମ ନବମୀ ପୂଜାର୍ଚ୍ଚନା ଦେଖିବା ସକାଶେ ଭକ୍ତଙ୍କ ଭିଡ଼ ଜମିବାରୁ ଗାନ୍ଧୀପଡ଼ିଆ ପରିସର ଲୋକାରଣ୍ୟ ହୋଇପଡ଼ିଥିଲା । ସହରର ଟ୍ରାଫିକ ନିୟନ୍ତ୍ରଣ ସାଙ୍ଗକୁ ଶାନ୍ତିଶୃଙ୍ଖଳା ରକ୍ଷା ଲାଗି ବ୍ୟାପକ ପୋଲିସ ମୁତୟନ କରାଯାଇଥିଲା । ପାଗ ଅନୁକୂଳ ଥିବାରୁ ଲକ୍ଷାଧିକ ଭକ୍ତ ବିଭିନ୍ନ କାର୍ଯ୍ୟକ୍ରମରେ ଉତ୍ସାହର ସହିତ ସାମିଲ ହୋଇଥିଲେ । ଶାନ୍ତିଶୃଙ୍ଖଳା ରକ୍ଷା ପାଇଁ କଡ଼ା ସୁରକ୍ଷା ବ୍ୟବସ୍ଥା ଗ୍ରହଣ କରାଯାଇଥିଲା । ଜିଲା ଆରକ୍ଷୀ ଅଧୀକ୍ଷକ ରାଜେଶ ପଣ୍ଡିତଙ୍କ ତତ୍ତ୍ବାବଧାନରେ ୨ ଜଣ ଅତିରିକ୍ତ ଏସ୍‌ପି, ୧୦ ଡିଏସ୍‌ପି, ୨୬ ଇନ୍ସପେକ୍ଟର, ୧୩୨ ସବ୍‌ଇନ୍ସପେକ୍ଟରଙ୍କ ସମେତ ଏଏସ୍‌ଆଇ, ୫୦ ପ୍ଲାଟୁନ ସିଆର୍‌ପିଏଫ୍‌, ୭୨ ହୋମଗାର୍ଡ ସୁରକ୍ଷା ବ୍ୟବସ୍ଥାରେ ନିୟୋଜିତ ଥିଲେ । ମେଢ ସମ୍ମୁଖ, ଡାହାଣ ଓ ବାମ ପାର୍ଶ୍ୱରେ ପୋଲିସ ମୁତୟନ ରହିଥିଲେ । ଏଥିସହ ସାଦା ପୋଷାକରେ ସ୍ବତନ୍ତ୍ର ପୋଲିସ ନିୟୋଜିତ ଥିଲେ । ଟ୍ରାଫିକ୍‌ ନିୟନ୍ତ୍ରଣ ପାଇଁ ସ୍ବତନ୍ତ୍ର ବ୍ୟବସ୍ଥା କରାଯାଇଥିଲା । ଶ୍ରୀରାମ ନବମୀ ମହୋତ୍ସବ ଉପଲକ୍ଷେ ଆୟୋଜିତ ନଗର ସଂକୀର୍ତ୍ତନ ଆକର୍ଷଣର କେନ୍ଦ୍ରବିନ୍ଦୁ ପାଲଟିଥିଲା । ଏନେଇ ଯୁବଗୋଷ୍ଠୀଙ୍କ ମଧ୍ୟରେ ନାହିଁ ନ ଥିବା ଉତ୍ସାହ ଉଦ୍ଦୀପନା ଦେଖିବାକୁ ମିଳିଥିଲା । ଗେଲପୁର, ସନ୍ଥିଆ, ଏଲଖା, ଗେଲଟିଆ, ଗବସାହି, ଜଗନ୍ନାଥପୁର, ଜାନୁଗଞ୍ଜ, ମଠସାହି, କୁଅଁାସ, ରାଜଘାଟ ଆଦି ଅଞ୍ଚଳର ମେଢ ଏଥିରେ ସାମିଲ ହୋଇଥିଲେ । ‘ଜୟଶ୍ରୀ ରାମ’, ‘ଜୟ ବଜରଙ୍ଗ ବଲି’ ଧ୍ୱନିରେ ପରିବେଶ କମ୍ପି ଉଠିଥିଲା। ଶୋଭାଯାତ୍ରା ବେଳେ ରାସ୍ତାର ଦୁଇପାର୍ଶ୍ୱରେ ହଜାର ହଜାର ମହିଳା ପୁରୁଷ ଉପସ୍ଥିତ ରହି ଶଙ୍ଖ, ହୁଳହୁଳି ମାଧ୍ୟମରେ ମେଢ଼ଗୁଡିକୁ ସ୍ବାଗତ ଜଣାଇଥିଲେ । କମିଟି ସଭାପତି ରାୟରାମାନନ୍ଦ ମହାପାତ୍ର, ତୁଷାର ଦାସ, ମନମୋହନ ସାମଲ, ବଦ୍ରିନାରାୟଣ ଧଳ, ଡା. ପ୍ରଦୀପ ନାୟକ, ସଂଗ୍ରାମ ଆଚାର୍ଯ୍ୟ, ମାନସ ମହାନ୍ତି, ବିଷ୍ଣୁ ସେଠୀ, ସରୋଜ ପଢିଆରୀ, ତପନ ମହାନ୍ତି, ସ୍ବାଧୀନ ସୁନ୍ଦର ଦାସ ଓ ନିଲୁ ସେନାପତି ପ୍ରମୁଖ ଶୋଭାଯାତ୍ରା ପରିଚାଳନା କରିଥିଲେ । ଭାଇଚାରାର ସହର ଭଦ୍ରକରେ ରାମନବମୀ ସମାରୋହ ପ୍ରତିବର୍ଷ ଏକ ସ୍ବତନ୍ତ୍ର ସାଂସ୍କୃତିକ ଗୁରୁତ୍ୱ ବହନ କରିଆସୁଛି ।
मनुष्य का जीवन कल्याण करने के लिए होता है- योगेश ।
Kunal Kumar Gupta 2019-04-13 15:35:38
दलसिंहसराय, 13 अप्रैल (आरएनआई) | स्थानीय काली चौक पर चल रहे भागवत कथा के विश्रामे कथा में शनिवार को परम पूज्य महाराज श्री योगेश प्रभाकर जी ने कहाँ कि मनुष्य का जीवन तो कल्याण करने के लिए मिला था ।
श्रीराम लक्ष्मण जानकीजी मंदिर में बारे ही धूम धाम से मनाया गया रामनवमी ।
Kunal Kumar Gupta 2019-04-13 14:25:49
दलसिंहसराय, 13 अप्रैल (आरएनआई) | रामनवमी के शुभावसर पर प्रखंड के केवटा पंचायत में स्थित "श्रीराम लक्ष्मण जानकीजी मंदिर"के प्रांगण मे राम जन्म समारोह बारे ही धूम धाम व उल्लास के साथ मनाया गया ।
श्रीराम के जयघोष से गूंज उठा आरा शहर , नगाड़े और डीजे का धुन पर झूमते रहे राम भक्त
Rama Shanker Prasad 2019-04-13 14:25:43
आरा, 13 अप्रैल (आरएनआई) | भोजपुर के आरा में रामनवमी के मौके पर शनिवार को शहर में निकली रथ यात्रा व शोभायात्रा में रामभक्त उमड़ पड़े। शोभायात्रा में जयश्री राम के नारों से सारा शहर गुंजता रहा। स्थानीय आरा रामगढ़िया से भगवान श्रीराम की प्रतिमा के साथ निकली शोभा यात्रा जैसे जैसे आगे बढ़ता गया राम भक्तो का सैलाव उमड़ता चला गया। सभी भक्त परंपरागत भगवा परिधानों में कला का प्रदर्शन करते रहे। शोभायात्रा में राम भक्तों ने जय श्रीराम और भारत माता की जय आदि के नारे लगाए। स्थानीय छुूआपट्टी सहित विभिन्न चौक चाराहों पर शोभायात्रा के उपर पुष्प वर्षा किया गया। सड़क किनारे से लेकर मकान के छतों तक दर्शकों ने रथयात्रा का लुफ्त उठाया। रथ यात्रा में विभिन्न तरह की झांकिया आकर्षण का केंद्र बना रहा। खासकर भगवान श्रीराम का आकर्षक प्रतिमा, राम जानकी झांकी और आदिवासी नृत्य को लोगों ने खूब सराहा। शोभायात्रा स्थानीय रामगढ़िया से शुरू होकर धर्मन चौक गोपाली चौक सदर अस्पताल होते हुए मठिया नवादा इत्यादि रास्ते से पूरे शहर में भ्रमण किया ।पोस्टआफिस चौक, आरा स्टेशन पकड़ी चौक रमना होते हुए चिलचिलाती धूप में रामभक्तों का जोश और जज्बा का कोई ठिकाना नहीं था। कार्यक्रम के अध्यक्ष ने पूरी तैयारी कर रखा था। जगह जगह लोगों ने स्टॉल लगाकर रामभक्तों को शीतल जल व शरबत पिलाया। रथ यात्रा को देखने के लिए ग्रामीण इलाके से भी बड़ी संख्या मे लेाग शहर आए थे। जिला प्रशासन की टीम खुद शोभायात्रा में शामिल हो निगरानी करते रहीं। मौके पर सुरक्षा के भी अभूतपूर्व व्यवस्था देखी गयी। जिसे कहा जा सकता है कि भोजपुर जिला प्रशासन रामनवमी पर्व को लेकर पूरी सतर्क पहले से थी, जिससे तैयारी में कोई व कोई कसर नहीं छोड़ता।
Baisakhi and Ram Navami being celebrated across country
Root News of India 2019-04-13 11:57:11
New Delhi, April 13 (RNI): Baisakhi is being celebrated in the northern part of the country today. The festival of harvest is celebrated with much fanfare in Punjab, Haryana and Chandigarh.
लोकतंत्र के महापर्व के बीच लोक आस्था का चैती छठ शुरू
Rama Shanker Prasad 2019-04-08 22:26:59
भोजपुर, 8 अप्रैल (आरएनआई) | लोकतंत्र के महापर्व आम चुनाव की सरगर्मी के बीच लोक आस्था का महापर्व चैती छठ मंगलवार को नहाय-खाय के साथ शुरू हो जाएगा। 11 अप्रैल को जहां आम चुनाव के लिए मतदान होगा, वहीं तमाम छठ व्रती इसी दिन संध्या में डूबते हुए सूर्य को अ‌र्घ्यदान करेंगे। छठ घाटों पर अ‌र्घ्यदान का भक्तिमय उत्साह देखते बनेगा। खासकर जिन घरों में व्रती छठ व्रत कर रही हैं वहां का माहौल देखते बनता है। छठव्रती तालाब, पोखर, नदी, कुएं के पास जाकर पवित्र स्नान करेंगे। भगवान सूर्य की अराधना करने के बाद अनुष्ठान को लेकर संकल्प लेते हुए नहाय-खाय का प्रसाद ग्रहण करेंगें। नहाय-खाय के दिन मुख्य रूप से कद्दू की सब्जी, अरवा चावल व चना दाल को प्रसाद के रूप में लिया जाता है। चैती छठ पूजा को लेकर जिले भर के श्रद्धालुओं में उत्साह देखा जा रहा है। खासकर ग्रामीण इलाकों में उत्साह देखते ही बनता है। जिन घरों में छठ व्रत होना है वहां अभी से ही पारंपरिक गीत बज रहे हैं। पूजा को लेकर श्रद्धालुओं ने मिट्टी के बर्तन, सूप-दउरा के साथ पूजन सामग्रियों की खरीदारी की।10 अप्रैल- खरना11 अप्रैल- डूबते सूर्य को पहला अ‌र्घ्य
साधको के लिए नवरात्री अमृत काल के तो पुण्यार्जन के लिए सर्वश्रेष्ठ समय है नवरात्री - आचार्य प्रभाकर जी महाराज ।
Kunal Kumar Gupta 2019-04-07 14:46:38
दलसिंहसराय, 7 अप्रैल (आरएनआई) | शहर के काली चौक पर रविवार से शुरू हुये भागवतकथा के प्रथम दिन वृन्दावन से आये हुए भागवतकिंकर बाल व्यास श्री योगेश प्रभाकर जी महाराज ने बताया की श्रीमदभागवत के श्रवण मात्र से पाप-ताप से व्याकुल चित से शांति मिलती है ।
नवरात्रि के प्रथम दिन सुनाए गए श्रीमद् भागवत कथा में रोचक प्रसंग
Ram Prakash Rathore 2019-04-07 13:13:59
शाहाबाद, 7 अप्रैल (आरएनआई) | कात्यायनी शक्तिपीठ पर बासंतिक नवरात्रि के पावन पर्व पर चल रही श्रीमद्भागवत कथा के प्रथम दिन कथा व्यास ने भक्ति ज्ञान और वैराग्य के विषय मे बहुत ही रोचक प्रसंग प्रस्तुत किया। उन्होंने रहस्योद्घाटन करते हुए कहा कि एक बार वृन्दावन में एक युवा स्त्री के पास दो वृद्ध व्यक्ति अचेतावस्था में पड़े थे। देवर्षि नारद ने स्त्री से पूछा कि आप कौन हैं और ये दो पुरुष कौन हैं तो स्त्री ने बताया कि में भक्ति हूँ। द्रविड़ प्रदेश में मेरा जन्म हुआ और कर्नाटक में धीरे2 बड़ी हुई। महाराष्ट्र में कहीं2 हमारा सम्मान हुआ और गुजरात आते आते मेरा शरीर जर्जर हो गया तो मैं वृन्दावन आयी। यहाँ के प्रभाव से हम तो युवा हो गए किन्तु ये मेरे दोनों पुत्र यहाँ आकर जर्जर और अचेत हो गए हैं। भक्ति की दशा को देखकर देवर्षि नारद ने उन दोनों पुरुषों के कानों में गीता के श्लोक और वेद की ऋचाएं सुनायीं किन्तु चेतना नहीं आयी। तो नारद जी ने यह प्रकरण विष्णु जी के सामने रखा तो विष्णु जी ने कहा-यदि आप इन पर कृपा करना ही चाहते हैं तो इन्हें श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराओ। नारद जी द्वारा सौनकादिक ऋषियों से उन तीनों को कथा का श्रवण कराया गया जिसके प्रभाव से वह तीनों युवा हो गए। इस प्रकार कलियुग में एक मात्र श्रीमद्भागवत कथा ही कल्याणकारी है। कथा श्रवण करने वालों में से राजीव नयन दीक्षित, अरुण कुमार श्रीवास्तव, अंकित मिश्र, धीरज मिश्र, राजा मिश्र, अवधेश मिश्र, करुणा कुमारी मिश्रा, दीक्षा श्रीवास्तव, शिखा रस्तोगी आदि सैकड़ों स्त्री/पुरुषों ने कथा का श्रवण कर रसपान किया।
भागवत कथा से पूर्व 501 कन्याओं द्वारा निकाला गया भव्य कलश यात्रा ।
Kunal Kumar Gupta 2019-04-06 10:27:51
दलसिंहसराय, 6 अप्रैल (आरएनआई) | चैत्र प्रतिपदा प्रथम दिवस में माँ काली की स्थापना वर्षगाँठ और संकट मोचन हनुमान के प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर स्थानीय आर वी कॉलेज के मैदान से शनिवार को भव्य शोभा यात्रा सह कलश यात्रा निकाली गयी ।
चैत्र नवरात्रि हिंदुओं द्वारा मनाया जाने वाला एक बेहद प्रमुख पर्व है :- अतुल शास्त्री
Laxmi Kant Pathak 2019-04-05 16:07:46
मुुम्बई, 5 अप्रैल (आरएनआई) | चैत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों का आरंभ वर्ष 6 अप्रैल 2019 के दिन से होगा. इसी दिन से हिंदु नवसंवत्सर का आरंभ भी होता है. चैत्र मास के नवरात्र को ‘वार्षिक नवरात्र’ कहा जाता है. इन दिनों नवरात्र में शास्त्रों के अनुसार कन्या या कुमारी पूजन किया जाता है. कुमारी पूजन में दस वर्ष तक की कन्याओं का विधान है. नवरात्रि के पावन अवसर पर अष्टमी तथा नवमी के दिन कुमारी कन्याओं का पूजन किया जाता है.
Registration for Amarnath Yatra begins
Root News of India 2019-04-03 12:34:52
New Delhi, April 3 (RNI): Registration of pilgrims for Amarnath Yatra commenced on Tuesday for both the Baltal and Chandanwari routes in Jammu and Kashmir.

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